गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा भक्तों का सैलाब, देपालपुर के ऐतिहासिक विष्णु मंदिर की खासियत जानकर रह जाएंगे दंग
इंदौर के देपालपुर में स्थित है भगवान विष्णु के 24 अवतारों का एकमात्र अनोखा मंदिर। बिना लोहे के बने इस भव्य धार्मिक परिसर की खासियत और इतिहास के बारे में जानें।
इंदौर: पवित्र सनातन ग्रंथों और विशेषकर विष्णु पुराण में भगवान विष्णु के जिन 24 प्रमुख अवतारों का विस्तृत वर्णन मिलता है, उन सभी अवतारों को समर्पित देश का एकमात्र अनूठा मंदिर मध्य प्रदेश में इंदौर जिले के देपालपुर में स्थित है। इस अद्भुत धार्मिक परिसर में कुल 24 भव्य उप-मंदिर बनाए गए हैं, जहां भगवान विष्णु के 24 अलग-अलग अवतार विराजित किए गए हैं। हाल ही में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर यहां उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के अपार जनसैलाब के चलते यह ऐतिहासिक मंदिर एक बार फिर से देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गया है।
🛕 भगवान विष्णु के 24 अवतारों को समर्पित देश का अनूठा मंदिर
इंदौर शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देपालपुर का यह भव्य 'सार्वभौम हिंदू धर्म श्री 24 अवतार मंदिर' भगवान विष्णु के 24 अवतारों को पूरी तरह समर्पित है। यह विशाल और पवित्र स्थान स्थानीय किसानों द्वारा स्वेच्छा से दान की गई लगभग 40 बीघा भूमि पर पूरी भव्यता के साथ निर्मित किया गया है।
यह शानदार धार्मिक परिसर अपने आप में अपनी तरह का इकलौता और अनूठा मंदिर है। इस परिसर के प्रत्येक मंदिर में संबंधित भगवान के अवतार की पावन कथा, उनका स्वरूप, धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक संदेश को बेहद सुंदर ढंग से प्रदर्शित और विकसित किया गया है।
📜 ठीक 58 साल पहले हुई थी इस भव्य मंदिर की स्थापना की कल्पना
आज से ठीक 58 वर्ष पहले इस भव्य मंदिर के निर्माण की कल्पना ब्रह्मलीन गुरुदेव जयकरण दास एवं भक्तमाली परमहंस महाराज द्वारा वर्ष 1968-69 के दौरान आयोजित एक विशाल विष्णु महायज्ञ के पावन अवसर पर की गई थी।
उस समय देश के चारों प्रमुख शंकराचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति में इस अद्भुत मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया गया था। किंवदंतियों और इतिहास के अनुसार, उस वक्त देश के प्रसिद्ध उद्योगपति बिड़ला परिवार की ओर से इस मंदिर के संपूर्ण निर्माण का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन गुरुदेव ने यह कहते हुए उस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया था कि यह पवित्र मंदिर किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं बनेगा, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक श्रद्धा और जनसहयोग से ही आकार लेगा।
गुरुदेव की सोच और भावना आगे चलकर पूरी तरह साकार हुई। वर्ष 2017 की गुरु पूर्णिमा पर इस मंदिर के निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ हुआ और उसी ऐतिहासिक दिन श्रद्धालुओं ने लगभग साढ़े 3 करोड़ रुपए का दान देकर जनसहयोग की एक मिसाल कायम कर दी। इसके बाद महज 2 वर्षों के भीतर ही इस मंदिर का मुख्य और प्रमुख निर्माण कार्य सफलतापूपर्वक पूरा कर लिया गया।
🧱 बिना लोहे के इस्तेमाल के तैयार हुआ है 100 करोड़ का भव्य मंदिर
लगभग 100 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनकर तैयार हुए इस मंदिर की वास्तुकला (Architecture) पूरी तरह से अद्वितीय और प्राचीन भारतीय शैली पर आधारित है। इसके निर्माण में लगभग 8 लाख विशेष ईंटों का उपयोग किया गया है, जबकि सबसे हैरानी और गर्व की बात यह है कि पूरे मंदिर के निर्माण में कहीं भी लोहे (Iron) का प्रयोग नहीं किया गया है।
मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर स्थापित विशाल कलश पूरी तरह से शुद्ध अष्टधातु से निर्मित है। मंदिर ट्रस्ट के सचिव चिंटू वर्मा बताते हैं कि, ''निर्माण कार्य के दौरान देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने गुप्तदान के रूप में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण समर्पित किए थे, जिन्हें पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मंदिर की नींव में स्थापित किया गया है।''
देपालपुर का यह विशाल परिसर आने वाले समय में एक ही प्रांगण में भगवान विष्णु के 24 अवतारों के अलावा भगवान शिव के 11 रुद्र अवतारों और मां अंबिका के 9 शक्तिपीठ स्वरूप मंदिरों के साथ पूरी तरह विकसित किया जा रहा है।
यह अपनी तरह का सबसे विशाल और भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिसर बनने जा रहा है, जिससे देपालपुर अब धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर और भी अधिक मजबूती के साथ स्थापित हो जाएगा।
🌊 नर्मदा जल से सुसज्जित होगा मंदिर का पवित्र स्नान कुंड
इस विशाल मंदिर परिसर के भीतर एक भव्य पवित्र स्नान कुंड के निर्माण की भी पूरी योजना प्रस्तावित है। इस कुंड में पवित्र मां नर्मदा का जल लाने की योजना का कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नर्मदा जी की पाइपलाइन इस क्षेत्र तक सफलतापूपर्वक पहुंच चुकी है और बहुत जल्द ही इस कुंड तक शुद्ध नर्मदा जल उपलब्ध कराने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
भविष्य में आने वाले सभी श्रद्धालु मुख्य दर्शन करने से पहले इस पवित्र कुंड में स्नान कर सकेंगे। यह संकल्प भी गुरुदेव की मूल और दूरदर्शी कल्पना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट ने आगामी 'सिंहस्थ-2028' से पहले इस पूरे धार्मिक परिसर के निर्माण कार्य को शत-प्रतिशत पूर्ण करने का दृढ़ संकल्प लिया है। निर्माण के दूसरे चरण में भगवान शिव के 11 रुद्र अवतारों और मां अंबिका के 9 मंदिरों का निर्माण कार्य बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का मुख्य लक्ष्य यह है कि सिंहस्थ महाकुंभ के शुरू होने से पहले ये सभी मंदिर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ पूरी तरह समर्पित कर दिए जाएं।
🌟 सिंहस्थ महापर्व के दौरान और अधिक बढ़ेगी इस क्षेत्र की उपयोगिता
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद देश और दुनिया से आने वाले लाखों-करोड़ों श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं।
चूंकि देपालपुर का यह मार्ग उज्जैन से ओंकारेश्वर जाने वाले मुख्य रास्ते (महू होकर) के अंतर्गत आता है, इसलिए अब श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के बाद सीधे देपालपुर पहुंचकर इस 24 अवतार मंदिर के दिव्य दर्शन कर सकेंगे और फिर अपनी ओंकारेश्वर की यात्रा को बहुत ही आसानी से पूरी कर पाएंगे। सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए उज्जैन-देपालपुर और देपालपुर-ओंकारेश्वर मार्ग को फोरलेन सड़क में तब्दील करने की दिशा में भी सरकार द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है।
🎉 गुरु पूर्णिमा पर उमड़ता है देश-दुनिया से श्रद्धा का अपार सागर
हर साल गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर इस पवित्र स्थल पर श्रद्धालुओं का एक विशाल और अद्भुत जनसैलाब उमड़ता है। इस वर्ष भी यहाँ एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ को प्रबंधित करने के लिए मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक मनोज पटेल, उपाध्यक्ष सुलोचना पटेल और ट्रस्ट के सचिव चिंटू वर्मा लगातार उच्च स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन और निर्देशन में हजारों सेवाभावी स्वयंसेवक आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुद्ध भोजन, पेयजल, सुरक्षित पार्किंग, चिकित्सा सहायता, कड़े सुरक्षा इंतजाम और सुगम दर्शन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में पूरी निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं।
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