जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजी ग्वालियर नगरी; 5 लाख भक्तों ने किए दर्शन, देखें पूरा रूट
ग्वालियर में इस्कॉन द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ की भव्य रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। 42 फीट ऊंचे हाइड्रोलिक रथ पर विराजे भगवान के दर्शन के लिए 5 लाख श्रद्धालु उमड़े और भव्य महाआरती की गई।
ग्वालियर। नगर की सड़कों पर कदमताल और मृदंग की थाप के बीच गूंजते महामंत्र ने शनिवार को पूरे शहर को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया. अवसर था इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) द्वारा भगवान श्रीजगन्नाथ, भ्राता बलभद्र एवं बहन सुभद्रा महारानी की भव्य व विशाल रथयात्रा के ऐतिहासिक आयोजन का.
महामंत्र की गूंज:
"हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे... हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे..."
जय जगन्नाथ और जय गोविंदा के गगनभेदी जयकारों के बीच जीवाजी क्लब से शुरू हुई भगवान जगन्नाथ की इस भव्य रथयात्रा में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ पड़ा. भक्ति रस में पूरी तरह सराबोर युवक-युवतियां और महिला-पुरुष श्रद्धालु संकीर्तन की धुन पर झूमते-नाचते हुए रथ के साथ आगे बढ़ते रहे. भगवान जगन्नाथ के रथ की पवित्र रस्सी को स्पर्श करने और उसे खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष होड़ और भारी उत्साह दिखाई दिया. सनातन धर्म में ऐसी अटूट मान्यता है कि जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचता है, उसके जन्म-जन्मांतर के सभी पापों का क्षय हो जाता है.
करीब आठ से नौ किलोमीटर लंबे विशाल मार्ग में उमस भरी गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह थमा नहीं, बल्कि लगातार बढ़ता ही रहा. इस्कॉन प्रबंधन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस रथयात्रा के मुख्य चलित मार्ग में 1 लाख से अधिक श्रद्धालु सीधे शामिल हुए, जबकि पूरे शहर में लगभग 4 लाख से अधिक आम नागरिकों ने मार्ग में बने स्वागत मंचों और घरों की छतों से भगवान के अलौकिक दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की.
इस विशाल धार्मिक आयोजन के प्रबंधन और जनसहयोग को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| व्यवस्था का क्षेत्र | कुल आंकड़े और इनपुट | मुख्य उद्देश्य / जिम्मेदारी |
| कुल दर्शनार्थी श्रद्धालु | लगभग 5 लाख (1 लाख चलित यात्रा में + 4 लाख मार्ग में) | भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के दर्शन व आशीर्वाद. |
| प्रसाद पैकेट वितरण | यात्रा के दौरान 20,000 पैकेट्स का सुचारू वितरण | मार्ग में चल रहे श्रद्धालुओं को तत्काल स्वल्पाहार पहुंचाना. |
| विश्राम स्थल महाप्रसाद | ग्वाल वाटिका में 10,000 श्रद्धालुओं के लिए विशेष भोजन | यात्रा समापन के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारा/महाप्रसाद. |
| यातायात व भीड़ नियंत्रण | 40 से 50 विशेष रूप से प्रशिक्षित इस्कॉन स्वयंसेवक | जिला पुलिस बल के साथ समन्वय कर सुचारू यातायात सुनिश्चित करना. |
| समानांतर सेवा दल | सैकड़ों अन्य समर्पित स्वयंसेवक | सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, स्वागत मंच और सफाई व्यवस्था संभालना. |
रथयात्रा की शुरुआत से पहले सुबह मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, उनके ज्येष्ठ भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा का अत्यंत मनमोहक व दिव्य श्रृंगार किया गया. इसके बाद पारंपरिक ढोल-ताशों और शंखध्वनि के साथ भगवान के विग्रहों को जीवाजी क्लब के मुख्य द्वार तक लाया गया. इस्कॉन के उत्तर भारत के जोनल सुपरवाइजर महामन प्रभु और वरिष्ठ नेता देवेंद्र तोमर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की और भव्य महाआरती उतारी.
इसके पश्चात भगवान को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सुसज्जित 42 फीट ऊंचे आधुनिक हाइड्रोलिक रथ पर गरिमापूर्ण तरीके से विराजमान कराया गया. रथयात्रा का विधिवत शुभारंभ जीवाजी क्लब से हुआ. इस अवसर पर भाजपा के मध्य प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और स्थानीय सांसद भारत सिंह कुशवाह सहित देश-विदेश से आए संत-महात्माओं ने सामूहिक रूप से भगवान की आरती उतारी और रथ को खींचकर आगे रवाना किया.
इस्कॉन की यह ऐतिहासिक रथयात्रा शहर के मुख्य व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों से होकर गुजरी. यात्रा का मार्ग और परिक्रमा पथ इस प्रकार रहा:
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प्रारंभिक बिंदु: जीवाजी क्लब से प्रारंभ होकर यात्रा अचलेश्वर मंदिर पहुंची.
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मध्य मार्ग: अचलेश्वर से सनातन मंदिर मार्ग, जयेंद्रगंज, दाल बाजार, नया बाजार, लोहिया बाजार, ऊंट पुल, पाटनकर बाजार और दौलतगंज होते हुए ऐतिहासिक महाराज बाड़ा पहुंची.
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परिक्रमा व समापन: महाराज बाड़े की भव्य परिक्रमा करने के बाद रथयात्रा सराफा बाजार, डीडवाना ओली, गश्त का ताजिया, नई सड़क, हनुमान चौराहा और छत्री बाजार होते हुए अपने अंतिम गंतव्य ग्वाल वाटिका पहुंची, जहां आरती के बाद यात्रा का समापन हुआ.
पूरे मार्ग में सैकड़ों सामाजिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा मंच बनाकर भगवान पर क्विंटल से पुष्पवर्षा की गई और श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल व शरबत की व्यवस्था की गई.
ग्वालियर की इस भव्य इस्कॉन रथयात्रा का एक राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास रहा है. पिछले पांच वर्षों से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और बाद में वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नियमित रूप से इस यात्रा में शामिल होकर भगवान का रथ खींचते रहे हैं. इस वर्ष भी इस्कॉन प्रबंधन द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा की गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर अपरिहार्य शासकीय व्यस्तताओं और महत्वपूर्ण बैठकों के कारण वे ग्वालियर नहीं पहुंच सके. हालांकि, उनकी अनुपस्थिति के बावजूद स्थानीय मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी मुस्तैदी से यात्रा में सहभागिता निभाई.
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