मैदान और सपोर्ट के लिए तरस रही हैं छतरपुर की महिला खिलाड़ी; जानें क्या है खेल का हाल
छतरपुर की महिला फुटबॉल खिलाड़ी सुविधाओं और उचित मैदान के अभाव में मायूस हैं। कभी फुटबॉल का गढ़ रहा छतरपुर आज प्रतिभाओं को तरस रहा है।
छतरपुर। छतरपुर की मिट्टी में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में आज यहां की फुटबॉल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। एक समय था जब छतरपुर की फुटबॉल रैंकिंग देश में 7वें स्थान पर थी। यहां का 'एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबॉल टूर्नामेंट' देश का पहला ऐसा प्रतिष्ठित आयोजन था, जो किसी शिक्षक की याद में शुरू हुआ था। लेकिन कोरोना काल के बाद से पिछले 6 वर्षों से यह टूर्नामेंट बंद पड़ा है, जिससे शहर की फुटबॉल धड़कनें मानो थम सी गई हैं।
📉 70 खिलाड़ियों का सफर, 5 पर आकर थमा
छतरपुर में कभी 70 महिला फुटबॉल खिलाड़ी हुआ करती थीं, लेकिन उचित प्रशिक्षण, सुरक्षित माहौल और मैदान की कमी के कारण अब केवल 5 खिलाड़ी ही इस खेल से जुड़ी रह गई हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखती हैं, लेकिन न तो कोई सरकारी सहयोग है और न ही उन्हें अभ्यास के लिए एक अच्छा ग्राउंड मिल रहा है।
🗣️ खिलाड़ियों का दर्द: "जुनून है, पर एक्सपोजर नहीं"
स्थानीय खिलाड़ी अदिति तिवारी, नेहा गुप्ता और सपना पटेल बताती हैं कि वे पिछले कई वर्षों से फुटबॉल खेल रही हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा है, क्योंकि न तो उन्हें मोटिवेट करने वाला कोई है और न ही खेलने के लिए सुरक्षित वातावरण। फुटबॉल विशेषज्ञ बसीर खान के अनुसार, जिले की बेटियों में भरपूर टैलेंट है, बस उन्हें प्रशासन के सहयोग और बेहतर बुनियादी ढांचे की दरकार है।
🏟️ प्रशासन की अनदेखी और भविष्य की चिंता
70 साल पुरानी खेल संस्कृति को संजोने वाला छतरपुर आज बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है। एसएन बनर्जी टूर्नामेंट, जिसने छतरपुर को देशभर में पहचान दिलाई थी, आज दोबारा शुरू होने की बाट जोह रहा है। यदि प्रशासन इन प्रतिभाशाली बेटियों के लिए फुटबॉल का मैदान और सुरक्षित माहौल मुहैया करा दे, तो यह खिलाड़ी न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करने का दम रखती हैं।
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