मध्य प्रदेश में सरकारी खर्चों पर लगाम; अब सिर्फ इकोनॉमी क्लास में सफर कर सकेंगे बड़े अधिकारी
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने सरकारी खर्चों पर सख्त लगाम लगाते हुए अफसरों के विदेश दौरों और होटलों में बैठकों पर दो साल के लिए पूर्ण रोक लगा दी है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी स्तर पर होने वाले अनावश्यक खर्चों पर पूरी तरह लगाम लगा दी है. प्रदेश में अगले दो सालों तक किसी भी फाइव स्टार होटल या व्यावसायिक केंद्रों में सरकारी कार्यशाला, आधिकारिक बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे. वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए इन कड़े निर्देशों को लेकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि सरकार अब वित्तीय अनुशासन को लेकर पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है.
✈️ 2. अफसरों की हवाई यात्रा और विदेश दौरों पर पाबंदी: अब सिर्फ इकोनॉमी क्लास में ही करना होगा सफर
वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों के विभागाध्यक्षों, सभी संभागों के आयुक्तों और सभी निगम-मंडलों के प्रबंध संचालकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं.
हवाई यात्रा के नए नियम:
नए आदेश के तहत प्रदेश के आईएएस (IAS) और अन्य वरिष्ठ अफसरों के विदेश दौरों पर अस्थाई रूप से रोक लगा दी गई है. अधिकारी अब सिर्फ अत्यंत अनिवार्य या आपातकालीन मामलों में ही सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा कर सकेंगे. इसके अलावा, किसी आवश्यक सरकारी कार्य से घरेलू या अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान भी अफसरों को केवल 'इकोनॉमी क्लास' में ही हवाई सफर करना होगा, बिजनेस क्लास की पात्रता खत्म कर दी गई है.
गौरतलब है कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को मुख्यमंत्री और मंत्रियों की हवाई यात्राओं पर होने वाले दैनिक खर्चों को लेकर विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद इस फैसले को डैमेज कंट्रोल और वित्तीय सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है.
💻 3. वर्चुअल मोड में करने होंगे सभी सरकारी कार्यक्रम: वेबिनार और सरकारी भवनों के उपयोग पर जोर
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि होटलों और निजी व्यावसायिक संस्थाओं में होने वाले कार्यक्रमों के भारी-भरकम खर्चों को हर हाल में बचाना होगा. अब यदि कोई कार्यशाला या प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुत आवश्यक है, तो उसे केवल सरकारी संस्थानों, प्रेक्षागृहों या परिसरों में ही आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही, विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भौतिक कार्यक्रमों के स्थान पर ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल प्रशिक्षण (Virtual Training) और वेबिनार (Webinar) तकनीक का उपयोग करें ताकि यात्रा और भोजन पर होने वाला फिजूल खर्च शून्य किया जा सके.
🚗 4. किराए के वाहनों की संख्या की जाएगी आधी: केबिन के इंटीरियर और साज-सज्जा पर भी लगी रोक
प्रशासनिक स्तर पर वाहनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी वित्त विभाग ने सख्त नियम बनाए हैं:
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गाड़ियों की पूल व्यवस्था: सभी विभागों में लगी किराए की गाड़ियों (Rental Vehicles) की संख्या को तत्काल कम करने का आदेश दिया गया है. अफसरों को व्यक्तिगत गाड़ियां देने के बजाय अब 'वाहन पूल व्यवस्था' (Vehicle Pooling) लागू की जाएगी.
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एक अधिकारी, एक वाहन: दो या दो से अधिक अधिकारियों के बीच एक से ज्यादा वाहन आवंटित नहीं किए जाएंगे. यदि किसी अधिकारी को किसी दूसरे विभाग का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, तो भी वह दूसरे विभाग की गाड़ी का उपयोग नहीं कर सकेगा. उसे केवल उसके मूल विभाग की पात्रता के अनुसार ही एक गाड़ी मिलेगी.
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ऑफिस री-डिजाइनिंग पर बैन: इसके अलावा, अफसरों या मंत्रियों के दफ्तरों और केबिनों के इंटीरियर डेकोरेशन, नई साज-सज्जा या नए फर्नीचर की खरीद पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है.
🏦 5. निगम-मंडल और सरकारी उपक्रम खजाना करें मजबूत: नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंधों पर पूर्ण रोक
सरकार ने राजस्व बढ़ाने और वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने के लिए सभी निगम-मंडलों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और सरकारी उपक्रमों को आदेश दिया है कि वे अपने शुद्ध लाभांश (Dividend) की अधिकतम संभव राशि तत्काल राज्य शासन के मुख्य खातों में जमा कराएं.
| सरकारी व्यय कटौती बिंदु | नए कड़े नियम और प्रतिबंध |
| आधिकारिक बैठकें / कार्यशालाएं | अगले 2 साल तक होटलों में पूरी तरह प्रतिबंधित; सरकारी भवन या वेबिनार अनिवार्य. |
| हवाई सफर (Air Travel) | विदेश दौरों पर रोक, आवश्यक यात्राओं में केवल इकोनॉमी क्लास मान्य. |
| वाहन आवंटन (Vehicles) | किराए की गाड़ियां होंगी कम; अतिरिक्त प्रभार वाले अफसरों को दूसरी गाड़ी नहीं मिलेगी. |
| कंसल्टेंसी सेवाएं (Consultancy) | नए अनुबंधों और महंगे सलाहकारों की नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक. |
इसके साथ ही, विभागों द्वारा महंगे सलाहकारों को नियुक्त करने वाली नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंधों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. गौरतलब है कि इससे पहले सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने भी सभी विभागों को अपने गैर-जरूरी प्रशासनिक खर्चों में भारी कटौती करने के निर्देश दिए थे.
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