एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाएं बेहाल; स्वजन खुद धकेल रहे स्ट्रेचर, कंपनी की मनमानी से मरीज परेशान

इंदौर के एमवाय अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम। करोड़ों के भुगतान के बाद भी मरीज स्ट्रेचर के लिए मोहताज। आउटसोर्स कंपनी की लापरवाही पर उठ रहे सवाल।

Jul 12, 2026 - 09:58
0
एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाएं बेहाल; स्वजन खुद धकेल रहे स्ट्रेचर, कंपनी की मनमानी से मरीज परेशान

इंदौर। शासकीय अस्पतालों में व्यवस्था सुधारने के तमाम दावों के बावजूद हकीकत बेहद कड़वी है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमवाय अस्पताल (MYH) सहित अन्य शासकीय अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है। आलम यह है कि मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर तक के लिए उनके स्वजनों को ही धकेलना पड़ता है। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें माता-पिता अपने बीमार बेटे को स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल में भटकते नजर आए थे।

📉 लापरवाही का आलम: कंपनी पर जुर्माने का नहीं हो रहा असर

अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के लिए आउटसोर्स कंपनी 'बीवीजी' (BVG) पर न केवल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, बल्कि उसे ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा भी की है। बावजूद इसके, अस्पतालों में न तो कंपनी के कर्मचारी नजर आते हैं और न ही व्यवस्था में कोई सुधार हुआ है। उल्लेखनीय है कि कंपनी को साफ-सफाई और सुरक्षा के नाम पर हर महीने करोड़ों रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली की निगरानी का कोई ठोस तंत्र दिखाई नहीं देता। हैरानी की बात यह है कि खराब परफॉरमेंस के बावजूद कंपनी को अन्य महत्वपूर्ण स्थानों जैसे आईएसबीटी की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है।

👩‍🦽 मरीजों का दर्द: व्हीलचेयर के लिए भटकते स्वजन

अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों के स्वजन अपनी आपबीती बताते हुए कहते हैं कि उन्हें जांच के लिए एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। उमा बाई नामक महिला ने बताया कि उनकी मां चल नहीं सकतीं, और उन्हें व्हीलचेयर धकेलते हुए पुरानी बिल्डिंग तक ले जाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। यही स्थिति रोजाना अस्पताल आने वाले बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की है।

⚠️ सुशासन पर सवाल: क्या महज जुर्माना काफी है?

बीवीजी कंपनी की कार्यशैली पर बीते चार महीनों में पांच बार लाखों रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार से शराब की पेटियां मिलने जैसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी हैं। चार मेडिकल कॉलेजों में कंपनी का प्रदर्शन खराब पाए जाने के बाद इसे ब्लैकलिस्ट किया गया, फिर भी इंदौर के अस्पतालों में बदलाव न होना प्रशासनिक ढिलाई की ओर इशारा करता है। मरीजों का कहना है कि जुर्माने से ज्यादा जरूरी है कि अस्पताल में मरीजों को समय पर सहायता उपलब्ध हो।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User