मध्य प्रदेश में रूठे बादल फिर होंगे मेहरबान; 7 चक्रवाती सिस्टम एक्टिव होने से झमाझम बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश में 10 दिन के सूखे के बाद मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है। देश में 7 चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से एमपी के अधिकांश हिस्सों सहित 16 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीते 10 दिनों से बादलों की बेरुखी के कारण आम जनता जहां उमस और भीषण गर्मी से हलाकान थी, वहीं अन्नदाता किसान भी फसलों के चौपट होने की आशंका से बेहद चिंतित और घबराए हुए थे. लेकिन अब प्रदेशवासियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खुशखबरी सामने आई है. मध्य प्रदेश के वायुमंडल में बादल एक बार फिर पूरी तरह मेहरबान होने जा रहे हैं. मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ 7 चक्रवाती (साइक्लोनिक) सिस्टम सक्रिय हो गए हैं, जिसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में आगामी दिनों में झमाझम बारिश होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. इन शक्तिशाली चक्रवाती प्रणालियों के असर के चलते मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों सहित देश के 16 राज्यों में बारिश का नया दौर शुरू होने का अलर्ट जारी किया है.
🌀 2. मध्य प्रदेश के वायुमंडल में चक्रवात का व्यापक असर: बंगाल की खाड़ी में बन रहा कम दबाव का क्षेत्र
देश भर में 7 चक्रवाती सिस्टम्स के एक साथ सक्रिय होने के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है.
ताजा मौसमी गतिविधियां:
इस वेदर सिस्टम का सीधा असर मध्य प्रदेश के भी कई पूर्वी और दक्षिणी जिलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. बीते शुक्रवार को प्रदेश के बालाघाट, उमरिया और डिंडौरी जिलों में जोरदार झमाझम बारिश दर्ज की गई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी की तरफ एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) तेजी से सक्रिय हो रहा है, जो मध्य प्रदेश के वायुमंडल में पहले से मौजूद चक्रवातों को और अधिक ऊर्जा दे रहा है. कम बारिश और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे मध्य प्रदेश के लिए यह मौसमी बदलाव किसी वरदान से कम नहीं है. पडोसी राज्यों छत्तीसगढ़, बंगाल और ओडिशा में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है और अगले दो दिनों तक वहां ऐसा ही मौसम बने रहने का अनुमान है.
🚨 3. बालाघाट और डिंडौरी के लिए भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट': 35 से अधिक जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना
मध्य प्रदेश मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, शनिवार को विशेष रूप से बालाघाट और डिंडौरी जिलों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है, जिसके लिए प्रशासनिक अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा प्रदेश के निम्नलिखित जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है:
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मालवा-निमाड़ अंचल: इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, देवास.
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नर्मदापुरम और महाकौशल: नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, सिवनी, मंडला.
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विंध्य और बुंदेलखंड: रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मैहर, मऊगंज, अनूपपुर, उमरिया, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी.
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चंबल अंचल: भिंड और दतिया.
मौसम वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन चक्रवातों की गति और दिशा अनुकूल बनी रही, तो पूरे मध्य प्रदेश में मानसून का कोटा आसानी से पूरा हो जाएगा और अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी.
📊 4. मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में वर्षा के आंकड़े और मानसून की वर्तमान स्थिति
मध्य प्रदेश में सामान्यतः जुलाई और अगस्त के महीनों में ही मानसून के कोटे की लगभग 40 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की जाती है. हालांकि, इस बार मानसूनी ब्रेक के कारण आंकड़े सामान्य से काफी पीछे चल रहे हैं. वर्तमान स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| शहर / जिला | अब तक दर्ज वास्तविक वर्षा (इंच में) | राज्य की सामान्य औसत वर्षा स्थिति |
| भोपाल (राजधानी) | 13.1 इंच | सामान्य औसत: 38 से 40 इंच |
| इंदौर | 14.0 इंच | सामान्य औसत: 38 से 40 इंच |
| देवास | 18.0 इंच | सामान्य की ओर अग्रसर |
| हरदा | 15.0 इंच | मध्यम श्रेणी की वर्षा |
| सीहोर | 14.0 इंच | सुधार की आवश्यकता |
| अलीराजपुर | सवा 2 इंच (2.25 इंच) | सबसे कम बारिश वाला जिला |
📉 5. प्रदेश के 35 जिलों में अब तक सामान्य से बहुत कम बारिश: पूर्वी क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक
मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में वर्तमान में कुल मिलाकर लगभग 13 प्रतिशत बारिश कम दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति प्रदेश के पूर्वी और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बनी हुई है, जहाँ मानसून के सामान्य कोटे से करीब 26 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है.
वर्तमान में मध्य प्रदेश की सामान्य वार्षिक औसत वर्षा 37.3 इंच मानी जाती है, लेकिन इस समय प्रदेश के 52 में से 35 मुख्य जिले ऐसे हैं, जो 'सामान्य से कम बारिश' (Rain Deficit) वाली श्रेणी में बने हुए हैं. यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ और किसान इस आगामी चक्रवाती सिस्टम की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, ताकि सूख रही खरीफ फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का) को जीवनदान मिल सके और भूजल स्तर में सुधार हो सके.
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