डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में नर्सिंग स्टाफ ने कराई डिलीवरी, प्रसूता की मौत; शिवपुरी में अस्पताल पर फूटा गुस्सा
शिवपुरी के खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान 25 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर की अनुपस्थिति और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया।
शिवपुरी। जिले के खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर मंगलवार सुबह प्रसव के दौरान एक 25 वर्षीय प्रसूता की मौत का एक बेहद दुखद और गंभीर मामला सामने आया है। मृत महिला की पहचान ग्राम आसपुर निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रीति परिहार (पत्नी वीरेंद्र परिहार) के रूप में हुई है। प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ। परिजनों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि प्रसव के समय अस्पताल में कोई जिम्मेदार डॉक्टर उपस्थित नहीं था और अनुभवहीन नर्सिंग स्टाफ द्वारा जबरन प्रसव कराने के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, वहां पदस्थ मुख्य महिला चिकित्सक ने परिजनों द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
📉 लापरवाही की कहानी: आधी रात को भर्ती हुई थी प्रसूता, डिलीवरी के बाद अचानक बिगड़ी हालत
पीड़ित पति वीरेंद्र परिहार ने आपबीती बताते हुए कहा कि वह सोमवार-मंगलवार की मध्य रात्रि करीब 2:00 बजे अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर लेकर खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। उस समय अस्पताल में ड्यूटी पर केवल नर्सिंग स्टाफ राधा मौजूद थीं। उन्होंने प्रसूता को भर्ती कर लिया और परिजनों को ढांढस बंधाया कि स्थिति बिल्कुल सामान्य है और नॉर्मल डिलीवरी (सामान्य प्रसव) हो जाएगी। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 7:00 बजे प्रीति ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि प्रसव के कुछ ही देर बाद प्रीति की हालत अचानक बिगड़ने लगी और इस दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग व खिंचाव के कारण उसकी बच्चेदानी (Uterus) बाहर निकल आई। अत्यंत गंभीर हालत को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ ने उसे तुरंत जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण प्रीति ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और बच्चेदानी बाहर आ जाने की पुष्टि की। राहत की बात यह है कि नवजात बच्ची पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।
👩⚕️ डॉक्टर की सफाई: 'ऑन कॉल' थीं तैनात, मरीज द्वारा केन्युला और कैथेटर निकालने से बिगड़ी स्थिति
इस पूरे गंभीर विवाद पर खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. तान्या बाथम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रसूता प्रीति का प्लेसेंटा (गर्भनाल) प्रसव के बाद प्राकृतिक रूप से बाहर नहीं आ पा रहा था। इसलिए उसे किसी भी बड़े खतरे से बचाने के लिए केवल प्लेसेंटा रिमूवल हेतु जिला अस्पताल रेफर किया गया था। डॉ. बाथम ने दावा किया कि जब मरीज को एम्बुलेंस से रवाना किया गया, तब उसकी हालत पूरी तरह से स्टेबल (स्थिर) थी। उन्होंने आगे बताया कि उनकी मौके पर मौजूद आशा कार्यकर्ता सुशीला से बात हुई है। आशा कार्यकर्ता के अनुसार, जिला अस्पताल ले जाते समय प्रीति ने घबराहट में खुद अपने हाथों से मेडिकल केन्युला और यूरिन कैथेटर (पेशाब की नली) को जबरन बाहर खींचकर निकाल दिया था। कैथेटर के इस तरह अचानक बाहर निकलने से आंतरिक खिंचाव के कारण बच्चेदानी बाहर आ सकती है। प्रसव के समय अस्पताल से नदारद रहने के सवाल पर डॉ. बाथम ने स्पष्ट किया कि वे नर्सिंग स्टाफ के साथ लगातार 'ऑन कॉल' संपर्क में बनी हुई थीं और उन्होंने फोन के माध्यम से स्टाफ को इलाज संबंधी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश समय-समय पर दिए थे। फिलहाल प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है।
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