इंदौर: थम गया शहर फिर एक जीवन बचाने के लिए

Jan 31, 2025 - 01:50
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इंदौर: थम गया शहर फिर एक जीवन बचाने के लिए

इंदौर में एक बार फिर इंसानियत और सहयोग की मिसाल कायम हुई, जब महज 15 मिनट में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 67 वर्षीय मरीज के जीवन को संजीवनी देने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई। यह इंदौर में एक सप्ताह के भीतर 62वां ग्रीन कॉरिडोर था।

गोवा से इंदौर तक जीवनदायिनी यात्रा

गोवा के मणिपाल हॉस्पिटल में 45 वर्षीय अजय गिरी को ब्रेन हेमरेज के बाद ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद उनकी पत्नी ने परोपकार की भावना से अंगदान की स्वीकृति दी। यह पहली बार था जब गोवा से रेगुलर फ्लाइट इंडिगो 6E 813 के माध्यम से लीवर इंदौर एयरपोर्ट पहुंचा।

इंदौर में महज 15 मिनट में पहुंचा लीवर

इंदौर एयरपोर्ट से दोपहर 4:22 बजे निकला लीवर मात्र 15 मिनट में ग्रीन कॉरिडोर की सहायता से जुपिटर हॉस्पिटल पहुंचा। इंदौर ट्रैफिक पुलिस और नागरिकों के सहयोग से बनी इस आपातकालीन व्यवस्था ने एक बार फिर अंगदान के महत्व को रेखांकित किया।

यह पूरी प्रक्रिया इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, इंदौर संभागायुक्त श्री दीपक सिंह, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता और इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सेक्रेटरी डॉ. वी. पी. पांडे, सोटो मध्य प्रदेश के नोडल ऑफिसर डॉ. मनीष पुरोहित और श्री शुभम वर्मा की सतत निगरानी में संपन्न हुई। इस दौरान पूर्व डीन डॉ. संजय दीक्षित का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

मुस्कान ग्रुप से सेवादार जीतू बगानी और संदीपन आर्य, जुपिटर हॉस्पिटल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर श्री ऋतुराज एवं श्रीमती निकिता पुरंदर ने इस महत्वपूर्ण मिशन में सहयोग किया।

चार घंटे में पूरी हुई जीवन रक्षक यात्रा

दोपहर 12:31 बजे गोवा से निकले लीवर ने चार घंटे में अपनी यात्रा पूरी कर ली और जुपिटर हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट टीम को सौंप दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार के बनाए गए नियमों के तहत रोटो मुंबई द्वारा रात 10:30 बजे अलर्ट जारी किया गया था।

यह मिशन एक बार फिर साबित करता है कि जब समाज, प्रशासन और चिकित्सा क्षेत्र एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो जीवन बचाने की राह और आसान हो जाती है।

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