गजब ढा रहा ई-अटेंडेंस सिस्टम! नरसिंहपुर में स्वर्गवासी शिक्षक को मिली वेतन कटौती की चेतावनी
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में शिक्षा विभाग ने बड़ी लापरवाही करते हुए 7 महीने पहले मृत हो चुके एक शिक्षक को ई-अटेंडेंस न लगाने पर कारण बताओ नोटिस और वेतन कटौती की चेतावनी जारी की है।
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में इन दिनों ई-अटेंडेंस (ऑनलाइन उपस्थिति) सिस्टम को लागू करने का भारी दबाव है. हर सरकारी स्कूल के शिक्षकों के बीच आजकल ई-अटेंडेंस ही सबसे बड़ा और गर्मागर्म चर्चा का मुद्दा बना हुआ है. शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पिछले कुछ समय में ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ लगातार कठोर प्रशासनिक कार्रवाइयां की हैं. स्थिति यह है कि जमीनी स्तर पर शिक्षकों की सही मॉनिटरिंग न कर पाने के कारण ब्लॉक व जिला शिक्षा अधिकारियों को भी वरिष्ठ कार्यालयों से कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं. इसी का नतीजा है कि विकासखंड और जिला स्तर के अधिकारी अपनी प्रशासनिक गर्दन बचाने के लिए ई-अटेंडेंस पोर्टल पर अनुपस्थित दिख रहे शिक्षकों को बिना जांचे-परखे लगातार नोटिस जारी कर रहे हैं. लेकिन अधिकारियों की इसी अंधाधुंध फुर्ती में एक ऐसी ब्लंडर मिस्टेक (बड़ी चूक) हो गई, जिसने विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. विभाग ने एक ऐसे शिक्षक के नाम से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, जिनका 7 माह पहले ही दुखद निधन हो चुका है.
यह पूरा अजीबोगरीब मामला नरसिंहपुर जिले के करेली जनपद अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरिया की रितुआ टोला प्राथमिक शाला का है. यहाँ पदस्थ रहे प्राथमिक शिक्षक जोगेंद्र किशोर दिलवाइड़ का 28 दिसंबर 2025 को बीमारी के कारण आकस्मिक निधन हो चुका है. उनके निधन के बाद स्कूल और संकुल स्तर पर इसकी सूचना भी दी गई थी.
नोटिस की मुख्य बातें और परिजनों का आक्रोश:
इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय से स्वर्गीय जोगेंद्र किशोर दिलवाइड़ के नाम पर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने के संबंध में एक कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया. इस शासकीय नोटिस में स्पष्ट लिखा गया है कि समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराने के कारण क्यों न आपकी वेतन कटौती की जाए और अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई की जाए. साथ ही मृत शिक्षक को तत्काल जिला कार्यालय में उपस्थित होकर अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी दे दिए गए.
जब विभाग का यह आधिकारिक नोटिस मृत शिक्षक के घर पहुंचा, तो उनके परिजन विभागीय असंवेदनशीलता और लापरवाही को देखकर पूरी तरह से हक्का-बक्का रह गए. दुखी परिजनों ने शिक्षा विभाग की इस लचर कार्यशैली पर गंभीर विधिक और नैतिक सवाल खड़े किए हैं. परिजनों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को इतना गंभीर नोटिस जारी करने से पहले संबंधित स्थापना शाखा को शिक्षक की सेवा संबंधी वर्तमान स्थिति और जीवित होने के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन (Verification) क्यों नहीं करना चाहिए? क्या विभाग के पास अपने ही दिवंगत कर्मचारियों का कोई डेटाबेस सुरक्षित नहीं है?
इस पूरे संवेदनशील मामले के तूल पकड़ने के बाद करेली के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) अरविंद वर्मा ने सफाई देते हुए मीडिया से कहा:
| विभाग का एक्शन पॉइंट | जमीनी हकीकत और विसंगति |
| प्रशासनिक लक्ष्य | ई-अटेंडेंस पोर्टल के जरिए शिक्षकों की शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति |
| विभागीय चूक | 28 दिसंबर 2025 को मृत शिक्षक जोगेंद्र किशोर को 7 महीने बाद नोटिस |
| नोटिस की सामग्री | तत्काल जवाब न देने पर वेतन काटने और सस्पेंशन की चेतावनी |
| पोर्टल की स्थिति | तीन बार अपग्रेड होने के बाद भी मृत और सेवानिवृत्त शिक्षकों का डेटा एक्टिव |
| शिक्षकों का स्टैंड | तकनीकी विसंगतियों और नेटवर्क की कमी के कारण महीनों से कर रहे हैं विरोध |
यह साफ है कि नरसिंहपुर जिला शिक्षा विभाग के ई-अटेंडेंस सिस्टम की भारी तकनीकी और प्रशासनिक खामियों के कारण ही इस प्रकार की शर्मनाक गड़बड़ी सामने आई है. शिक्षकों का आरोप है कि विभाग द्वारा अब तक कम से कम तीन बार मुख्य अटेंडेंस पोर्टल को अपग्रेड किए जाने का दावा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद इसकी बुनियादी त्रुटियां दूर नहीं हो सकी हैं. नतीजा आज सबके सामने है कि एक मृत व्यक्ति से सरकार जवाब मांग रही है. नरसिंहपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों द्वारा इस ई-अटेंडेंस प्रणाली की व्यावहारिक दिक्कतों (जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क न होना और सर्वर डाउन रहना) को लेकर कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी मैदानी हकीकत समझे बिना केवल कागजी कार्रवाई में जुटे हुए हैं.
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