इंदौर के स्कूलों में पारंपरिक रटने की पद्धति खत्म; तीसरी से आठवीं तक के बच्चों के लिए नया लर्निंग मॉडल

इंदौर के सरकारी स्कूलों में आईआईटी मद्रास के सहयोग से शिक्षा सुधार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू। तीसरी से आठवीं के छात्रों को आसान तरीके से पढ़ाएंगे शिक्षक।

Jul 14, 2026 - 09:36
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इंदौर के स्कूलों में पारंपरिक रटने की पद्धति खत्म; तीसरी से आठवीं तक के बच्चों के लिए नया लर्निंग मॉडल

इंदौर। जिले के सरकारी स्कूलों में अब केवल बुनियादी सुविधाएं ही नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने और सिखाने का तरीका भी बदलने जा रहा है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा की विशेष पहल पर कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए आईआईटी मद्रास के सहयोग से शिक्षा सुधार का एक अनूठा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता को बढ़ाना, शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना और सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गुणात्मक सुधार लाना है।

📚 शिक्षकों के लिए तैयार होगा आधुनिक शिक्षण मॉडल

जिला प्रशासन द्वारा शुरू की जा रही इस पहल के तहत आईआईटी मद्रास द्वारा शिक्षकों के लिए एक उत्कृष्ट और व्यावहारिक शिक्षण मॉडल तैयार किया जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक रूप से रटने की पद्धति के स्थान पर बच्चों की समझ, सक्रिय भागीदारी और व्यावहारिक सीख पर आधारित नई शिक्षण प्रणाली अपनाई जाएगी। 'सप्लीमेंट्री लर्निंग मॉडल' (Supplementary Learning Model) के माध्यम से विद्यार्थियों को कठिन विषय भी बेहद आसान और रोचक तरीके से समझाए जाएंगे।

👩‍🏫 जल्द शुरू होगा चयनित स्कूल के शिक्षकों का प्रशिक्षण

कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि वर्तमान में इस योजना पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम किया जा रहा है। इसके लिए जल्द ही जिले के चयनित सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस ट्रेनिंग के बाद शिक्षक वैज्ञानिक और गतिविधि आधारित (Activity-based) तरीकों से बच्चों को पढ़ाएंगे, जिससे विद्यार्थियों की विषयों पर पकड़ मजबूत होगी और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

📈 कक्षा संचालन में मिलेगी बड़ी सुविधा

प्रशासन का मानना है कि इस नई शिक्षण प्रणाली के लागू होने से जहां बच्चों के लिए पढ़ाई आसान और मनोरंजक बनेगी, वहीं शिक्षकों को भी कक्षा संचालन में काफी सुविधा मिलेगी। यदि इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक और उत्साहजनक रहे, तो इसे जिले के अन्य सभी सरकारी स्कूलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसे इंदौर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

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