बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के मैनेजर ने कर्मचारियों की लॉगिन आईडी चुराकर किया ₹6 लाख का गबन, FIR दर्ज
जबलपुर में EOW ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के शाखा प्रबंधक प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ ₹6 लाख से अधिक के गबन, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है।
जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र की बेनीखेड़ा शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक प्रीतम कुमार बेहरा के खिलाफ छह लाख रुपये से अधिक के गंभीर गबन, धोखाधड़ी और अपने पद के दुरुपयोग का आपराधिक मामला दर्ज किया है. ईओडब्ल्यू (EOW) के एसपी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) पंजीबद्ध कर ली गई है.
💻 2. अधीनस्थ कर्मचारियों की लॉगिन आईडी का किया दुरुपयोग: शुरुआती जांच में हुआ बड़ा खुलासा
मामले की प्रारंभिक जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि शाखा प्रबंधक प्रीतम कुमार बेहरा ने अपने पद का घोर दुरुपयोग किया था. उसने बैंक के ही अपने अधीनस्थ (जूनियर) कर्मचारियों की सीक्रेट लॉगिन आईडी (Login ID) और पासवर्ड का अनाधिकृत रूप से उपयोग किया, ताकि वह वित्तीय हेराफेरी को अंजाम दे सके और पकड़े जाने पर शक दूसरों पर जाए.
💸 3. स्वयं सहायता समूहों के पैसों पर डाका: पत्नी के खाते में अनधिकृत रूप से ट्रांसफर की राशि
जांच के अनुसार, आरोपी मैनेजर ने चालाकी से नौ स्वयं सहायता समूहों (SHG) के बैंक खातों में सेंध लगाई. उसने इन समूहों के खातों से कुल 4 लाख 21 हजार 108 रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध और अनधिकृत रूप से अपनी पत्नी मोनालिसा बेहरा के व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी.
📱 4. आउटसोर्स कर्मचारी के नाम पर की धोखाधड़ी: मोबाइल बैंकिंग से खुद निकाले पैसे
आरोपी प्रबंधक की धोखाधड़ी यहीं नहीं रुकी. उसने बैंक में काम करने वाले एक आउटसोर्स कर्मचारी मनोज कुमार चक्रवर्ती को झांसा देकर उसके नाम पर धोखाधड़ी से एक बैंक खाता खुलवाया. इसके बाद मैनेजर ने उस खाते के एटीएम (ATM) कार्ड और मोबाइल बैंकिंग का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया और धोखे से 1 लाख 43 हजार 480 रुपये स्वयं निकाल कर गबन कर लिए.
⚖️ 5. लोक अदालत की रिकवरी राशि भी हड़पी: मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है आरोपी मैनेजर
विभागीय छानबीन में यह भी पता चला है कि नेशनल लोक अदालत के दौरान चार एनपीए (NPA) खातों की वसूली के रूप में रिकवरी एजेंट की ओर से 38 हजार रुपये की नकद राशि बैंक में जमा कराने के लिए दी गई थी. यह राशि भी आरोपी मैनेजर ने मुख्य खाते में जमा नहीं कराई और उसे अपने पास रख लिया. इस प्रकार कुल 6 लाख 2 हजार 558 रुपये के गबन का मामला पूरी तरह प्रमाणित हुआ है. आरोपी मैनेजर प्रीतम कुमार बेहरा मूल रूप से ओडिशा के पुरी स्थित सुदर्शन नगर का निवासी है और वर्तमान में जबलपुर के गढ़ा क्षेत्र में रह रहा है.
🔍 6. विभागीय शिकायत के बाद हुई विस्तृत जांच: वित्तीय अनियमितताओं की हुई पुष्टि
बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र के अंचल कार्यालय (जोनल ऑफिस) की आंतरिक विभागीय जांच में जब यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई, तो बैंक प्रबंधन की ओर से मामले की लिखित शिकायत ईओडब्ल्यू से की गई. भोपाल मुख्यालय के निर्देश पर ईओडब्ल्यू निरीक्षक भूमेश्वरी चौहान ने इस पूरे मामले की विस्तृत व गहन जांच की. जांच के दौरान बैंक कर्मचारियों, स्वतंत्र गवाहों के बयानों और तकनीकी दस्तावेजों की पड़ताल में ग्राहकों की अनुमति के बिना किए गए फर्जी लेनदेन की पुष्टि हुई है. इस धोखाधड़ी से संबंधित कई मुख्य वाउचर भी बैंक रिकॉर्ड से गायब मिले हैं. आरोपी पर मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
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