धार के जामला गांव में कुदरत का कहर; बाढ़ में बहने लगा शव, ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाला
धार के जामला गांव में अंतिम संस्कार के दौरान अचानक आई बाढ़। श्मशान घाट तक पहुंचा पानी, बहने लगी जलती चिता। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डाल शव सुरक्षित निकाला।
धार। धार जिले के बाग क्षेत्र स्थित ग्राम जामला में गुरुवार शाम एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली घटना घटी। गांव के 62 वर्षीय बापू नाछरिया रावत के अंतिम संस्कार के दौरान अचानक आई बाढ़ ने पूरे श्मशान घाट को अपनी चपेट में ले लिया। उफनते पानी का बहाव इतना तेज था कि वह जलती हुई चिता और शव को अपने साथ बहा ले गया। इस भयावह मंजर ने वहां मौजूद परिजनों के होश उड़ा दिए।
💪 ग्रामीणों का साहस: जान जोखिम में डालकर बचाया शव
जैसे ही बाढ़ का पानी श्मशान घाट तक पहुंचा, वहां अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, ग्राम जामला के लोगों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी जान दांव पर लगाई और तेज बहाव में बह रहे शव को मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। सरपंच प्रतिनिधि कैलाश भंवर ने बताया कि शव का कुछ हिस्सा आग की चपेट में आ चुका था, लेकिन ग्रामीणों की तत्परता ने इसे पूरी तरह बहने से बचा लिया।
⏳ घंटों इंतजार के बाद पूरा हुआ अंतिम संस्कार
घटना के बाद परिजन और ग्रामीण नाले का जलस्तर कम होने का घंटों तक इंतजार करते रहे। जैसे ही स्थिति सामान्य हुई, पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मृतक का दोबारा अंतिम संस्कार किया गया। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। शोक में डूबे परिवार के लिए यह हादसा किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं था, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है।
⚠️ प्रशासन के लिए सबक
यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि मानसून के दौरान नदी-नालों के किनारे या निचले इलाकों में स्थित श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार करते समय अत्यधिक सावधानी बरतना जरूरी है। अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर कुदरत के अनिश्चित व्यवहार को सबके सामने ला खड़ा किया है, जिससे सबक लेने की आवश्यकता है।
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