3.30 लाख हेक्टेयर में बिछी सोयाबीन संकट में; घटते उत्पादन और लागत से परेशान किसान
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में अल नीनो और कम बारिश के कारण सोयाबीन की फसल संकट में है। महज 14 इंच बारिश से फसलें पीली पड़ रही हैं। जानिए उत्पादन के आंकड़े, प्रति हेक्टेयर लागत और कृषि विभाग की पूरी रिपोर्ट।
सीहोर। मध्य प्रदेश में 'काला सोना' यानी सोयाबीन के प्रचुर उत्पादन के लिए विख्यात सीहोर जिले में इस बार मानसून की बेरुखी ने खरीफ सीजन की मुख्य फसल को गहरे संकट में डाल दिया है. जिले में कम बारिश के कारण हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं. अन्नदाता किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं और बेबस किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश की बूंदों का इंतजार कर रहे हैं.
राजधानी भोपाल से सटे सीहोर जिले की मुख्य पहचान सोयाबीन का बंपर उत्पादन रहा है. हालांकि, इस बार अल नीनो के प्रभाव से मानसून के छकने के कारण फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं.
इस खरीफ सीजन में जिला किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने कुल 4 लाख 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न फसलों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया था. इसमें से अकेले 3 लाख 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सोयाबीन की बोवनी की गई.
सोयाबीन के लगातार घटते उत्पादन को देखते हुए इस बार कई किसानों ने जोखिम कम करने के लिए मक्का और धान की बुवाई का रकबा भी बढ़ाया है.
खरीफ सीजन में सोयाबीन की स्थिति और बारिश के आंकड़ों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| मापदंड / विवरण | वर्तमान स्थिति व आंकड़े |
| सोयाबीन बोवनी का रकबा | लगभग 3.30 लाख हेक्टेयर |
| चालू सीजन में अब तक बारिश | महज 14 इंच |
| गत वर्ष इसी अवधि में बारिश | 25 इंच |
| जिले की सामान्य औसत बारिश | 42 से 44 इंच |
| प्रति हेक्टेयर अनुमानित लागत | ₹14,000 से ₹15,000 |
| ऐतिहासिक उत्पादन स्तर | 4 से 4.5 लाख मीट्रिक टन (शीर्ष 5 जिलों में शामिल) |
सीहोर जिले में इस बार मानसून के दौरान अब तक महज 14 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में 25 इंच बारिश हो चुकी थी. जिले की सामान्य औसत बारिश 42 से 44 इंच मानी जाती है.
बारिश की भारी कमी के कारण खेतों में अंकुरित सोयाबीन की फसल, खासकर अगेती किस्म (Early Variety), पानी के अभाव में पीली पड़ने लगी है. फसलें कुपोषण का शिकार हो रही हैं और उनमें फंगस व बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है.
सीहोर जिले में सोयाबीन का कुल उत्पादन बीते तीन वर्षों से लगातार घट रहा है. किसी समय सीहोर जिला सालाना 4 से 4.5 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उत्पादन के साथ मध्य प्रदेश के शीर्ष 5 जिलों में शुमार रहता था.
हालांकि, पिछले कुछ सालों में यह उत्पादन गिरकर 3 से 3.5 लाख मीट्रिक टन तक सिमट गया है. कृषि विशेषज्ञों का आकलन है कि इस बार बारिश की कमी के कारण उत्पादन अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकता है.
आज के दौर में कृषि में लागत लगातार बढ़ रही है. सीहोर के किसानों के अनुसार, एक हेक्टेयर खेत में सोयाबीन की बुवाई, खाद, बीज और कीटनाशक मिलाकर 14 से 15 हजार रुपये की लागत आती है. भारी लागत लगाने के बाद बारिश न होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है.
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