यमन में हूतियों ने AI से क्लोन की सैन्य कमांडर की आवाज, मोचा शहर के युद्ध में फैलाया फर्जी ऑडियो
यमन में हूती लड़ाकों पर AI से सैन्य कमांडर तारिक सालेह की आवाज क्लोन करने का आरोप लगा है। रणनीति के तहत मोचा शहर में सैनिकों को पीछे हटने का फर्जी ऑडियो संदेश भेजा गया।
यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर एक वरिष्ठ यमनी सैन्य कमांडर की आवाज की नकल करने का गंभीर आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूतियों ने लेफ्टिनेंट जनरल तारिक सालेह की आवाज से मिलता-जुलता एक फर्जी ऑडियो तैयार किया।
इस ऑडियो के जरिए मोचा (Mocha) शहर में तैनात सैनिकों को तुरंत अपनी चौकियों से पीछे हटने का निर्देश दिया गया था। यह ऑडियो संदेश ठीक उस वक्त फैलाया गया, जब हूती लड़ाके रणनीतिक शहर मोचा पर कब्जे के लिए चौतरफा हमला कर रहे थे। जनरल सालेह की 'नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज' ने आरोप लगाया कि AI वॉइस क्लोनिंग के जरिए सैनिकों में भ्रम पैदा करने और उनका मनोबल तोड़ने की साजिश रची गई।
📢 'कभी आगे बढ़ना पड़ता है तो कभी पीछे': जानिए फर्जी ऑडियो में सैनिकों से क्या कहा गया
सामने आए ऑडियो संदेश में जनरल सालेह जैसी आवाज में सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि "युद्ध की रणनीति में कभी आगे बढ़ना पड़ता है तो कभी पीछे हटना पड़ता है।" संदेश में यह भी दावा किया गया कि मोचा में बैकअप के लिए रिजर्व सैनिक और अतिरिक्त हथियार मौजूद हैं, इसलिए फिलहाल पीछे हटना ही बेहतर है।
जोखिम सलाहकार कंपनी 'बाशा रिपोर्ट' ने इस ऑडियो की पुष्टि की है। इसके अलावा, मोचा के प्रमुख सैटेलाइट टीवी चैनल 'अल-जुम्हूरिया टीवी' ने भी इस ऑडियो की जांच के बाद इसे एआई (AI) निर्मित पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक संदेश करार दिया।
🏳️ हथियार डालने पर माफी का लालच, बाब-अल-मंदेब के पास पेरिम द्वीप पर हूतियों का कब्जा
सालेह की मीडिया टीम ने इस घटना के बाद बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कमांडर के आधिकारिक बयान केवल अधिकृत 'नेशनल रेजिस्टेंस' सैन्य चैनलों के जरिए ही जारी किए जाएंगे। आम जनता व सैनिकों से अप्रमाणित ऑडियो और व्हाट्सएप संदेशों पर बिल्कुल भरोसा न करने की अपील की गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हूतियों ने सैनिकों के व्यक्तिगत नंबरों पर ऐसे संदेश भी भेजे, जिनमें हथियार डालने पर उन्हें पूर्ण माफी देने का वादा किया गया था। हूतियों ने रणनीतिक लाल सागर के तटीय शहर मोचा और समुद्र के बीच स्थित पेरिम द्वीप (मायून) पर कब्जा कर लिया है, जिससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर उनकी पकड़ काफी मजबूत हो गई है।
🤖 यमन में AI के सैन्य इस्तेमाल पर Anthropic का बड़ा खुलासा, मिसाइल सॉफ्टवेयर के लिए किया जा रहा था प्रयोग
यमन युद्ध में AI के इस्तेमाल की यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में एआई कंपनी 'एंथ्रोपिक' (Anthropic) की एक शोध रिपोर्ट में यमन में एआई के संभावित सैन्य इस्तेमाल का खुलासा किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी यमन में सक्रिय एक हथियार विकास समूह ने एंथ्रोपिक के एआई मॉडल 'क्लॉड' (Claude Code) का इस्तेमाल मिसाइल और रॉकेट कार्यक्रमों से जुड़े नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए करने का प्रयास किया था। एंथ्रोपिक ने तुरंत संज्ञान लेते हुए इन सभी संदिग्ध अकाउंट्स को ब्लॉक कर दिया और इससे जुड़ी जानकारी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा की।
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