सीधी जिले के किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह, खरीफ फसलों में जल निकासी और प्रबंधन पर जोर

सीधी जिले के कृषि विभाग ने किसानों को खरीफ फसलों में पानी के सही प्रबंधन और जल निकासी के लिए सलाह दी है, जिससे फसलों को सड़ने से बचाया जा सके।

Jul 28, 2026 - 15:43
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सीधी जिले के किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह, खरीफ फसलों में जल निकासी और प्रबंधन पर जोर

सीधी: खरीफ सीजन की खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। ऐसे में केवल अच्छी बारिश होना ही काफी नहीं है, बल्कि खेतों में बारिश के पानी का सही प्रबंधन (Water Management) होना भी बेहतर कृषि उत्पादन के लिए बेहद आवश्यक है। सीधी जिले के कृषि विभाग ने किसानों को विशेष सलाह दी है कि वे खेतों में बारिश के पानी के संरक्षण के साथ-साथ अतिरिक्त पानी की सुचारू निकासी की भी उचित व्यवस्था रखें, ताकि जलभराव के कारण फसलों को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सके।

💧 जल निकासी के लिए खेतों में जरूर बनाएं नालियां

कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''बदलते हुए मौसम के मिजाज के कारण कभी बहुत कम समय में भारी बारिश हो जाती है, तो कभी लंबे समय तक सूखा पड़ जाता है।''

ऐसी अनिश्चित स्थिति में किसानों को अपने खेतों में छोटी-छोटी नालियां बनाकर अतिरिक्त पानी की निकासी का प्रबंध करना चाहिए। खेतों में ज्यादा समय तक पानी भरा रहने से मक्का, सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख फसलों में जड़ गलन (Root Rot), फफूंद जनित बीमारियां और पौधों के सड़ने की समस्या तेजी से बढ़ जाती है।

इसके अलावा गहरी जुताई, गोबर की खाद, कम्पोस्ट और फसल अवशेषों का सही उपयोग करने से मिट्टी की जलधारण क्षमता (Water Retention Capacity) काफी हद तक बढ़ जाती है, जिससे जमीन में लंबे समय तक आवश्यक नमी बनी रहती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मूंग और उड़द जैसी फसलें सबसे बेहतरीन विकल्प मानी जाती हैं, जबकि धान की खेती के लिए भरपूर पानी की आवश्यकता होती है।

🌽 मक्का और सोयाबीन की फसल के लिए जल प्रबंधन बेहद जरूरी

रामपुर नैकिन के कृषि सलाहकार पवन शुक्ला ने बताया कि, ''हर फसल की पानी की जरूरत अलग-अलग होती है।'' उदाहरण के तौर पर बाजरा और ज्वार कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे देते हैं, जबकि मक्का की शुरुआती ग्रोथ और प्रारंभिक वृद्धि के लिए पर्याप्त नमी का होना बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ, सोयाबीन की फसल जलभराव को बिल्कुल भी सहन नहीं कर पाती है, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि सोयाबीन के खेतों में पानी बिल्कुल भी रुकने न पाए।

🌱 समय पर निराई-गुड़ाई और मेढ़बंदी से बढ़ेगा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञों का यह स्पष्ट कहना है कि समय पर जल संरक्षण, वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी और संतुलित पोषक प्रबंधन को अपनाकर किसान भाई अपनी फसलों को भारी नुकसान से बचा सकते हैं। इससे न सिर्फ फसल सुरक्षित रहती है बल्कि कुल उत्पादन और आमदनी में भी इजाफा होता है।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बुवाई और सिंचाई से जुड़ा हर फैसला भारतीय मौसम विभाग (IMD) एवं स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकृत पूर्वानुमानों के आधार पर ही लें। बारिश का दौर थमने के बाद किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई करने, खेतों की मजबूत मेढ़बंदी करने और आवश्यकतानुसार ऊंची क्यारियां (Raised Beds) बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

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