'बिना बताए क्षेत्र में आए तो मुंह काला कर दूंगा...' कांग्रेस विधायक के बागी तेवर, BJP ने कसा तंज
मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। सुसनेर विधायक भैरों सिंह परिहार ने संगठन पर दलाली के गंभीर आरोप लगाते हुए नेताओं को चेतावनी दी है, जिस पर भाजपा ने तंज कसा है।
भोपाल । मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन, अनुशासन और आंतरिक तालमेल को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सतह पर आ गया है. सुसनेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक भैरों सिंह परिहार ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक मंच से बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला है. विधायक परिहार के इस विवादित बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल और गुटबाजी तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को लपकते हुए इसे कांग्रेस की लाइलाज अंदरूनी कलह और बिखराव का एक और पुख्ता प्रमाण बताया है.
📢 2. स्थानीय विधायक की अनदेखी और गंभीर आरोप: 'बिना सूचना क्षेत्र में आए तो मुंह काला करके बाहर निकाल दूंगा'
यह पूरा मामला आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में आयोजित कांग्रेस के एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान सामने आया. मंच से अपनी बात रखते हुए विधायक भैरों सिंह परिहार ने गहरी नाराजगी जाहिर की.
विधायक की मुख्य आपत्तियां और चेतावनी:
विधायक ने कहा कि उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक और नगर कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन स्थानीय विधायक होने के बावजूद संगठन द्वारा उन्हें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी या आमंत्रण नहीं दिया जाता. इतना ही नहीं, पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों के पोस्टरों और बैनरों से भी स्थानीय विधायक के नाते उनकी तस्वीर को पूरी तरह गायब कर दिया गया.
प्रदेश नेतृत्व पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल में बैठे कुछ बड़े नेता दलाली का धंधा कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर कांग्रेस को कमजोर करने का काम कर रहे हैं. उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में चेतावनी देते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि संगठन का कोई भी बड़ा नेता बिना पूर्व सूचना के उनके क्षेत्र में पैर रखेगा, तो कार्यकर्ता उसका मुंह काला करके उसे क्षेत्र से बाहर खदेड़ देंगे. उन्होंने जोड़ा कि प्रदेश की जनता तो कांग्रेस की सरकार चाहती है, लेकिन पार्टी के ही कुछ बड़े नेता खुद नहीं चाहते कि कांग्रेस कभी सत्ता में वापस आए.
📊 3. कांग्रेस विधायक के बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों प्रमुख दलों की ओर से आई आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| राजनीतिक दल | प्रमुख प्रवक्ता/नेता | आधिकारिक स्टैंड और प्रतिक्रिया |
| विधायक का पक्ष | भैरों सिंह परिहार (विधायक, सुसनेर) | स्थानीय स्तर पर उपेक्षा का आरोप; भोपाल के नेताओं पर दलाली और गुटबाजी का आरोप लगाया. |
| भाजपा का स्टैंड | कल्पेश ठाकुर (प्रदेश प्रवक्ता) | कांग्रेस पर तंज; कहा कि कांग्रेस में न अनुशासन बचा है और न ही समन्वय, यही उनकी मूल राजनीतिक संस्कृति है. |
| कांग्रेस की सफाई | राजीव सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष) | विधायक से बात करने का आश्वासन; भाजपा को नसीहत दी कि वे दतिया और अपने आंतरिक विवादों को देखें. |
⚔️ 4. भाजपा का तीखा तंज: 'कांग्रेस में न कोई अनुशासन बचा है और न ही आपसी समन्वय'
विधायक परिहार के इस सार्वजनिक और बागी बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कल्पेश ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा:
🛡️ 5. कांग्रेस का पलटवार: 'विधायक से बात की जाएगी, भाजपा पहले अपने संगठन की चिंता करे'
इस बड़े संगठनात्मक विवाद और अंदरूनी कलह पर डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में आते हुए कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में जब भी किसी वरिष्ठ नेता का कोई भी संगठनात्मक कार्यक्रम तय होता है, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों, विधायकों और स्थानीय पदाधिकारियों को अनिवार्य रूप से इसकी पूर्व जानकारी दी जाती है.
उन्होंने आगे कहा कि विधायक भैरों सिंह परिहार ने आखिर किस परिस्थिति और संदर्भ में ऐसा भावुक या तीखा बयान दिया है, इस पर प्रदेश नेतृत्व उनसे सीधे चर्चा करेगा. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के हमलों को सिरे से खारिज करते हुए नसीहत दी कि भाजपा पहले अपने खुद के बिखरते संगठन की स्थिति का अवलोकन करे. उन्होंने दतिया सहित हाल के अन्य कई मामलों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा के भीतर भी समन्वय की भारी कमी और गंभीर आंतरिक गुटबाजी लगातार सामने आती रही है, इसलिए उन्हें कांग्रेस पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
बहरहाल, कांग्रेस विधायक के इस सार्वजनिक आक्रोश ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे असंतोष को एक बार फिर हवा दे दी है, और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश आलाकमान इस अनुशासनहीनता पर क्या कदम उठाता है.
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