57 प्रकार के खिलौनों से खेल-खेल में होगी पढ़ाई! जानिए क्या है एनसीईआरटी का 'जादुई पिटारा'
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छिंदवाड़ा के सरकारी स्कूलों में 3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिए 'जादुई पिटारा' किट की शुरुआत की गई है। 57 प्रकार के खिलौनों, पजल और ई-ऐप के जरिए बच्चे खेल-खेल में पढ़ेंगे।
छिंदवाड़ा। पढ़ाई को बोझ के बजाय रोचक और मनोरंजक बनाने के लिए शिक्षा विभाग 'जादुई पिटारा' पहल लेकर आया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रारंभिक कक्षाओं की शिक्षा को अधिक गतिविधि-आधारित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए तैयार किए गए इस पिटारे से बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई कर सकेंगे, जिससे उन्हें पढ़ाई बोझिल या बोरिंग नहीं लगेगी.
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जे. के. इढ़पाचे ने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार किए गए इस जादुई पिटारे का मुख्य उद्देश्य 3 से 8 साल के बच्चों में भाषा, गणित, रचनात्मकता, तार्किक सोच और सामाजिक कौशल का सर्वांगीण विकास करना है.
जिले के सभी 99 जनशिक्षा केंद्रों में से 10-10 ऐसे प्राथमिक विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां छात्रों की दर्ज संख्या अधिक है. इन चयनित स्कूलों में जादुई पिटारे के माध्यम से शिक्षण कार्य शुरू कराया जा रहा है.
जादुई पिटारा किट में कुल 57 प्रकार की सामग्री शामिल की गई है, जिसके माध्यम से खेल, कहानी, गीत और विभिन्न गतिविधियों के जरिए बच्चों को जोड़ना-घटाना, पढ़ना और लिखना सिखाया जा रहा है.
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खेल एवं मनोरंजक उपकरण: बाल चक्री, अबेकस, स्केटिंग रिंग्स, किचन सेट, चकला-बेलन, डमरू और कठपुतलियां.
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अकादमिक एवं भाषाई कार्ड: वर्णमाला और संख्या कार्ड, फ्लैश कार्ड, स्टोरी कार्ड, कलर कार्ड, जोकर कार्ड और अल्फाबेट कार्ड.
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बौद्धिक सामग्री: पहेलियां (Puzzles), पोस्टर, गतिविधि पुस्तिकाएं और शिक्षकों के लिए मार्गदर्शन हैंडबुक.
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डिजिटल लर्निंग: आधुनिक शिक्षण के लिए डिजिटल 'ई-जादुई पिटारा' ऐप भी शामिल है.
जिला शिक्षा केंद्र के एपीसी (APC) संकेत जैन ने बताया कि किट में मौजूद सामग्रियों का उपयोग बहुत ही व्यावहारिक तरीके से किया जा रहा है. उदाहरण के लिए, कलर कार्ड के जरिए आसपास के वातावरण से रंगों का मिलान कराना, नंबर कार्ड से अंकों की पहचान और कहानी कार्ड के दो-लाइन वाक्यों से भाषाई समझ विकसित की जा रही है.
कक्षा में कहानी सुनाने, चित्र आधारित गतिविधियों, समूह खेलों और खिलौनों के प्रयोग से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ रही है, जिससे वे बिना किसी मानसिक दबाव के बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN) हासिल कर रहे हैं.
इस पूरी योजना और इसकी कार्यान्वयन स्थिति का विवरण नीचे दिया गया है:
| विवरण / मापदंड | आधिकारिक जानकारी व स्थिति |
| लक्षित आयु वर्ग | 3 से 8 वर्ष के बच्चे |
| कुल सामग्री संख्या | 57 प्रकार के खिलौने, कार्ड्स एवं डिजिटल ऐप |
| चयनित केंद्र/स्कूल | 99 जनशिक्षा केंद्रों के उच्च नामांकन वाले 10-10 स्कूल |
| तैयारकर्ता संस्था | एनसीईआरटी (NCERT) |
| मुख्य उद्देश्य | बुनियादी साक्षरता, गणितीय एवं सामाजिक कौशल विकास |
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब कॉन्वेंट और प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर प्री-प्राइमरी कक्षाएं (नर्सरी, केजी-1, केजी-2) भी संचालित की जा रही हैं. इन कक्षाओं को भारतीय संस्कृति और परिवेश के अनुसार विशेष नाम दिए गए हैं:
प्रदेश भर में संचालित 990 प्री-प्राइमरी कक्षाओं में से 517 कक्षाएं अकेले छिंदवाड़ा जिले में संचालित हो रही हैं. इन कक्षाओं में 'जादुई पिटारे' के जरिए 3 वर्ष तक खेल-खेल में बुनियादी शिक्षा देने के बाद बच्चों को कक्षा पहली (Class 1) में औपचारिक प्रवेश दिया जाएगा.
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