पंडित सुधीर शर्मा की विश्व शांति यात्रा पहुंची एस्टोनिया, महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास वैदिक अनुष्ठान
छतरपुर के पंडित सुधीर शर्मा विश्व शांति और प्रेम यात्रा के तहत एस्टोनिया पहुंचे हैं। उन्होंने वहां वैदिक अनुष्ठानों के जरिए भारतीय संस्कृति का प्रचार किया है।
छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो स्थित इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा इन दिनों 9 जुलाई से 9 अक्टूबर तक चलने वाली अपनी महत्वाकांक्षी 'विश्व शांति, प्रेम एवं क्षमा यात्रा' पर निकले हुए हैं। इसी कड़ी में 24 जुलाई को वे उत्तरी यूरोप के बेहद मनमोहक, सुंदर और आधुनिक देश एस्टोनिया में अपनी 5 दिवसीय विशेष यात्रा पर पहुंचे। यहां महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के महान आदर्शों को मानने वाले देश एस्टोनिया में उन्होंने भारतीय संस्कृति का भव्य ध्वज फहराया और वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से संपूर्ण विश्व को शांति का संदेश दिया।
🌍 सनातन जीवन मूल्यों और 'वसुधैव कुटुंबकम' को जन-जन तक पहुंचाना लक्ष्य
भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और विश्व बंधुत्व का पवित्र संदेश लेकर खजुराहो के जाने-माने पंडित सुधीर शर्मा इन दिनों विश्व दौरे पर हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सनातन जीवन मूल्यों, विश्व बंधुत्व और "वसुधैव कुटुंबकम" (संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है) के दिव्य संदेश को पूरी दुनिया के जन-जन तक पहुंचाना है। इसी कड़ी में वे अब यूरोप के एक बेहद महत्वपूर्ण देश में पहुंचकर भारतीय आध्यात्मिक चेतना का अनूठा प्रकाश फैला रहे हैं।
🗽 एस्टोनिया की राजधानी टालिन में स्थापित है महात्मा गांधी की प्रतिमा
पंडित सुधीर शर्मा ने एस्टोनिया देश की विशेषता बताते हुए कहा कि, ''एस्टोनिया उन चुनिंदा यूरोपीय देशों में शामिल है, जहां महात्मा गांधी के शांति, अहिंसा और मानवता के उच्च आदर्शों का गहरा सम्मान किया जाता है।''
इस देश की राजधानी टालिन (Tallinn) में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, जो भारत और एस्टोनिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक जीवंत प्रतीक है। बाल्टिक सागर के तट पर बसा एस्टोनिया अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ पर्यावरण और अत्याधुनिक डिजिटल व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
🌲 प्रकृति की गोद में बसा एस्टोनिया और आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प
इस देश का लगभग आधा हिस्सा घने और सुंदर वनों से घिरा हुआ है। यहां 2,000 से अधिक द्वीप, हजारों झीलें, शांत नदियां, प्राकृतिक दलदली क्षेत्र (बॉग्स) और मनोहारी समुद्री तट प्रकृति की बेहद अद्भुत छटा बिखेरते हैं। यहां की हरियाली, निर्मल वातावरण और शांत जीवनशैली इस देश को यूरोप के सबसे आकर्षक स्थानों में शुमार करती है। पंडित जी की यह पांच दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा पूरी तरह से विश्व शांति, प्रेम और क्षमा के महान संकल्प को समर्पित है।
🔥 हवन-पूजन और विश्व शांति यज्ञ से गूंजा एस्टोनिया
इस यात्रा के दौरान प्राचीन वैदिक परंपराओं के अनुसार भव्य हवन-पूजन, विश्व शांति यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया गया। इन धार्मिक आयोजनों में स्थानीय नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया, जिसके चलते उनके भीतर भारी उत्साह देखा गया। एस्टोनिया के स्थानीय रहवासी भी भारतीय संस्कृति, योग, अध्यात्म और सनातन परंपराओं से गहराई से परिचित हुए।
🤝 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल मंत्र से जुड़ रहे हैं विदेशी नागरिक
खजुराहो की मतंगेश्वर सेवा समिति और दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के प्रमुख पंडित सुधीर शर्मा का कहना है कि आज के दौर में विश्व शांति, प्रेम और क्षमा का संदेश पूरी मानव जाति की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र "वसुधैव कुटुंबकम" पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है, और यही शाश्वत संदेश इस विश्व शांति यात्रा के माध्यम से विभिन्न देशों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पांच दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में एस्टोनिया के नागरिकों का भी बहुत बड़ा और विशेष सहयोग मिल रहा है। उनके सहयोग से स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इस यात्रा से जुड़कर वैदिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ सहभागिता कर रहे हैं।
आपको बता दें कि इस यात्रा से पहले पंडित सुधीर शर्मा इटली के विश्वप्रसिद्ध शहर वेनिस के समीप स्थित शांता मार्गरीता (काउर्ले) पहुंचे थे। वहां समुद्र तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग स्थापित कर भारत के 18 ज्योतिर्लिंगों का प्रतीकात्मक रुद्राभिषेक किया गया था, जहां श्रद्धालुओं और योग साधकों ने सामूहिक सूर्य नमस्कार कर विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त सृष्टि के मंगल की कामना की थी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)