मप्र में आदिवासियों पर अपराधों का ग्राफ बढ़ा; छिंदवाड़ा और धार बने हॉटस्पाट, संसद में पेश आंकड़ों से खुलासा

मध्य प्रदेश में SC-ST के खिलाफ अपराधों में वृद्धि। 2023 में दलित अत्याचार में मप्र देश में तीसरे स्थान पर। सागर और ग्वालियर सबसे ज्यादा प्रभावित जिले।

Jul 07, 2026 - 18:54
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मप्र में आदिवासियों पर अपराधों का ग्राफ बढ़ा; छिंदवाड़ा और धार बने हॉटस्पाट, संसद में पेश आंकड़ों से खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। लोकसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में दलितों के खिलाफ अपराधों के मामलों में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा। प्रदेश में वर्ष 2023 में 8,232 मामले दर्ज किए गए, जबकि यह संख्या 2021 में 7,214 थी। उत्तर प्रदेश (15,130) और राजस्थान (8,449) के बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है, जो राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।

📍 हॉटस्पाट बने सागर और ग्वालियर

जिला स्तर पर विश्लेषण करें तो सागर जिला सबसे संवेदनशील बनकर उभरा है, जहाँ वर्ष 2023 में 666 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद ग्वालियर (569), शिवपुरी (404), विदिशा (345) और छतरपुर (315) का स्थान है। बुंदेलखंड और चंबल अंचल के जिलों में सामाजिक तनाव और उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में छिंदवाड़ा (149 मामले), जबलपुर (122), धार (114) और सिवनी (105) जैसे आदिवासी बहुल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

⚖️ जांच की धीमी रफ्तार और कानूनों पर सवाल

रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि अपराधों की तुलना में चार्जशीट दाखिल करने और न्यायिक प्रक्रिया की गति काफी धीमी है। वर्ष 2023 में दर्ज 8,232 मामलों के मुकाबले केवल 8,029 में ही चार्जशीट दाखिल की जा सकी। विशेषज्ञों और सामाजिक नेताओं का मानना है कि 'एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम' जैसे कड़े कानून होने के बावजूद, धरातल पर प्रभावी कार्रवाई और त्वरित न्याय का अभाव है। प्रशासनिक लापरवाही और जांच में देरी के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में लंबा समय लग रहा है, जिससे दोषियों के हौसले बुलंद हैं।

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