भोपाल: सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर निशाना, बोले- 'अर्थशास्त्री पीएम को जीरो बैलेंस अकाउंट का महत्व नहीं पता था'
भोपाल में साइबर सुरक्षा वर्कशॉप के दौरान सीएम मोहन यादव ने महू में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर बनाने का ऐलान किया। साइबर फ्रॉड पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में जो पूर्व प्रधानमंत्री अर्थशास्त्र के बड़े जानकार थे, वे जीरो बजट अकाउंट की महत्ता को नहीं समझ सके। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी द्वारा खुलवाए गए जीरो बैलेंस अकाउंट के कारण ही आज गरीबों को डीबीटी (DBT) के जरिए उनके हक का पैसा सीधे मिल रहा है। सीएम ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में आयोजित 'साइबर सुरक्षा और स्टेट डाटा सिक्योरिटी' राज्य स्तरीय वर्कशॉप में यह बात कही।
⚠️ अधिकारियों को सख्त चेतावनी: लापरवाही पर होगी वसूली
मुख्यमंत्री ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक बड़ी जवाबदेही है। यदि साइबर अपराधों में लापरवाही हुई, तो इसकी भरपाई संबंधित विभाग से की जाएगी। सीएम ने कहा, "किसी व्यक्ति की जीवन भर की कमाई एक झटके में साइबर अपराधियों द्वारा लूट ली जाए, यह अत्यंत चिंताजनक है। हमें इन अदृश्य अपराधियों पर नकेल कसने के लिए हर संभव प्रबंधन करना होगा।"
🛡️ डेटा सुरक्षा सीमा की सुरक्षा से भी अहम
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में डेटा राज्य की सबसे मूल्यवान संपत्ति है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में डेटा सुरक्षा, सीमा की सुरक्षा से भी बढ़कर है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए सीएम ने महू में 'मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग' के सहयोग से अत्याधुनिक साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है।
📈 14 साल में 77 गुना बढ़े साइबर अपराध
वर्कशॉप के दौरान एडीजी एसाई मनोहर ने बताया कि बीते 14 वर्षों में साइबर अपराध 77 गुना बढ़ गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2000 में भोपाल में देश का पहला साइबर अपराध दर्ज हुआ था। सीएम के निर्देश पर साइबर हेल्पलाइन की क्षमता तीन गुना बढ़ाने का परिणाम यह रहा कि अब तक लोगों के 137 करोड़ रुपये साइबर फ्रॉड से बचाए गए हैं।
⚖️ डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की तैयारी
प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने जानकारी दी कि 'पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' को पूरी तरह लागू करने की तैयारी है। इसके दायरे में सभी सरकारी और प्राइवेट संस्थान आएंगे। डेटा लीक होने की स्थिति में 250 करोड़ रुपये तक की पेनल्टी का प्रावधान किया जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी।
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