दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी में मतांतर? कांग्रेस में मची अंतर्कलह, वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से की हस्तक्षेप की मांग

मध्य प्रदेश कांग्रेस में बढ़ती अंतर्कलह और वर्चस्व की लड़ाई। संगठन सृजन अभियान फेल? दिग्गी-जीतू के बीच मतभेद और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी, पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Jul 03, 2026 - 10:00
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दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी में मतांतर? कांग्रेस में मची अंतर्कलह, वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से की हस्तक्षेप की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस इन दिनों भारी अंतर्कलह और वर्चस्व की लड़ाई के दौर से गुजर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर खुलकर मतांतर सामने आ रहे हैं। इस स्थिति ने संगठन के सशक्तीकरण के लिए चलाए गए 'संगठन सृजन अभियान' की सफलता पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

⚔️ अंतर्कलह का बढ़ता प्रभाव और नेताओं के अलग सुर

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने कार्यकर्ताओं को असमंजस में डाल दिया है। नियुक्तियों को लेकर दिग्विजय सिंह का जीतू पटवारी पर कटाक्ष हो या राज्य सरकार के मामलों पर दोनों वरिष्ठ नेताओं के विरोधाभासी बयान, इन सभी ने यह साबित कर दिया है कि पार्टी में समन्वय का घोर अभाव है। विशेष रूप से हालिया भूमि मामले में जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए घोटाले के आरोपों को दिग्विजय सिंह द्वारा क्लीनचिट दिए जाने के बाद मामला केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँच गया है।

⚠️ हार के बाद से चरमराया संगठन

नगरीय निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी की पहल पर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद शुरू हुई थी। जीतू पटवारी को अध्यक्ष और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई, ताकि 'तेरा-मेरा' की परंपरा खत्म हो सके। हालांकि, ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। जिला और ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां होने के बावजूद, वरिष्ठ नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं पार्टी के एजेंडे पर भारी पड़ रही हैं।

🔄 पीढ़ी परिवर्तन बनाम वरिष्ठों की चुप्पी

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता का अपना ही अलग पैमाना है। जहाँ अजय सिंह प्रदेशव्यापी दौरे पर हैं, वहीं कमलनाथ जैसे कद्दावर नेता परिदृश्य से गायब हैं। जानकारों का मानना है कि पार्टी ने भले ही 'पीढ़ी परिवर्तन' (Generation Shift) कर दिया हो, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने इसे पूरी तरह से आत्मसात नहीं किया है। अरुण यादव जैसे नेताओं का केंद्रीय नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग करना यह स्पष्ट करता है कि कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की चुनौती पार्टी के लिए फिलहाल सबसे बड़ी बनी हुई है।

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