सपेरों के जुल्म से लेकर लाठी के वार तक, घायल जंगली जानवरों को नई जिंदगी दे रहा यह अनोखा अस्पताल

जबलपुर का SWFH संस्थान मध्य भारत का इकलौता अस्पताल है जहां सांप, बाघ और तेंदुए जैसे जंगली जीवों का जटिल ऑपरेशन और इलाज किया जाता है। जानिए कैसे डॉक्टरों की टीम इन बेजुबानों को देती है नई जिंदगी।

Jul 18, 2026 - 18:20
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सपेरों के जुल्म से लेकर लाठी के वार तक, घायल जंगली जानवरों को नई जिंदगी दे रहा यह अनोखा अस्पताल

जबलपुर। सामान्य तौर पर आपने सुना होगा कि इंसानों के इलाज के लिए बड़े-बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल होते हैं. कुछ पालतू और दुधारू पशुओं के इलाज के लिए भी पशु चिकित्सालय मिल जाते हैं. लेकिन आपने शायद ही कभी सुना होगा कि कोई ऐसा भी सर्वसुविधायुक्त अस्पताल है जो विशेष रूप से जहरीले सांपों का इलाज और जटिल ऑपरेशन करता है. जबलपुर का यह अनूठा अस्पताल केवल सांपों का ही नहीं, बल्कि बाघ, तेंदुआ, भालू, लोमड़ी, लकड़बग्घा और हाथी जैसे सभी खूंखार और विशालकाय जंगली जानवरों का इलाज करता है. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यहां आने वाले ज्यादातर जानवर पूरी तरह ठीक होकर सुरक्षित जंगलों में लौटते हैं. वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों का दावा है कि यह पूरे मध्य भारत (Central India) का इकलौता ऐसा अस्पताल है जो विशेष रूप से जंगली जीवों को समर्पित है.

जबलपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग की एंटी पोचिंग (Anti-Poaching) और रेस्क्यू टीम साल भर सक्रिय रहती है. यह टीम पूरे वर्ष में 500 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू करती है.

एक्सपर्ट का बयान:

जबलपुर के प्रसिद्ध वन्य प्राणी विशेषज्ञ अवि वरशैया का कहना है कि वे खुद साल भर में सैकड़ों सांपों का रेस्क्यू करते हैं, जिनमें कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसी कई अत्यंत जहरीली और दुर्लभ किस्में शामिल होती हैं. अवि ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान कई बार उन्हें ऐसे सांप मिलते हैं जो इंसानी हमलों या हादसों में गंभीर रूप से घायल हो चुके होते हैं. इन घायल सांपों को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए सबसे पहले उन्हें जबलपुर के इसी विशेष अस्पताल में लाकर उनका इलाज करवाया जाता है और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उन्हें प्राकृतिक आवास में मुक्त किया जाता है.

दरअसल, जबलपुर में स्थित इस अनोखे अस्पताल का आधिकारिक नाम स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ (SWFH) है. यह प्रतिष्ठित संस्थान जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (NDVSU) के साथ मिलकर काम करता है. संस्थान की प्रमुख अधिकारी शोभा जावरे ने बताया कि उनके पास वन्यजीव विशेषज्ञों और डॉक्टरों की एक बेहद अनुभवी और समर्पित टीम है, जो जंगली जानवरों के मिजाज और उनकी शारीरिक संरचना को समझने में माहिर है. इस अस्पताल में अब तक गंभीर रूप से घायल और बीमार बाघों, तेंदुओं, भालुओं, हाथियों और सियारों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है.

शोभा जावरे ने सपेरों द्वारा सांपों पर किए जाने वाले अमानवीय अत्याचारों का खुलासा करते हुए एक हैरान करने वाली जानकारी साझा की. उन्होंने बताया:

इस अस्पताल के डॉक्टरों की टीम किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटती. शोभा जावरे ने हाल ही में किए गए एक बेहद जटिल ऑपरेशन का उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे डॉक्टर इन सांपों का पूरा उपचार करते हैं. न केवल उनके मुंह से टांके और फेविक्विक को हटाया जाता है, बल्कि उन्हें एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाइयां देकर सामान्य किया जाता है.

बीते दिनों वन विभाग की टीम एक ऐसा सांप लेकर आई थी, जिस पर ग्रामीणों ने लाठियों से बेरहमी से हमला किया था. उस हमले के कारण सांप का पेट फट गया था और उसकी आंतें पूरी तरह बाहर निकल आई थीं. अस्पताल के सर्जिकल एक्सपर्ट्स की टीम ने तत्काल निर्णय लिया और उस सांप की संवेदनशील प्लास्टिक सर्जरी व ऑपरेशन किया, उसकी आंतों को वापस पेट के भीतर सुरक्षित रखकर टांके लगाए. वह सांप आज पूरी तरह स्वस्थ है.

जबलपुर के इस अनोखे वाइल्डलाइफ अस्पताल (SWFH) की वर्तमान उपलब्धियों और वन्यजीव प्रबंधन को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

वन्यजीव प्रबंधन के मुख्य बिंदु वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक इनपुट पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
वार्षिक सांप रेस्क्यू और उपचार प्रतिवर्ष 500 से अधिक सांपों का रेस्क्यू; पिछले वर्ष 65 विशेष नागों का सफल इलाज. जैव विविधता (Biodiversity) और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना.
सपेरों की क्रूरता का इलाज फेविक्विक से चिपके मुंह को खोलना और टूटे हुए विषैले दांतों का घाव ठीक करना. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सपेरों पर कानूनी कार्रवाई.
जटिल सर्जिकल ऑपरेशन्स लाठियों से घायल सांपों की आंतों का सफल ऑपरेशन और बाघ-तेंदुओं का क्रिटिकल केयर. डॉक्टरों में विशेष अनुभव का विकास, जिससे मृत्यु दर में भारी कमी आई है.
संस्थान की विशिष्टता पूरे मध्य भारत (MP, CG) में वन्यजीव फॉरेंसिक और स्वास्थ्य का इकलौता केंद्र. मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) के मामलों में त्वरित चिकित्सा राहत.

शोभा जावरे ने अंत में एक बेहद मार्मिक और वैज्ञानिक बात कही कि सामान्य तौर पर मानव जाति ने हमेशा केवल उन्हीं जानवरों के इलाज और रखरखाव की व्यवस्था की, जिनसे इंसानों का कोई सीधा आर्थिक फायदा जुड़ा था (जैसे गाय, भैंस, कुत्ता या घोड़ा). लेकिन यह एक ऐसा अनोखा अस्पताल है जिसमें किसी स्वार्थ के बिना पूरी प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का सामूहिक फायदा देखा जा रहा है. कुछ जंगली जानवर भले ही मानव बस्ती के लिए खतरनाक प्रतीत होते हों, लेकिन इस धरती को बचाने में उनका योगदान अतुलनीय है. प्रकृति के हर जीव को जीने की उतनी ही आजादी है, जितनी एक इंसान को है.

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