महाकाल मंदिर से लेकर खजराना मंदिर तक; चढ़ावे और दान की गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त, ऑडिट की मांग तेज

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में दान राशि में हेरफेर का आरोप। पुजारियों ने निजी दानपात्रों के जरिए समानांतर व्यवस्था खड़ी की। जानें क्या है पूरा विवाद।

Jul 08, 2026 - 17:03
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महाकाल मंदिर से लेकर खजराना मंदिर तक; चढ़ावे और दान की गड़बड़ी पर प्रशासन सख्त, ऑडिट की मांग तेज

इंदौर। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मंदिर परिसर में प्रबंध समिति की कड़ी निगरानी में रखी गई दान पेटियों के अलावा, कुछ पुजारियों पर अपने-अपने स्तर पर मूर्तियों के पास निजी दानपात्र सजाकर समानांतर दान व्यवस्था चलाने के आरोप लगे हैं। सीसीटीवी की निगरानी में रहने वाली मुख्य दान पेटियों के उलट, इन निजी पात्रों के दान का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं है।

📈 लाखों का मानदेय, फिर भी निजी दान की होड़

खजराना मंदिर के मुख्य पुजारियों के परिवारों को मंदिर समिति द्वारा प्रति माह लगभग 1.75 लाख रुपये तक का भारी मानदेय दिया जाता है। वर्ष 2014 में यह मानदेय 20 हजार से बढ़ाकर 1 लाख किया गया था, जिसके बाद वर्तमान में यह और अधिक है। मंदिर विधान (अधिनियम 2003) के अनुसार, मूर्ति के सामने चढ़ाए जाने वाले नकद, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं तत्काल अधिकृत भेंट पात्रों या दान पेटी में जानी चाहिए, लेकिन नियमों की अनदेखी कर निजी पात्रों का उपयोग पुजारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहा है।

⚖️ महाकाल मंदिर से लेकर अयोध्या तक विवादों का दौर

मंदिरों में दान और चढ़ावे में गड़बड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी दान की राशि, सोने की छड़ें और ज्वेलरी गायब होने के मामले ऑडिट रिपोर्ट में सामने आ चुके हैं। महाकाल मंदिर में कुल चढ़ावे का 36 प्रतिशत पुजारियों को देने की पुरानी परंपरा भी अक्सर विवादों में रहती है। इसके अलावा, जमीन घोटालों और दान के दुरुपयोग के आरोपों ने राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता को सवालों के घेरे में ला दिया है।

🔍 बढ़ती पारदर्शिता की मांग

अयोध्या के राम मंदिर दान मामले के बाद अब देशभर के मंदिरों में पारदर्शिता की मांग जोर पकड़ रही है। उज्जैन के महापौर और अन्य जन प्रतिनिधियों द्वारा मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट की मांग के बाद, अब इंदौर के खजराना मंदिर के दान प्रबंधन पर भी प्रशासन की पैनी नजर है। मंदिर विधान के अनुसार, जो भी चढ़ावा आता है, उसका पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से मंदिर कार्यालय में दर्ज होना अनिवार्य है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान न हो।

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