प्रतिमा बागरी की जाति पर छिड़ा विवाद; छानबीन समिति के समक्ष हुई सुनवाई, मंत्री ने खारिज किए आरोप
एमपी राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई। मंत्री ने 110 साल पुराने रिकॉर्ड के साथ आरोपों को नकारा।
भोपाल। मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर मंत्रालय में अनुसूचित जाति मामलों की राज्य स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने मंत्री पर सामान्य वर्ग (राजपूत) से होने और फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी ने करीब एक घंटे तक अपनी बात रखी और 110 वर्ष पुरानी खसरा-खतौनी की नकल व कोर्ट के दस्तावेजों के माध्यम से आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
⚔️ विरोधियों पर बरसीं मंत्री, बताया ब्लैकमेलिंग गिरोह
सुनवाई के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए प्रतिमा बागरी ने इस पूरे घटनाक्रम को एक राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि "जब बागरी समाज का व्यक्ति विधायक बनता है, तो किसी को समस्या नहीं होती, लेकिन मंत्री बनते ही विरोधी सक्रिय हो जाते हैं।" मंत्री ने आरोप लगाया कि एक ब्लैकमेलिंग गिरोह उन्हें डराने का प्रयास कर रहा है, जो उनके मंसूबों में कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के झांसे में आने वाली नहीं हैं।
🗳️ राजनीतिक तर्कों और गजट पर रार
मंत्री ने अपने पक्ष में राजनीतिक तर्क देते हुए कहा कि केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी गुनौर जैसी आरक्षित सीटों से जुगल किशोर बागरी, काशी बागरी, शिवदयाल बागरी और महेंद्र बागरी जैसे नेताओं को प्रत्याशी बनाया है, जो यह सिद्ध करता है कि बागरी समाज अनुसूचित जाति का ही हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार ने 1950 और 1977 के सरकारी गजट का हवाला देते हुए दावा किया कि बागरी समुदाय की स्थिति और उनकी उपजातियों को लेकर कानूनी पेंच हैं। फिलहाल, समिति इस मामले में सभी पहलुओं की जाँच कर रही है।
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