जबलपुर में डेंगू के 24 मरीज; नगर निगम और कलेक्ट्रेट के फव्वारों में ही मिल गया मच्छर का लार्वा!
जबलपुर में डेंगू के 24 मामले आने के बाद प्रशासन मुस्तैद। नगर निगम, जिला अस्पताल और कलेक्ट्रेट के फव्वारों में ही मच्छर का लार्वा मिलने से खड़े हुए गंभीर सवाल।
जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में मानसून की दस्तक के साथ ही डेंगू का डंक डराने लगा है। शहर में अब तक डेंगू के 24 सक्रिय मरीज सामने आ चुके हैं। चिंता की बात यह है कि आम जनता को जागरूक करने वाले सरकारी विभागों के अपने ही परिसरों में डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का लार्वा धड़ल्ले से पनप रहा है। जमीनी जायजा लेने पर नगर निगम मुख्यालय, जिला चिकित्सालय और कलेक्ट्रेट परिसर में लगे फव्वारों के ठहरे हुए पानी में भारी मात्रा में मच्छरों का लार्वा तैरता हुआ नजर आया है। यह स्थिति तब है जब जिला प्रशासन का दावा है कि पिछले वर्ष केवल मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव पर लगभग ₹95 लाख की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी। भौगोलिक दृष्टि से जबलपुर की बनावट कुछ ऐसी है कि वर्षाकाल में यहां से पानी की निकासी तेजी से नहीं हो पाती। शहर के भीतर ही 50 से अधिक छोटे-बड़े तालाब मौजूद हैं, इसके अतिरिक्त कई निचले इलाकों में प्राकृतिक रूप से जलजमाव हो जाता है। नालियों में साल भर पानी ठहरे रहने के कारण मच्छरों का प्रकोप बना रहता है, जो बारिश के मौसम में एक जानलेवा महामारी का रूप ले लेता है।
🩺 स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर: संयुक्त संचालक डॉ. नवीन कोठारी ने दी जानकारी, छिड़काव के लिए बनी विशेष टीम
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. नवीन कोठारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, "वर्तमान में जबलपुर जिले के भीतर डेंगू के 24 मरीज चिन्हित किए गए हैं। हालांकि, वर्तमान में यह संख्या नियंत्रण में है और इसे अति चिंताजनक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। लेकिन, चूंकि बरसात का मौसम डेंगू (Aedes) और मलेरिया (Anopheles) के मच्छरों के तेजी से पनपने के लिए सबसे अनुकूल समय होता है, इसलिए हमने सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।" उन्होंने आगे बताया कि विभाग द्वारा एक संयुक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) का गठन किया गया है, जिसमें नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारी शामिल हैं। इस व्यवस्था के तहत जिला मलेरिया अधिकारी उन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग करते हैं जहां से मरीज सामने आ रहे हैं। इसके तत्काल बाद नगर निगम की टीम चिन्हित प्रभावित क्षेत्रों में जाकर सघन फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव सुनिश्चित करती है।
💸 लापरवाही पर लगेगा भारी जुर्माना: घर या संस्थान में मच्छर मिलने पर ₹5,000 से ₹50,000 तक की दंडात्मक कार्रवाई
इस वर्ष डेंगू और मलेरिया के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मच्छरों को पनपने से रोकने के उद्देश्य से इस बार केवल जागरूकता अभियान ही नहीं चलाया जाएगा, बल्कि लापरवाह लोगों पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके तहत नगर निगम के स्वास्थ्य निरीक्षकों की विशेष टीमें शहर भर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, निजी परिसरों, निर्माणाधीन भवनों और रिहायशी कॉलोनियों में औचक छापामार निरीक्षण कार्रवाई करेंगी। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी निजी या व्यावसायिक स्थान पर जमा पानी में मच्छरों का लार्वा अथवा पनपते हुए मच्छर पाए जाते हैं, तो संबंधित भवन स्वामी या संस्थान के प्रबंधक के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने न्यूनतम ₹5,000 से लेकर अधिकतम ₹50,000 तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान तय किया है।
⛲ 'दिया तले अंधेरा': जिला अस्पताल, नगर निगम और कलेक्ट्रेट के फव्वारों में ही रेंगते मिले डेंगू के कीड़े, जागरूक रहने की अपील
प्रशासन के दावों के बीच जमीनी स्तर पर "दिया तले अंधेरा" वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। नगर निगम मुख्यालय में जहां जनता की समस्याओं को सुनने के लिए महापौर बैठते हैं, उसके ठीक सामने बने दो सुंदर फव्वारों में कीचड़ और मच्छरों का लार्वा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला हाल जबलपुर जिला अस्पताल के मलेरिया विभाग कार्यालय के ठीक बगल का है, जहां भरे हुए पानी में अनगिनत लार्वा तैर रहे हैं। इसके अलावा, जिला कलेक्ट्रेट में कलेक्टर्स चैंबर के ठीक सामने बने ऐतिहासिक पुराने फव्वारे के ठहरे पानी में भी मच्छरों का साम्राज्य स्थापित हो चुका है।
इस घोर लापरवाही पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. नवीन कोठारी ने आमजन से अपील की है कि "स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुलाई के महीने को विशेष 'मलेरिया और डेंगू जागरूकता सप्ताह' के रूप में मनाया जा रहा है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर हमेशा साफ और ठहरे हुए पानी में ही अंडे देता है। इसलिए नागरिक अपने घरों के कूलर, गमलों, छतों पर रखे टायर या किसी भी पुराने बर्तन में 3 दिनों से अधिक समय तक पानी जमा न रहने दें। मलेरिया और डेंगू में यदि शुरुआती स्तर पर इलाज में थोड़ी भी लापरवाही बरती जाती है, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। बुखार आने पर तुरंत शासकीय अस्पताल में निःशुल्क जांच और उपचार कराएं।"
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