मदन महल स्टेशन पर हादसे के बाद भी सुधरे नहीं यात्री; रेलिंग फांदकर जान जोखिम में डाल रहे लोग
मदन महल स्टेशन पर हालिया हादसे के बाद लगाई गई रेलिंग को भी फांदकर यात्री जान जोखिम में डाल रहे हैं। जानें क्यों फुटओवर ब्रिज से कतरा रहे हैं लोग और क्या है समस्या।
जबलपुर। मदन महल रेलवे स्टेशन पर हाल ही में भोपाल से आने वाली रानी कमलापति जनशताब्दी एक्सप्रेस से उतरकर पैदल पटरी पार कर रहे छह यात्री मालगाड़ी के इंजन की चपेट में आ गए थे. इस दर्दनाक हादसे में एक महिला और बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई थी. इस भीषण हादसे के बावजूद लोग अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर धड़ल्ले से रेल पटरी पार कर रहे हैं और पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं सीख रहे हैं.
🚧 2. हादसे के बाद रेलवे ने लगाई थी लोहे की रेलिंग: अब यात्री उसे भी फांदकर ले रहे हैं खतरनाक शॉर्टकट
हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने से रोकने के लिए दोनों प्लेटफार्मों के बीच मजबूत लोहे की रेलिंग लगाई थी. लेकिन यात्रियों की लापरवाही का आलम यह है कि वे अब इस रेलिंग को भी आसानी से फांदकर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. रेलवे, आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) द्वारा लगातार की जा रही चालानी कार्रवाई के बावजूद नियमों की यह अनदेखी रुकने का नाम नहीं ले रही है, जिससे भविष्य में किसी और बड़ी अनहोनी का खतरा लगातार बना हुआ है.
🚉 3. मदन महल स्टेशन के पुनर्विकास के बाद बढ़ा यात्रियों का दबाव: इन प्रमुख ट्रेनों के समय रहती है भारी भीड़
मदन महल स्टेशन के पुनर्विकास (Redevelopment) के बाद यहाँ रुकने वाली ट्रेनों और यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है.
इन ट्रेनों के समय रहती है भारी भीड़: रायपुर इंटरसिटी, रानी कमलापति इंटरसिटी, जनशताब्दी, श्रीधाम, अमरकंटक, नर्मदा, सोमनाथ और ओवरनाइट एक्सप्रेस सहित विभिन्न मेमू (MEMU) और पैसेंजर ट्रेनों के आगमन के समय स्टेशन पर अत्यधिक भीड़ रहती है. इस व्यस्त समय में यात्री एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जल्दी पहुंचने के लिए निर्धारित और सुरक्षित मार्ग को छोड़कर सीधे ट्रैक पार करने का जोखिम उठा लेते हैं.
🚶♂️ 4. फुटओवर ब्रिज की दूरी और खड़ी चढ़ाई बनी बड़ी वजह: बुनियादी सुविधाओं के अभाव से बढ़ रही लापरवाही
स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज (FOB) और रैंप जैसे सुविधाजनक विकल्पों की कमी भी यात्रियों की इस लापरवाही की एक बड़ी वजह मानी जा रही है. यदि कोई ट्रेन मुख्य स्टेशन एंड (सिरे) की ओर रुकती है, तो यात्रियों को फुटओवर ब्रिज तक पहुंचने के लिए पहले प्लेटफार्म पर बहुत लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है. इसके बाद ब्रिज की खड़ी सीढ़ियां चढ़ना और फिर दूसरे प्लेटफार्म पर उतरकर दोबारा उतनी ही दूर पैदल चलना बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों के लिए बेहद थकाऊ हो जाता है. यही कारण है कि कई यात्री समय बचाने के चक्कर में रेलिंग लांघना ज्यादा आसान समझते हैं.
⏳ 5. लिफ्ट और एस्केलेटर पर अत्यधिक दबाव: जल्दबाजी में शॉर्टकट अपनाने को मजबूर हो रहे यात्री
मदन महल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1, 2-3 और 4 पर लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन व्यस्त समय (Peak Hours) में इन पर अत्यधिक दबाव रहता है.
-
लिफ्ट में लंबा इंतजार: यात्रियों को लिफ्ट के उपयोग के लिए काफी देर तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है.
-
ट्रेन छूटने की हड़बड़ी: कनेक्टिंग ट्रेन छूटने का डर और स्टेशन से जल्द बाहर निकलने की जल्दबाजी यात्रियों को शॉर्टकट अपनाने के लिए उकसाती है.
-
जोखिम भरा सफर: महिला, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोग भी इस हड़बड़ी में कई बार इसी बेहद जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं.
📢 6. आरपीएफ और जीआरपी का विशेष चेकिंग अभियान: यात्रियों से सुरक्षित मार्ग का उपयोग करने की अपील
रेलवे प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर पटरियों को पैदल पार करने वाले लापरवाह लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं. नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों को पकड़कर उन पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है. इसके साथ ही, स्टेशन परिसर में लगातार उद्घोषणाओं (Announcements) के माध्यम से यात्रियों को सतर्क किया जा रहा है और उनसे केवल फुटओवर ब्रिज या अधिकृत रास्तों का ही उपयोग करने की अपील की जा रही है. इसके बावजूद मौका मिलते ही लोग नियमों को ताक पर रखकर रेलिंग फांदने से बाज नहीं आ रहे हैं.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)