मोहना में चल रहा था अमेरिकन इंटरनेशनल कॉल सेंटर, 5 महीने में 1 करोड़ की ठगी करने वाले 4 गिरफ्तार

ग्वालियर के मोहना में चल रहे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का पर्दाफाश हुआ है। आरोपी अमेरिकी नागरिकों को लोन का झांसा देकर 5 महीने में 1 करोड़ ठग चुके हैं।

Jul 28, 2026 - 16:17
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मोहना में चल रहा था अमेरिकन इंटरनेशनल कॉल सेंटर, 5 महीने में 1 करोड़ की ठगी करने वाले 4 गिरफ्तार

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पकड़े जाने के बाद इस मामले में कई चौंकाने वाले और बड़े खुलासे सामने आए हैं। जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, परत दर परत एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन स्कैम खुलकर सामने आ रहा है। जांच में पता चला है कि इस फर्जी कॉल सेंटर के सीधे तार अमेरिका से जुड़े हुए थे। यहां काम करने वाले शातिर ठग अमेरिका के नागरिकों को अपना निशाना बनाते थे और महज 5 महीने के भीतर करीब 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी को अंजाम दे चुके थे। इस पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी अब ग्वालियर पुलिस द्वारा विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) को भी भेजी जा रही है।

💸 लोन दिलाने के नाम पर अमेरिकी नागरिकों से करते थे ठगी

ग्वालियर जिले की मोहना थाना पुलिस ने बीते 26 जुलाई को इलाके के एक होटल से साइबर ठगी करने वाले इस गिरोह के 4 शातिर सदस्यों को धर दबोचा था। ये सभी आरोपी एक होटल के कमरे में रहकर अमेरिकी नागरिकों को ठगने के लिए एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे।

ये ठग फोन पर खुद को अमेरिका की एक प्रतिष्ठित कंपनी 'लेंडिंग क्लब' का अधिकृत प्रतिनिधि या मेंबर बताते थे और अमेरिका में रहने वाले लोगों को कॉल करते थे। इनमें से जो लोग इनके झांसे में आते थे, उन्हें बेहद आसान और सस्ती ब्याज दर पर लोन (ऋण) दिलाने का लालच देकर ये ठगी करते थे। ठगी का यह पूरा अवैध कारोबार पिछले 5 महीनों से लगातार चल रहा था।

👥 बाहरी राज्यों के रहने वाले हैं सभी गिरफ्तार चारों आरोपी

पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे अंतरराष्ट्रीय स्कैम का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी प्रबल सिंह तोमर है, जिसने ग्वालियर के इस फर्जी कॉल सेंटर को चलाने के लिए इन 4 ठगों को नौकरी पर रखा था।

हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी मध्य प्रदेश से बाहर के अन्य राज्यों के रहने वाले हैं। इनमें से 2 आरोपी गुजरात के, 1 झांसी (उत्तर प्रदेश) का और 1 आरोपी नागालैंड का रहने वाला है। जबकि इस पूरे रैकेट का सरगना प्रबल सिंह तोमर खुद गुजरात से बैठकर इस ऑनलाइन स्कैम को ऑपरेट कर रहा था।

📞 रोजाना 300 से 400 लोगों को करते थे गूगल वॉइस कॉल

साइबर ठगी का यह पूरा कॉल सेंटर अमेरिका के स्थानीय समयानुसार सक्रिय होता था। आरोपी पिछले 5 महीनों से मोहना के जैनपथ होटल के कमरा नंबर 6 में रुके हुए थे। उन्होंने कमरे के भीतर ही लैपटॉप और मोबाइल फोन के जरिए पूरा हाई-टेक सेटअप तैयार किया हुआ था।

दिन के समय ये ठग सोते थे और (भारतीय समयानुसार) रात के लगभग 9 बजे जब अमेरिका में लोगों की दिनचर्या शुरू होती थी, तब वे अपना काम शुरू करते थे। ये शातिर हर दिन गूगल वॉइस कॉल के जरिए 300 से 400 अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे और कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर बदले में प्रोसेसिंग फीस, कमीशन और गिफ्ट वाउचर्स एडवांस में वसूल लेते थे।

इतने सारे लोगों को कॉल करने पर हर दिन औसतन 12 से 15 अमेरिकी नागरिक इनके जाल में फंसकर इनका शिकार बन जाते थे। इसके बाद ये ठग उन गिफ्ट वाउचर्स को आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर कैश करा लेते थे। ठगी की यह सारी रकम मुख्य आरोपी प्रबल तक पहुंचने के बाद, वह अपने इन गुर्गों को 15 से 20 हजार रुपये महीने की सैलरी देता था, जिसे वह हवाला के माध्यम से या गिफ्ट वाउचर्स के रूप में ही उन तक पहुंचाता था।

🗣️ अमेरिकन एक्सेंट में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे आरोपी

मोहना थाना प्रभारी विनय सिंह तोमर ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, ''पकड़े गए चारों आरोपी केवल 10वीं और 12वीं तक ही पढ़े-लिखे हैं, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि ये चारों ही अंग्रेजी बोलने में पूरी तरह निपुण हैं।''

अब तक की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इन चारों ने इंटरनेट और ऑनलाइन माध्यमों की मदद से अमेरिकन एक्सेंट (American Accent) में अंग्रेजी बोलना सीखा था। इसी के सहारे वे अमेरिकी नागरिकों से बातचीत कर उन्हें आसानी से अपने झांसे में ले लेते थे। किसी को कोई शक न हो, इसलिए ये बातचीत के दौरान अपने नाम भी अमेरिकी ही बताते थे।

🌐 डार्क वेब से अमेरिकी नागरिकों का डेटा खरीदता था सरगना

ठगी के लिए किसे कॉल करना है और किस तरह से शिकार को फंसाना है, इसकी पूरी जानकारी गुजरात में बैठा सरगना प्रबल सिंह तोमर उपलब्ध कराता था। मुख्य आरोपी प्रबल अमेरिकी नागरिकों का पर्सनल डेटा 'डार्क वेब' (Dark Web) के जरिए खरीदता था, जो अमूमन अमेरिका की ही कुछ सोलर कंपनियों से लीक होकर डार्क वेब तक पहुंचता था।

अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबर, पूरे नाम और अन्य गोपनीय जानकारियों की लिस्ट हर दिन ग्वालियर में बैठे इन चारों आरोपियों के व्हाट्सएप पर भेजी जाती थी। इसके साथ ही उन्हें बात करने के लिए एक खास 'स्क्रिप्ट' भी मिलती थी, जिसे पढ़कर कॉल सेंटर में बैठे ठग अमेरिकी नागरिकों से बात करते थे और उन्हें अपने जाल में फंसाकर हर महीने लगभग 20 लाख रुपये तक की ठगी कर लेते थे।

🕵️‍♂️ एफबीआई (FBI) को दी जाएगी सूचना, सरगना की तलाश जारी

पुलिस के मुताबिक, इस बड़े स्कैम में अब तक कुल कितने अमेरिकी नागरिक ठगी का शिकार बन चुके हैं, इस बात की विस्तृत पूछताछ आरोपियों से की जा रही है।

इस पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी देश के विदेश मंत्रालय को दी जा चुकी है, जिसके माध्यम से यह सूचना अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी 'फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' (FBI) को भी भेजी जा रही है। इसके अलावा, गूगल से भी इन जालसाजों से संबंधित डिजिटल डेटा और जानकारी हासिल करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। इधर, पुलिस ने चारों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। साथ ही, इस साइबर फ्रॉड के मुख्य सरगना को धर दबोचने के लिए पुलिस की एक विशेष टीम को गुजरात रवाना कर दिया गया है।

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