तबादलों में धांधली? ऑनलाइन व्यवस्था के दावों के बीच मंत्री की अनुशंसा पर हुए 24 शिक्षकों के ट्रांसफर

ग्वालियर शिक्षा विभाग में तबादला प्रक्रिया पर सवाल। ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद मंत्री की अनुशंसा पर 24 शिक्षकों के सीधे ट्रांसफर। पात्र शिक्षक रह गए मायूस।

Jul 03, 2026 - 10:03
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तबादलों में धांधली? ऑनलाइन व्यवस्था के दावों के बीच मंत्री की अनुशंसा पर हुए 24 शिक्षकों के ट्रांसफर

ग्वालियर। जिला शिक्षा विभाग में हाल ही में संपन्न हुई शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया विभागीय पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर गई है। जिले में कुल 240 शिक्षकों के तबादले किए गए, जिनमें से 24 तबादले सीधे तौर पर जिले के प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर किए गए। इस 'सिफारिशी' व्यवस्था ने उन दावों की पोल खोल दी है, जिसमें विभाग द्वारा प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और हस्तक्षेप मुक्त बताया जा रहा था।

💻 पोर्टल पर 'सीधी फीडिंग' का खेल

शासन के नियमों के अनुसार, तबादले केवल उसी स्थिति में होने थे जब विभाग को आवश्यकता हो या शिक्षक ने स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया हो। पोर्टल पर मैरिट और पात्रता के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी होनी थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार, प्रभारी मंत्री के कार्यालय से 24 चहेते शिक्षकों की एक विशेष सूची जिला शिक्षा विभाग को भेजी गई। विभागीय अधिकारियों के दबाव में कर्मचारियों ने उन शिक्षकों के नाम भी पोर्टल पर सीधे फीड कर दिए, जिन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन तक नहीं किया था।

😡 शिक्षकों में आक्रोश: पात्र रहे मायूस

इस दोहरी नीति के कारण जिले के आम शिक्षकों और विभिन्न शिक्षक संगठनों में गहरा आक्रोश है। कई ऐसे पात्र शिक्षक, जो गंभीर बीमारियों, पारिवारिक समस्याओं या म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए लंबे समय से ऑनलाइन आवेदन कर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें इस प्रक्रिया में पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। शिक्षकों का सीधा सवाल है कि यदि तबादले केवल अनुशंसा और ऑफलाइन सूचियों के आधार पर ही होने थे, तो ऑनलाइन आवेदन का ढोंग क्यों रचा गया?

⚖️ व्यवस्था की शुचिता पर संकट

यह घटनाक्रम न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि उन मेहनती शिक्षकों के मनोबल को भी तोड़ता है जो पूरी ईमानदारी से सिस्टम का पालन कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से ऑनलाइन सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म होती है और विभाग की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा कम होता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन इस गड़बड़ी पर कोई संज्ञान लेता है या यह मामला केवल शिकायतों तक ही सीमित रहेगा।

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