तराना में नर्मदा पाइपलाइन से इजरायली उपकरण चुराते रंगे हाथों पकड़ाया शातिर, 28 PFCMB वॉल्व बरामद
उज्जैन की नर्मदा पेयजल परियोजना से हाई-टेक इजरायली वॉल्व चुराने वाले आरोपी को ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़कर पुलिस को सौंपा। इसके पास से 28 महंगे स्मार्ट वॉल्व बरामद हुए हैं।
उज्जैन। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी और अति-संवेदनशील नर्मदा पेयजल परियोजना में इस्तेमाल हो रहे इजरायली हाई-टेक उपकरणों की चोरी जल निगम और पुलिस प्रशासन के लिए एक गंभीर सिरदर्द बनी हुई थी. शाजापुर और उज्जैन जिले के तराना व महिदपुर सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार मुख्य पाइपलाइनों से गायब हो रहे डिजिटल वॉल्व की घटनाओं ने आला अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी थीं. जल विशेषज्ञों का मानना था कि अगर चोरी का यह सिलसिला कुछ दिन और जारी रहता, तो क्षेत्र के लगभग 55 गांवों की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती और एक बड़ा जल संकट पैदा हो सकता था. इसी बीच, मुस्तैद परियोजना अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों को आखिरकार वॉल्व गायब करने वाले शातिर चोर को रंगे हाथों पकड़ने में बड़ी सफलता मिल गई है.
🕹️ 2. कंट्रोल रूम से नियंत्रित होते थे स्मार्ट वॉल्व: रितेश दीक्षित ने बताया क्यों बेहद खास हैं ये उपकरण
शुक्रवार शाम करीब 4 बजे आखिरकार परियोजना के तकनीकी कर्मचारियों और सजग ग्रामीणों ने एक आरोपी को इजरायली हाई-टेक उपकरणों की चोरी करते हुए मौके पर ही दबोच लिया. पकड़े जाने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने कानून हाथ में लेते हुए आरोपी की जमकर पिटाई भी कर दी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. बाद में सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस के हवाले आरोपी को कर दिया गया.
नर्मदा परियोजना से जुड़े आईआर (IR) अधिकारी रितेश दीक्षित ने इस तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया:
🌍 3. जल संरक्षण का वैश्विक मॉडल: भारत की कई बड़ी परियोजनाओं में हो रहा है इजरायली तकनीक का इस्तेमाल
विमानन और रक्षा सौदों की तरह ही जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी इजरायल दुनिया के उन शीर्ष देशों में शामिल है, जिसने अपने यहाँ पानी की भारी और प्राकृतिक कमी के बावजूद आधुनिक जल प्रबंधन तकनीक (Smart Water Management) के दम पर खुद को जल संरक्षण का वैश्विक मॉडल बनाया है. इसी वजह से भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन की कई बड़ी जल परियोजनाओं में इजरायली माइक्रो-इरिगेशन और डिजिटल ग्रिड तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है. नर्मदा पेयजल परियोजना में लगाए गए ये स्मार्ट वॉल्व भी उसी अंतरराष्ट्रीय तकनीक का हिस्सा हैं, जिनसे बिना मौके पर पहुंचे केवल एक कंप्यूटर कमांड के जरिए पूरे ग्रिड नेटवर्क का सफल संचालन संभव हो पाता है.
🚓 4. तराना पुलिस की गिरफ्त में देवास का आरोपी दरबार सिंह गुर्जर: कर्मचारी बलराम गुर्जर की सतर्कता से हुई गिरफ्तारी
| कानूनी और तकनीकी जांच बिंदु | बरामदगी एवं आरोपी का विवरण |
| दर्ज थाना और जांच अधिकारी | तराना थाना (उज्जैन), जांच अधिकारी हरिराम |
| मुख्य आरोपी की पहचान | दरबार सिंह गुर्जर पिता चरण सिंह गुर्जर (टोंकखुर्द, जिला देवास) |
| बरामद सामग्री का विवरण | 28 नग इजरायली PFCMB स्मार्ट डिजिटल वॉल्व |
| एक उपकरण की बाजार कीमत | लगभग ₹2,400 प्रति वॉल्व |
| कुल जब्त सामग्री की कीमत | लगभग ₹67,200 |
तराना थाना के जांच अधिकारी हरिराम ने मामले की विस्तृत कानूनी जानकारी देते हुए बताया कि, "क्षेत्र के करंज, नाटाखेड़ी, बघेरा और पलदूना सहित कई प्रमुख गांवों से लगातार इन महंगे सरकारी उपकरणों के चोरी होने की लिखित शिकायतें मिल रही थीं. शुक्रवार को नर्मदा परियोजना के सजग तकनीकी कर्मचारी बलराम गुर्जर और ग्रामीणों ने अदम्य साहस दिखाते हुए आरोपी को कटर मशीन के साथ मौके से ही पकड़ लिया. आरोपी को पकड़ने में बलराम गुर्जर की मुख्य भूमिका रही."
पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक और कड़ी पूछताछ में आरोपी की पहचान देवास जिले के टोंकखुर्द थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दरबार सिंह गुर्जर पिता चरण सिंह गुर्जर के रूप में हुई है. पुलिस ने आरोपी के कब्जे और उसकी निशानदेही से चोरी किए गए कुल 28 इजरायली PFCMB वॉल्व बरामद कर लिए हैं. जब्त किए गए इन हाई-टेक उपकरणों की कुल सरकारी कीमत करीब ₹67,200 आंकी गई है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी इन महंगे तकनीकी पुर्जों को बाजार में किस कबाड़ी या गिरोह को बेचने का काम करता था.
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