ट्रंप ने ईरान को दी 'सबसे बड़े' सैन्य हमले की चेतावनी; कहा- 1,000 मिसाइलें निशाने पर तैयार
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर। ट्रंप की चेतावनी के बाद मुज्तबा खामेनेई ने लिया बदले का संकल्प। जानें क्या ट्रंप की मौत के बाद अमेरिका अपने आप करेगा हमला?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी हत्या या हत्या की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका ऐसा सैन्य हमला करेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया होगा। ट्रंप के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी सेना को इसके लिए स्थायी निर्देश दे दिए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि 1,000 मिसाइलें पहले से ईरान के ठिकानों पर लक्षित हैं और किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
🔥 मुज्तबा खामेनेई का पलटवार: "बदले की कसम"
ट्रंप के बयानों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया भी आक्रामक रही है। मौजूदा सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने सरकारी टीवी पर घोषणा की कि ईरान अपने शहीदों के खून का बदला जरूर लेगा। उन्होंने कहा कि यह पूरे ईरानी राष्ट्र की इच्छा है और वे इसे हर हाल में पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बयान ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ उठे विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है।
🛡️ ट्रंप की मौत के बाद क्या अमेरिका खुद हमला करेगा?
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रपति की हत्या के बाद सेना स्वतः किसी देश पर हमला कर सकती है? इसका उत्तर 'नहीं' है। अमेरिका में कोई ऐसा कानून नहीं है जिसके तहत राष्ट्रपति की मृत्यु होते ही सैन्य हमला अपने आप शुरू हो जाए।
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राष्ट्रपति उत्तराधिकार: ट्रंप की किसी भी अनहोनी की स्थिति में 25वें संशोधन और 1947 के कानून के तहत उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तुरंत राष्ट्रपति और सेना के सर्वोच्च कमांडर बन जाएंगे।
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अंतिम निर्णय: लेखक गैरेट एम. ग्राफ के अनुसार, ट्रंप अपने उत्तराधिकारी के लिए पहले से निर्देश (Standing Orders) छोड़ सकते हैं, लेकिन उन निर्देशों को लागू करना या न करना पूरी तरह नए राष्ट्रपति (जेडी वेंस) के विवेक पर निर्भर करेगा।
🏛️ सरकारी निरंतरता की योजना (Continuity of Government)
अमेरिका के पास 'कंटीन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट' जैसी विशेष योजनाएं जरूर हैं, जिनका उद्देश्य किसी बड़े संकट या आपदा के समय सरकार को संचालित रखना है, लेकिन ये योजनाएं बिना मानवीय निर्णय के स्वतः हमले (Automatic Attack) का आदेश नहीं देतीं। परमाणु हमले या सैन्य कार्रवाई का अंतिम अधिकार हमेशा उस समय के निर्वाचित राष्ट्रपति के पास ही होता है।
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