उज्जैन से अयोध्या तक दिग्विजय सिंह की 'सनातन पदयात्रा'; कांग्रेस के लिए संजीवनी या नई मुसीबत?

दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक की सनातन पदयात्रा पर गरमाई सियासत। क्या यह यात्रा 2028 चुनाव में कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगी या बीजेपी को मिलेगा मौका?

Jul 08, 2026 - 17:05
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उज्जैन से अयोध्या तक दिग्विजय सिंह की 'सनातन पदयात्रा'; कांग्रेस के लिए संजीवनी या नई मुसीबत?

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के कदम चर्चाओं में हैं। 20 अक्टूबर से वे राजनीति और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उज्जैन से अयोध्या तक की लंबी पदयात्रा पर निकलने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, दिग्विजय इसे अपनी 'निजी यात्रा' बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह पदयात्रा कांग्रेस के लिए 2028 के विधानसभा चुनावों में संजीवनी साबित होगी या पार्टी के लिए एक नया संकट खड़ा करेगी।

⚔️ बीजेपी का हमला: 'सनातन विरोधी छवि बदलने का प्रयास'

दिग्विजय की इस यात्रा पर कांग्रेस पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन बीजेपी हमलावर है। बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि जनता दिग्विजय के 'सनातन विरोधी' चरित्र को भली-भांति जानती है और उन्हें पहले ही राजनीति में 'रेड कार्ड' दिखा चुकी है। बीजेपी का मानना है कि यह केवल उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने का एक विफल प्रयास है, जिसका चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

📊 अतीत का आईना: नर्मदा परिक्रमा बनाम राजगढ़ की हार

दिग्विजय सिंह के लिए पदयात्राएं नई नहीं हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी 'नर्मदा परिक्रमा' को कांग्रेस की जीत का एक बड़ा कारक माना गया था, जिसने पार्टी को सरकार बनाने के करीब पहुँचा दिया था। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में राजगढ़ सीट से खुद की हार ने यह भी साबित किया कि पदयात्राएं हर बार चुनावी जीत की गारंटी नहीं होतीं। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इस बार उनकी यह यात्रा बीजेपी के राम मंदिर चंदे के मुद्दे को डाइल्यूट करने के बजाय खुद दिग्विजय के लिए ही एक चुनौतीपूर्ण 'इमेज मेकओवर' साबित हो सकती है।

🤔 कांग्रेस के लिए संजीवनी या नया संकट?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दिग्विजय सिंह अपने करियर के ऐसे पड़ाव पर हैं जहां उनके पास खोने को कुछ नहीं है। यह यात्रा उनके राजनीतिक जीवन की नई दिशा तय करेगी। सवाल यह है कि क्या जनता इस यात्रा को उनकी 'धर्म भक्ति' के रूप में देखेगी या इसे चोला बदलने के राजनीतिक दांव के तौर पर लेगी। बहरहाल, उज्जैन से अयोध्या तक की यह यात्रा आने वाले समय में मध्य प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में नए घटनाक्रमों को जन्म जरूर दे सकती है।

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