भगवान महाकाल की 6 सवारियों का रूट और दर्शन का नया नियम; कावड़ यात्रियों के लिए विशेष निर्देश
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में सावन-भादो मास के लिए नई दर्शन व्यवस्था। 3 अगस्त से निकलेंगी सवारियां। भस्म आरती और मंदिर खुलने के समय में बड़ा बदलाव।
उज्जैन। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भादो मास को लेकर विशेष तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में दर्शन व्यवस्था और सवारी मार्ग को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सावन की पहली सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जबकि भादो मास की अंतिम 'राजसी सवारी' 7 सितंबर को निकाली जाएगी।
📅 सवारी तिथियां और मार्ग
श्रावण मास में चार और भादो मास में दो, कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी।
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श्रावण मास: 3, 10, 17 और 24 अगस्त (सभी सोमवार)।
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भादो मास: 31 अगस्त और 7 सितंबर (राजसी सवारी)। सवारी मंदिर के सभामंडप से शुरू होकर महाकाल लोक, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और रामघाट होते हुए वापस मंदिर लौटेगी। 7 सितंबर की राजसी सवारी का मार्ग विस्तृत रहेगा, जो कण्ठाल और सराफा बाजार से होकर गुजरेगा।
⏰ भस्म आरती और पट खुलने का नया समय
30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक भस्म आरती और मंदिर के कपाट खुलने का समय इस प्रकार रहेगा:
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सामान्य दिन: सुबह 3 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। भस्म आरती सुबह 3 से 5 बजे तक होगी।
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प्रत्येक सोमवार: सुबह 2:30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। भस्म आरती सुबह 2:30 से 4:30 बजे तक संपन्न होगी।
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8 सितंबर से व्यवस्था पूर्ववत हो जाएगी।
🚶 दर्शन और पार्किंग की सुव्यवस्थित व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए त्रिवेणी संग्रहालय से होते हुए नंदी द्वार और महाकाल लोक से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। जल अर्पण की सुविधा सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में उपलब्ध होगी। प्रशासन ने मंदिर के आसपास मेघदूत वन, नीलंकठ और चारधाम सहित 6 प्रमुख पार्किंग स्थल चिन्हित किए हैं ताकि यातायात बाधित न हो।
💧 कावड़ यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
कावड़ यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है:
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अनुमति वाले दिन: मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को प्रवेश मिलेगा।
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प्रतिबंधित दिन: शनिवार, रविवार और सोमवार को भीड़ अधिक होने के कारण कावड़ दलों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे भीड़ प्रबंधन में सहयोग करें और निर्धारित दर्शन मार्ग का ही पालन करें। प्रशासन इस बार 'प्रोएक्टिव क्राउड मैनेजमेंट मॉडल' के जरिए श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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