इंदौर के MY अस्पताल परिसर में चल रहा था चंदे का धंधा! लावारिस शवों के नाम पर वसूली, जांच के आदेश
इंदौर में लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के नाम पर फर्जी चंदा उगाहने और उससे दारू-मटन पार्टी करने का मामला सामने आया है। एमवाय अस्पताल परिसर की संस्था पर आरोप लगने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं।
इंदौर। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करना समाज में महापुण्य का कार्य माना जाता है, लेकिन अहिल्या नगरी इंदौर में इसी पवित्र कार्य को कमाई और अय्याशी का जरिया बनाए जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है. इंदौर के महाराजा यशवंतराव (MY) अस्पताल परिसर से संचालित एक संस्था और 'एकता सेवा समिति' पर आरोप है कि लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के नाम पर एकत्रित किए गए दान के पैसों से संचालकों द्वारा दफ्तर के भीतर दारू और मटन पार्टी की जा रही है.
चौंकाने वाली बात यह है कि नशाखोरी और जुआ खेलने का यह खेल किसी गुप्त स्थान पर नहीं, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा समाज सेवा के लिए आवंटित किए गए शासकीय कार्यालय में खुलेआम चल रहा था.
संस्था से जुड़े समाजसेवी नरेंद्र वर्मा ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए साक्ष्यों के साथ इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा को शिकायत सौंपी है.
शिकायत के अनुसार, संस्था से जुड़े कथित समाजसेवी जयु जोशी, करीम पठान, फिरोज पठान और सुरेश मोरे ने लावारिस शवों के निस्तारण को एक संगठित व्यवसाय बना लिया था. ये लोग पुरानी लावारिस लाशों के फोटो अपने द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप्स में शेयर करते थे, जिनमें शहर के कई नामी उद्योगपति, समाजसेवी और व्यापारी जुड़े हुए हैं.
तस्वीरें भेजकर भावनात्मक अपील की जाती थी और दान प्राप्त करने के लिए बाकायदा अपने निजी फोन नंबर और QR कोड शेयर किए जाते थे. एक शव के अंतिम संस्कार के लिए ₹3,500 से लेकर ₹5,000 तक (कई मामलों में ₹10,000 से ₹11,000 तक) वसूले जाते थे, जबकि मुक्तिधाम में नगर निगम द्वारा अंतिम संस्कार की शासकीय दर मात्र ₹1,100 है या फिर यह व्यवस्था पूरी तरह नि:शुल्क होती है.
दानदाताओं से मोटी रकम ऐंठने के बाद ये कथित समाजसेवी लाश को मुक्तिधाम ले जाते थे, जहां पूर्व में जलाई गई चिताओं की बची हुई अधजली लकड़ियों का इस्तेमाल कर जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की औपचारिकता पूरी कर दी जाती थी. इसके बाद दान से प्राप्त मोटी राशि इनकी जेबों में पहुंच जाती थी.
हाल ही में इस संस्था के प्रमुख जयु जोशी का कार्यालय परिसर में शराब पीने और मटन खाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ. इसके अलावा यह भी सामने आया है कि ये पदाधिकारी नगर निगम से भी लावारिस शवों के प्रबंधन के नाम पर हर महीने ₹12,000 की सेवा राशि अलग से प्राप्त करते हैं.
प्रकरण से जुड़े मुख्य तथ्यों और आरोपों का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | मामला एवं प्रशासनिक स्थिति |
| मुख्य आरोपी संस्थाएं | MY अस्पताल परिसर स्थित संस्था व एकता सेवा समिति |
| आरोपी संचालक | जयु जोशी, करीम पठान, फिरोज पठान, सुरेश मोरे |
| वसूली का तरीका | पुरानी लाशों की फोटो भेजकर QR कोड के जरिए चंदा |
| वसूली बनाम वास्तविक दर | मांग: ₹3,500 - ₹11,000 | शासकीय दर: ₹1,100 (या नि:शुल्क) |
| प्रशासनिक कार्रवाई | कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा जांच के आदेश जारी |
शिकायतकर्ता नरेंद्र वर्मा का कहना है कि संस्था का न तो कोई वैध रजिस्ट्रेशन है और न ही दान राशि का कोई ऑडिट कराया जाता है. जिला प्रशासन को गुमराह करके दफ्तर हासिल किया गया था, जहां जुआ और शराबखोरी चल रही थी.
मामला संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया है.
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही फर्जीवाड़ा करने वालों और शासकीय संसाधनों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
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