सफाई में छिंदवाड़ा का बढ़ा मान; 'वॉश ऑन व्हील्स' से बदल रही ग्रामीण तस्वीर, युवाओं को मिल रहा रोजगार

छिंदवाड़ा के 'वॉश ऑन व्हील्स प्लस' नवाचार को फिक्की (FICCI) अवार्ड्स के लिए 3 कैटेगरी में नॉमिनेशन। स्वच्छता और रोजगार का अनूठा मॉडल, लाखों लोग उठा रहे लाभ।

Jul 07, 2026 - 18:57
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सफाई में छिंदवाड़ा का बढ़ा मान; 'वॉश ऑन व्हील्स' से बदल रही ग्रामीण तस्वीर, युवाओं को मिल रहा रोजगार

छिंदवाड़ा। स्वच्छता के क्षेत्र में छिंदवाड़ा जिले द्वारा शुरू किया गया नवाचार 'वॉश ऑन व्हील्स प्लस' एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर छाया है। फिक्की (FICCI) द्वारा आयोजित 'इंडिया सैनिटेशन कोएलिशन अवॉर्ड्स-2026' में छिंदवाड़ा को तीन विशेष श्रेणियों में शॉर्टलिस्ट किया गया है। जूरी सदस्यों ने इस मॉडल की सामुदायिक सहभागिता, प्रभावी क्रियान्वयन और नवाचार के लिए जमकर प्रशंसा की है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों और जल प्रणालियों के रखरखाव के लिए एक आदर्श समाधान बनकर उभरा है।

📊 3 महत्वपूर्ण श्रेणियों में मिला नॉमिनेशन

जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार के अनुसार, जिले को निम्नलिखित श्रेणियों के लिए नामांकित किया गया है:

  • एक्सीलेंस इन सस्टेनेबल मेंटेनेंस: सामुदायिक प्रबंधन और वॉश सिस्टम के लिए।

  • बेस्ट स्किलिंग इनिशिएटिव: स्वच्छता क्षेत्र में कौशल विकास के लिए।

  • स्पेशल फोकस ऑन वॉश इन स्कूल्स: शिक्षण संस्थानों में स्वच्छता और रखरखाव के लिए।

🛠️ तकनीक और रोजगार का संगम: कैसे काम करता है यह मॉडल?

'वॉश ऑन व्हील्स प्लस' केवल सफाई का साधन नहीं, बल्कि रोजगार का एक सशक्त जरिया भी है। प्रशासन ने इसके लिए एक बार-कोड आधारित सिस्टम विकसित किया है। किसी भी स्कूल या सरकारी भवन में सफाई की आवश्यकता होने पर बार-कोड स्कैन करते ही संबंधित 'स्वच्छता साथी' को संदेश मिल जाता है, और वह तत्काल मशीन के साथ मौके पर पहुँच जाता है। इस योजना में अब शौचालयों की सफाई के साथ-साथ जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी की टंकियों की सफाई और नल-टोटी की मरम्मत जैसे कार्य भी शामिल कर लिए गए हैं।

💰 आत्मनिर्भरता की नई राह

इस नवाचार से न केवल स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ हुई है, बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को आर्थिक मजबूती भी मिली है। कई युवा और महिलाएं इस स्कीम से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। अमरवाड़ा की अनामिका वेलवंशी जैसे कई उदाहरण यह साबित करते हैं कि स्वच्छता का यह नवाचार न केवल समाज को स्वच्छ रख रहा है, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर भी बना रहा है। साल 2025 में भी इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सम्मान मिल चुका है, जो इसके निरंतर सफल संचालन को प्रमाणित करता है।

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