साइबर ठगी पर MP हाई कोर्ट सख्त; 3 राज्यों के DGP और केंद्र सरकार के 2 सचिव तलब

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी पर चिंता जताते हुए केंद्रीकृत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता बताई है। हाई कोर्ट ने 3 राज्यों के DGP और 2 केंद्रीय सचिवों को तलब किया है। जानिए जबलपुर साइबर ठगी मामले की पूरी रिपोर्ट।

Jul 22, 2026 - 15:55
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साइबर ठगी पर MP हाई कोर्ट सख्त; 3 राज्यों के DGP और केंद्र सरकार के 2 सचिव तलब

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए एक 'केंद्रीकृत प्रभावी संस्थागत ढांचा' (Centralized Institutional Mechanism) बेहद आवश्यक है.

साइबर क्राइम के एक मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस हिमांशू जोशी की एकलपीठ ने कड़ा आदेश जारी किया है. कोर्ट ने अगली सुनवाई पर केंद्र सरकार के 2 सचिवों, 3 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP), और मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) सहित अन्य शीर्ष जांच अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं.

हाई कोर्ट ने जांच में देरी पर तल्ख टिप्पणी करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि मामले में असम पुलिस ने जांच में तत्परता दिखाई, जबकि मध्य प्रदेश पुलिस की जांच चिंताजनक रूप से सुस्त गति से आगे बढ़ी.

अदालत ने कहा, "ऐसी अनपेक्षित देरी से असरदार जांच का मूल मकसद ही खत्म हो जाता है, जिससे ठगी शिकार हुए पीड़ितों की धनराशि वापस (Recovery) मिलने की संभावना न के बराबर रह जाती है."

यह पूरा मामला जबलपुर के गोराबाजार निवासी चित्रकला मित्रा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने साइबर ठगी की पुलिस जांच में लापरवाही को चुनौती दी थी. एकलपीठ के आदेश पर जबलपुर पुलिस अधीक्षक (SP) संपत उपाध्याय और गोराबाजार थाना प्रभारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए.

एसपी ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखते हुए बताया कि शिकायत मिलते ही मामला साइबर सेल को सौंप दिया गया था. हालांकि, बैंकों की नोडल एजेंसियों से जानकारी जुटाने में 3 से 5 दिन का समय लगता है. अन्य राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित करने, संबंधित प्लेटफॉर्म्स से IP Log, सब्सक्राइबर विवरण और तकनीकी डेटा प्राप्त करने के दौरान आरोपी डिजिटल साक्ष्य मिटाकर अपना ठिकाना बदल लेते हैं.

केस और अदालती कार्यवाही की वर्तमान स्थिति को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:

विवरण / मापदंड आधिकारिक जानकारी व स्थिति
सुनवाईकर्ता पीठ जस्टिस हिमांशू जोशी (एकलपीठ, MP हाई कोर्ट)
याचिकाकर्ता चित्रकला मित्रा (निवासी गोराबाजार, जबलपुर)
तलबी का आदेश केंद्र के 2 सचिव, 3 राज्यों के DGP, MP के प्रमुख सचिव
असम पुलिस की कार्रवाई 8 जुलाई 2026 को संपर्क ➔ 11 दिन में गिरफ्तारी (19 जुलाई)
नियुक्त न्याय मित्र अधिवक्ता आयुष तिवारी (साइबर लॉ डिप्लोमाधारक)
अगली सुनवाई तिथि 31 जुलाई 2026

मामले में सुनवाई के दौरान असम पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 8 जुलाई 2026 को संपर्क किए जाने के 11 दिनों के भीतर उन्होंने आरोपी को गिरफ्तार कर 19 जुलाई को जबलपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था.

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल और झारखंड के DGP की ओर से पेश वकीलों ने कानून-व्यवस्था की व्यस्तता का हवाला देकर व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी. इस पर नाराजगी जताते हुए एकलपीठ ने कहा कि दोनों राज्यों के पुलिस प्रमुखों का रवैया बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है.

हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान उपस्थित साइबर कानून विशेषज्ञ अधिवक्ता आयुष तिवारी ने अदालत की सहायता करने की इच्छा जताई. उनकी शैक्षणिक योग्यता और विषय विशेषज्ञता को देखते हुए एकलपीठ ने उन्हें न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त करने के आदेश जारी किए.

न्याय मित्र आयुष तिवारी ने अदालत को बताया कि विभिन्न राज्यों में वित्तीय साइबर अपराधों (Cyber Financial Fraud) से निपटने के लिए कोई एकीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) उपलब्ध नहीं है. हाई कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण जनहित मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई के लिए तय की है.

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