जीवाजी विवि आर्यभट्ट हॉस्टल में NSUI-ABVP आमने-सामने; कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य हुए भावुक
ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट हॉस्टल में NSUI और ABVP के बीच जमकर हंगामा हुआ। स्थिति संभालने पहुंचे कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिसके बाद छात्रों ने धरना समाप्त किया।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रसिद्ध जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji University) के आर्यभट्ट हॉस्टल में मंगलवार को छात्र राजनीति से जुड़े दो प्रमुख गुटों के बीच जमकर हंगामा हुआ. हॉस्टल परिसर में बिना प्रशासनिक अनुमति के आयोजित कार्यक्रम को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. स्थिति उस समय अत्यधिक भावुक हो गई, जब प्रदर्शनकारी छात्रों को शांत कराने के लिए स्वयं विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य को हाथ जोड़कर छात्रों से आग्रह करना पड़ा.
अभाविप कार्यकर्ता जब मांगें पूरी न होने तक धरना समाप्त न करने पर अड़े रहे, तो कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य खुद धरना स्थल पर पहुंचे.
उन्होंने अत्यंत विनम्रता से हाथ जोड़कर विद्यार्थियों से कहा:
कुलगुरु के इस संवेदनशील और विनम्र रवैये का प्रदर्शनकारियों पर गहरा प्रभाव पड़ा. अभाविप पदाधिकारियों ने तत्काल कुलगुरु से कहा कि उन्हें माफी मांगने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है और छात्रों ने अपने उग्र व्यवहार के लिए स्वयं खेद व्यक्त करते हुए गतिरोध समाप्त कर दिया.
घटनाक्रम के अनुसार, हॉस्टल परिसर में आयोजित एनएसयूआई के एक कार्यक्रम को लेकर अभाविप और एनएसयूआई कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे. दोनों पक्षों के बीच देखते ही देखते उग्र नारेबाजी और तीखी बहस शुरू हो गई.
माहौल तनावपूर्ण होते ही विश्वविद्यालय थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप करते हुए एनएसयूआई व युवा कांग्रेस के नेताओं को परिसर से बाहर रवाना कर दिया. हालांकि, इसके बावजूद अभाविप कार्यकर्ता हॉस्टल के मुख्य द्वार पर धरने पर डटे रहे, जो अंततः रात करीब आठ बजे कुलगुरु के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ.
घटनाक्रम और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी प्रमुख जानकारियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | विश्वविद्यालय प्रशासन व घटना का ब्योरा |
| घटनास्थल | आर्यभट्ट हॉस्टल, जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर) |
| विवाद का मुख्य कारण | बिना अनुमति परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम का आयोजन |
| शामिल छात्र संगठन | अभाविप (ABVP) बनाम एनएसयूआई (NSUI) व युवा कांग्रेस |
| प्रशासनिक कार्रवाई | जांच के आदेश, FIR कराने का आश्वासन व वार्डन को शो-कॉज नोटिस |
| विवाद का पटाक्षेप | कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य की मध्यस्थता से धरना समाप्त |
हॉस्टल में जारी गतिरोध को खत्म कराने के लिए सबसे पहले विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजीव मिश्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों से लंबी चर्चा की, लेकिन छात्र आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए.
इसके बाद कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने स्वयं मौके पर पहुंचकर छात्रों की शिकायतें सुनीं. उन्होंने आधिकारिक रूप से आश्वासन दिया कि बिना प्रशासनिक अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. इसके साथ ही दोषी आयोजकों के विरुद्ध पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज कराने और लापरवाही बरतने पर हॉस्टल वार्डन को कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए.
जानकारी के अनुसार, युवा कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के अंतर्गत आर्यभट्ट हॉस्टल में एक संवाद कार्यक्रम रखा गया था. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मितेंद्र दर्शन सिंह और एनएसयूआई के कई वरिष्ठ पदाधिकारी परिसर में पहुंचे थे.
जैसे ही इसकी भनक पहले से हॉस्टल की मूलभूत समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभाविप कार्यकर्ताओं को लगी, वे उग्र हो गए. अभाविप ने शैक्षणिक परिसर के अंदर बिना अनुमति राजनीतिक गतिविधियों के संचालन पर कड़ा एतराज जताया, जिसके बाद दोनों पक्षों में हिंसक झड़प की नौबत आ गई थी.
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