मुरार में किसान का फोन 3 दिन तक रहा बंद, सर्विस सेंटर पहुंचे तो उड़ चुके थे लाख रुपये; FIR दर्ज
ग्वालियर के मुरार में शातिर ठगों ने एक किसान का मोबाइल हैक कर उनके यूनियन बैंक खाते से 1 लाख रुपये उड़ा लिए। मोबाइल 3 दिन बंद रहने के बाद जब सर्विस सेंटर पर चालू हुआ, तब ठगी का पता चला।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के मुरार इलाके में शातिर साइबर ठगों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया है. ठगों ने क्षेत्र के एक सीधे-साधे किसान के बैंक खाते में डिजिटल सेंधमारी करते हुए ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) पार कर दिए. इस ठगी को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने पीड़ित के मोबाइल फोन को ही रिमोटली हैक कर दिया, जिसके बाद उनका मोबाइल अचानक पूरी तरह से ब्लैकआउट (बंद) हो गया.
पीड़ित किसान लगभग तीन दिनों तक अपने स्तर पर मोबाइल फोन को दोबारा चालू करने की कोशिश करता रहा, लेकिन सफलता नहीं मिली. अंततः जब वह मोबाइल को ठीक कराने के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर पहुंचा, तब जाकर इस सनसनीखेज साइबर हैकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ. किसान की लिखित शिकायत के आधार पर स्थानीय मुरार थाना पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़ागांव इलाके में मुर्गी फार्म के पास रहने वाले दीपक राजपूत (पुत्र अशोक सिंह राजपूत) पेशे से किसान हैं और मुरार क्षेत्र में ही उनके कृषि खेत हैं. दीपक के मुताबिक, बीते दिनों उनका मोबाइल फोन अचानक बिना किसी वजह के बंद हो गया. उन्होंने फोन को रीस्टार्ट और ऑन करने का कई बार प्रयास किया, लेकिन स्क्रीन पूरी तरह से ब्लैंक रही. चूंकि ग्रामीण अंचल में तकनीकी समझ सीमित होती है, इसलिए वह लगातार तीन दिनों तक घर पर ही फोन को ऑन करने की कोशिश करते रहे, जिससे ठगों को अपना काम करने का पूरा समय मिल गया.
जब तीन दिनों तक मोबाइल चालू नहीं हो सका, तो दीपक राजपूत परेशान होकर मोबाइल को ग्वालियर शहर स्थित एक तकनीकी वर्कशॉप (सर्विस सेंटर) लेकर पहुंचे. वहां जब हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने मोबाइल की तकनीकी जांच की, तो फोन चालू तो हो गया, लेकिन मोबाइल का पूरा पुराना डेटा (कॉन्टेक्ट्स, ऐप्स और मैसेज) पूरी तरह फॉर्मेट यानी डिलीट हो चुका था.
सर्विस सेंटर के इंजीनियर ने पीड़ित दीपक को स्पष्ट बताया कि उनका मोबाइल फोन साधारण रूप से खराब नहीं हुआ था, बल्कि इसे किसी शातिर साइबर अपराधी द्वारा रिमोट एक्सेस लेकर पूरी तरह से हैक किया गया था.
इस पूरी साइबर धोखाधड़ी के मुख्य बिंदुओं और घटनाक्रम को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| घटना के मुख्य बिंदु | आधिकारिक विवरण व नाम | वर्तमान स्थिति व एक्शन |
| पीड़ित किसान का नाम | दीपक राजपूत (पुत्र अशोक सिंह राजपूत) | साइबर हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत दर्ज. |
| घटना का सटीक स्थान | बड़ागांव, मुर्गी फार्म के पास, मुरार (ग्वालियर) | मुरार थाने में मूल एफआईआर (FIR) दर्ज. |
| प्रभावित बैंक खाता | यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) | पुलिस द्वारा बैंक से ट्रांजैक्शन हिस्ट्री मांगी गई. |
| कुल ठगी की राशि | ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) | साइबर सेल द्वारा आईपी (IP) एड्रेस ट्रैक करने का प्रयास. |
| ठगी का मुख्य तरीका | मोबाइल हैकिंग और रिमोट डेटा फॉर्मेटिंग | नागरिकों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की सलाह. |
इंजीनियर द्वारा मोबाइल हैक होने की बात सुनते ही दीपक राजपूत के पैर तले जमीन खिसक गई. उन्हें तुरंत किसी अनहोनी की आशंका हुई और वह सीधे अपनी नजदीकी यूनियन बैंक शाखा पहुंचे. बैंक काउंटर पर जाकर जब उन्होंने अपने खाते की पासबुक अपडेट कराई और बैलेंस देखा, तो उनका डर सच साबित हुआ. ठगों ने मोबाइल हैक रहने के दौरान उनके खाते में जमा पूंजी से ₹1 लाख की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर कर ली थी.
खाते से पैसे कटने की पुष्टि होते ही पीड़ित ने सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद उन्होंने सीधे मुरार पुलिस थाने पहुंचकर मामले की पूरी लिखित जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है. मामले की तकनीकी जांच ग्वालियर पुलिस की स्पेशल साइबर सेल को सौंप दी गई है.
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