खून की कमी बताकर अस्पताल से भगाया या खुद गई महिला? सड़क पर डिलीवरी होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
टीकमगढ़ के बड़ागांव धसान में अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद एक महिला ने बीच सड़क इमली के पेड़ के नीचे बच्ची को जन्म दिया। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
टीकमगढ़: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद चौंकाने वाली और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बड़ागांव धसान क्षेत्र में एक प्रसूता महिला को रात के वक्त बीच सड़क और खुले आसमान के नीचे एक बच्ची को जन्म देना पड़ा। ककरवाहा गांव की रहने वाली गर्भवती महिला गीता कुशवाहा अपने परिजनों के साथ मंगलवार की रात को टीकमगढ़ जिले के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव धसान पहुँची थी। आरोप है कि वहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने महिला में खून की कमी (अनीमिया) होने का हवाला देकर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था, लेकिन किन्हीं विषम परिस्थितियों में महिला जिला अस्पताल नहीं पहुँच सकी और रास्ते में ही रह गई, हालांकि महिला जिला अस्पताल क्यों नहीं जा पाई, यह फिलहाल एक बड़ा जांच का विषय बना हुआ है।
🌳 अस्पताल से एक किलोमीटर दूर इमली के पेड़ के नीचे दिया बच्ची को जन्म
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित बड़ागांव के हनुमान गेट के पास मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे एक इमली के पेड़ के नीचे इस गर्भवती महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
गर्भवती महिला के साथ आई उसकी सास प्रेमबाई ने बताया कि मजबूरी में उन्होंने अपनी बहू को सड़क के किनारे बने एक चबूतरे पर लिटाया और जैसे-तैसे पूरी सर्द रात खुले में बिताई। जैसे ही सुबह हुई और स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत अस्पताल प्रबंधन को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही नर्सें मौके पर पहुँचीं और जच्चा-बच्चा दोनों को वापस अस्पताल लेकर आईं, जहाँ वर्तमान में उनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।
🗣️ परिजनों के गंभीर आरोप: "अस्पताल स्टाफ ने भगा दिया था बाहर"
बड़ागांव धसान में पूर्ण रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) संचालित होने के बावजूद बीच सड़क पर प्रसव होने की इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतका/प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतका की बुआ नन्ही बाई और पति जसरथ कुशवाहा का आरोप है कि, ''जब हम अपनी गर्भवती महिला को प्रसव कराने के लिए अस्पताल लेकर गए थे, तो वहाँ के स्टाफ ने उसे ठीक से देखने के बजाय अस्पताल से बाहर भगा दिया। इसी वजह से महिला वहाँ से लौट आई और रास्ते में ही उसे प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद उसने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दिया। हमें पूरी रात खुले आसमान के नीचे बेहद लाचारी में बितानी पड़ी।'' इस गंभीर मामले पर जब ईटीवी भारत के संवाददाताओं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ओपी अनुरागी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करना चाहा, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
🩺 ड्यूटी पर तैनात नर्सों ने सभी आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार
दूसरी ओर, अस्पताल में अपनी ड्यूटी पर तैनात नर्स दीपाली सनौधिया ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है।
दीपाली सनौधिया का कहना है, ''प्रसूता महिला के शरीर में खून की भारी कमी (हीमोग्लोबिन कम) होने के कारण ही डॉक्टरों ने उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया था, लेकिन वे लोग जिला अस्पताल जाने के बजाय अस्पताल परिसर के बाहर ही बैठे रहे और बाद में वहां से चुपचाप चले गए।''
उन्होंने आगे बताया कि जब हमें इस बात की जानकारी मिली, तो हमने उनके परिजनों को फोन लगाकर संपर्क करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन उनका फोन नहीं लगा और दुर्भाग्यवश रास्ते में ही डिलीवरी हो गई। सुबह जैसे ही हमें इस घटना की सूचना मिली, हमने तुरंत ऑटो भिजवाकर उन्हें वापस अस्पताल बुलवाया और भर्ती कराया। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनकी देखरेख में डॉक्टर लगातार उपचार कर रहे हैं।
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