बांके बिहारी मंदिर की दानपेटी की चाबी खोई, ताला टूटा तो नगदी से ज्यादा निकलीं श्रद्धालुओं की अटूट आस्था की चिट्ठियां
मुरैना के श्री बांके बिहारी मंदिर की दानपेटी 13 साल बाद प्रशासनिक निगरानी में खोली गई। दानपेटी से ₹30,639 नगद और एक पुराना ₹500 का नोट निकला, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मन्नत की पर्चियों की है।
मुरैना। शहर के सबसे व्यस्ततम और प्रमुख सराफा बाजार में उस समय अचानक स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की भारी भीड़ जुट गई, जब ऐतिहासिक श्री बांके बिहारी मंदिर की दानपेटी को खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई. जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के विशेष निर्देश पर नायब तहसीलदार योगेंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की एक प्रशासनिक टीम करीब 13 साल से बंद पड़ी इस मंदिर की दानपेटी को खोलने पहुंची थी. कड़ी मशक्कत के बाद जब दानपेटी का ताला खुला, तो वहां मौजूद हर किसी की निगाहें पेटी के भीतर टिक गईं. स्थानीय लोगों और मंदिर प्रशासन को उम्मीद थी कि वर्षों से बंद रहने के कारण इसमें चढ़ावे के रूप में लाखों रुपये निकलेंगे. लेकिन जब पूरी गिनती समाप्त हुई, तो दानपेटी से मात्र 30,639 रुपये ही प्राप्त हुए. हालांकि, रुपयों से कहीं ज्यादा चर्चा दानपेटी के भीतर से निकलीं श्रद्धालुओं की मन्नतों से भरी पर्चियों की हो रही है.
इससे पहले वर्ष 2013 में इस दानपेटी को खोला गया था, तब इसमें से कुल 12,600 रुपये की राशि निकली थी. लंबे समय के बाद खुली इस दानपेटी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत के मंदिरों में केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की अगाध आस्था, उम्मीदें और भावनाएं भी सुरक्षित रहती हैं. प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि पूरी पेटी खंगालने के बाद भी इसमें से सोने-चांदी का कोई आभूषण, सिक्का या कीमती रत्न प्राप्त नहीं हुआ है. ऐसा प्रतीत होता है कि श्रद्धालुओं ने कीमती आभूषणों की बजाय नकद राशि दान करने को ही प्राथमिकता दी.
नोटों और सिक्कों का गणित:
दानपेटी के भीतर से करीब ढाई घंटे तक चली लंबी गिनती के बाद नोटों और सिक्कों का विवरण सामने आया. दान में सबसे अधिक 1, 2 और 5 रुपये के चिल्लर सिक्के निकले, जबकि नोटों की श्रेणी में 10 रुपये के नोटों की संख्या सर्वाधिक थी. इसके अलावा कुछ 500 रुपये के नए नोट भी मिले. दिलचस्प बात यह रही कि इसमें एक पुराना 500 रुपये का नोट भी पाया गया, जो सालों पहले हुई नोटबंदी के बाद से देश में पूरी तरह से चलन से बाहर हो चुका है. गिनती के दौरान कुछ नोट जले और कटे-फटे भी मिले, जिन्हें अलग कर दिया गया. अधिकारियों ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया की बकायदा वीडियोग्राफी कराई और राशि को तुरंत सरकारी खजाने में जमा करा दिया.
बांके बिहारी जी के चरणों में समर्पित इस दानपेटी से भगवान के नाम लिखी गईं कई भावुक और मजेदार मन्नतों की पर्चियां (चिट्ठियां) बरामद हुईं. इन पर्चियों को पढ़कर वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारी और गिनती कर रहे कर्मचारी भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके:
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नौकरी की मन्नत: एक बेरोजगार श्रद्धालु भक्त ने अपनी चिट्ठी में लिखा था, "हे प्रभु बांके बिहारी, मेरा सरकारी नौकरी में चयन करा दीजिए. जैसे ही मुझे मेरी जिंदगी की पहली सैलरी (वेतन) मिलेगी, मैं आपके मंदिर में एक बड़ा और सुंदर पीतल का घंटा चढ़ाऊंगी."
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तबादले की अर्जी: वहीं एक अन्य शासकीय कर्मचारी भक्त की प्रार्थना थी, "हे नारायण, मेरा ट्रांसफर (तबादला) मुरैना जिले से सीधे देश की राजधानी दिल्ली करा दीजिए, यदि ऐसा हो गया तो मैं आपकी चौखट पर आकर विशेष छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाऊंगा."
इन पर्चियों ने यह साफ कर दिया कि भगवान के दरबार में लगी इस दानपेटी में केवल रुपया-पैसा नहीं, बल्कि आम इंसान की उम्मीदें, मन्नतें और अटूट श्रद्धा वर्षों से पूरी गोपनीयता के साथ सुरक्षित थीं.
इस प्रशासनिक कार्रवाई के शुरू होने से ठीक पहले मंदिर परिसर में एक बेहद दिलचस्प और सस्पेंस भरा मोड़ आ गया. जब नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम पूरे दलबल के साथ श्री बांके बिहारी मंदिर पहुंची, तो मंदिर प्रबंधन की लापरवाही के कारण दानपेटी की मुख्य चाबी ही गायब मिली. काफी ढूंढने के बाद भी जब चाबी नहीं मिली, तो तुरंत सराफा बाजार के स्थानीय ताला मिस्त्रियों और कारीगरों को मौके पर बुलाया गया. ताला मिस्त्रियों ने अपने औजारों की मदद से करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार दानपेटी के मजबूत ताले को बिना क्षति पहुंचाए खोल दिया. ताला खुलते ही मिस्त्रियों द्वारा एक नई मास्टर चाबी तैयार कर प्रशासनिक टीम को सौंप दी गई, जिसके बाद ही नोटों और मन्नत की पर्चियों की गिनती की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो सकी.
| दानपेटी और मंदिर से जुड़े मुख्य आंकड़े | प्रशासनिक विवरण एवं भविष्य की योजना |
| प्रशासनिक नेतृत्व | नायब तहसीलदार योगेंद्र त्रिपाठी (कलेक्टर के निर्देश पर) |
| कुल प्राप्त नगद राशि | ₹30,639 (सरकारी खजाने में जमा) |
| पिछली बार पेटी कब खुली थी? | वर्ष 2013 में (तब ₹12,600 की प्राप्ति हुई थी) |
| बरामद विशेष सामग्रियां | मन्नत की पर्चियां, 1,2,5 के सिक्के और एक प्रतिबंधित ₹500 का नोट |
| आगामी सुधार कार्य | डिजिटल स्कैनर (QR Code) की स्थापना और परिसर का आधुनिकीकरण |
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