इंदौर में महिला स्टार्टअप्स की धूम! 5 साल में दोगुनी हुई महिला फाउंडर्स की भागीदारी

इंदौर के मजबूत होते स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिला फाउंडर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 20% हो गई है। जानिए इनकी सफलता, सरकारी सपोर्ट और प्रमुख चुनौतियों के बारे में।

Jul 15, 2026 - 10:17
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इंदौर में महिला स्टार्टअप्स की धूम! 5 साल में दोगुनी हुई महिला फाउंडर्स की भागीदारी

इंदौर। इंदौर का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुआ है। शहर में नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस सकारात्मक बदलाव में महिलाओं की भूमिका भी पहले की तुलना में काफी सशक्त हुई है। तकनीक, हेल्थकेयर, शिक्षा, फूड, एग्रीटेक और ई-कॉमर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में महिलाएं आगे आकर अपने स्टार्टअप शुरू कर रही हैं। वर्तमान में शहर की आर्थिकी में योगदान दे रहे कुल स्टार्टअप्स में से करीब 20 प्रतिशत स्टार्टअप की फाउंडर और को-फाउंडर महिलाएं हैं। इसका मुख्य कारण महिलाओं द्वारा अपने इनोवेटिव आइडिया को सफल कमर्शियल प्रोडक्ट में बदल पाना है। पहले जहां बेहतरीन आइडिया सिर्फ कॉलेज लैब और प्रोजेक्ट फाइलों तक सीमित रह जाते थे, वहीं अब महिलाएं अपनी स्किल्स को निखारकर इन्हें सफल बिजनेस मॉडल में परिवर्तित कर रही हैं। खास बात यह है कि महिलाएं अब केवल पारंपरिक बिजनेस ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थटेक, फिनटेक, सस्टेनेबिलिटी और कोर मैन्युफैक्चरिंग जैसे जटिल क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप्स का भी नेतृत्व कर रही हैं।

📈 5 वर्षों में शानदार ग्रोथ: कोरोना काल में 10% था आंकड़ा, अब 1,300 से अधिक स्टार्टअप्स में महिलाएं बनीं रीढ़

स्टार्टअप विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, इनक्यूबेशन सेंटरों, मेंटरशिप प्रोग्राम और महिला केंद्रित निवेशकों (Investors) की बढ़ती रुचि का सीधा लाभ महिला उद्यमियों को मिला है। इसी वजह से हर साल महिला संस्थापकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां अधिकांश शिक्षित महिलाएं सुरक्षित नौकरी को प्राथमिकता देती थीं, वहीं अब वे बड़ी संख्या में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में साहसिक कदम आगे बढ़ा रही हैं। वर्तमान में इंदौर में 1,300 से अधिक सक्रिय स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जिनमें से करीब 20 प्रतिशत स्टार्टअप्स में महिलाएं सीधे तौर पर फाउंडर या को-फाउंडर के रूप में जुड़ी हुई हैं। गौरतलब है कि कोरोना काल के दौरान यह आंकड़ा महज 10 प्रतिशत के आसपास ही सिमटा हुआ था, जो बीते पांच वर्षों में दोगुना हो चुका है।

🎓 इनक्यूबेशन और मेंटरशिप का सपोर्ट: कॉलेज स्तर पर छात्राओं में बढ़ी उद्यमिता के प्रति रुचि, रिसर्च बन रहे व्यवसाय

आईटी एक्सपर्ट सोनाली अग्रवाल के अनुसार, कॉलेज स्तर पर ही स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा मिलने से छात्राओं में उद्यमिता (Entrepreneurship) के प्रति रुचि काफी बढ़ी है। विभिन्न हैकाथॉन, स्टार्टअप प्रतियोगिताएं, बिजनेस प्लान कॉम्पिटिशन और मेंटरशिप कार्यक्रमों में लड़कियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही आईआईटी इंदौर (IIT Indore), दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन, डीएवीवी इनक्यूबेशन सेंटर (DAVV) और एसजीएसआईटीएस (SGSITS) इनक्यूबेशन फोरम सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थान रिसर्च-आधारित स्टार्टअप को उन्नत तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप और सीधे उद्योगों से जोड़ने में मदद कर रहे हैं। इससे महिलाओं को अपने आइडिया को लैब से निकालकर सीधे बाजार तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। आईटी एक्सपर्ट वैशाली सोनी का भी मानना है कि मेडिकल, इंजीनियरिंग और साइंस से जुड़े कई नए आइडिया अब बेहतरीन स्टार्टअप के रूप में विकसित हो रहे हैं और सरकारी सब्सिडी व प्रोत्साहन योजनाओं ने इसमें उत्प्रेरक का काम किया है।

⚠️ चुनौतियां और नए सेक्टर्स: फंडिंग की कमी अब भी बड़ी अड़चन, फिर भी इन क्षेत्रों में दिखा रही हैं दम

बिजनेस विशेषज्ञ दिव्या माथुर के अनुसार, भले ही स्टार्टअप के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। महिला संस्थापकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शुरुआती स्तर पर (Seed Funding) फंडिंग प्राप्त करने की आती है। कई बार मजबूत बिजनेस मॉडल होने के बावजूद बेहतर प्रस्तुति (Pitching) की कमी या बाजार के पूर्वाग्रहों के कारण महिलाओं को समय पर वित्तीय मदद नहीं मिल पाती है। इसके बावजूद महिलाएं दृढ़ संकल्प के साथ निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य कर रही हैं:

  • हेल्थ टेक और मेडिकल इनोवेशन

  • एजुकेशन टेक्नोलॉजी (EdTech)

  • फूड प्रोसेसिंग और क्लाउड किचन

  • ई-कॉमर्स और रिटेल ब्रांड्स

  • एग्रीटेक (कृषि तकनीक)

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित समाधान

  • पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट

💡 इनोवेशन की अनूठी मिसाल: पराली से मशरूम की खेती और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बनाया 'एग्जोस्केलेटन आर्म'

इंदौर के स्टार्टअप इकोसिस्टम से कई बेहतरीन और व्यावहारिक उदाहरण सामने आ रहे हैं। इनमें डॉ. पेजा दुबे (पूजा) लैब में मशरूम के उन्नत बीज तैयार कर रही हैं। इन बीजों और खेतों में बचने वाली पराली का वैज्ञानिक उपयोग कर किसान बड़े पैमाने पर मशरूम की लाभदायक खेती कर सकते हैं। उन्होंने इसके लिए कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को बाकायदा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी है। इस अभिनव प्रयास से जहां पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण में भारी कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं किसानों के लिए भी अतिरिक्त आय के नए रास्ते सृजित हुए हैं।

इसी प्रकार, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) की छात्राओं ने प्रो. शिवांगी बांडे के कुशल नेतृत्व में एक बेहद आधुनिक 'एग्जोस्केलेटन आर्म' (Exoskeleton Arm) तैयार किया है। इस रोबोटिक प्रोजेक्ट में पुरवांशि गर्ग सहित अन्य होनहार छात्राएं शामिल हैं। इस आधुनिक डिवाइस का उपयोग किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा के दौरान राहत और बचाव (Rescue Operations) कार्यों के लिए किया जा सकता है, क्योंकि यह मलबे में दबे भारी से भारी वजन को इंसानी हाथों की मदद से आसानी से उठाने में पूरी तरह सक्षम है।

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