MP Congress Crisis: हार के बाद भी नहीं संभल पाई कांग्रेस, आंदोलनों से कार्यकर्ता नदारद और नेताओं में तनातनी
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जमीनी हकीकत! संगठन में बदलाव के बाद भी आंदोलनों से कार्यकर्ता गायब। दिग्विजय-हरीश चौधरी के बीच बढ़ा मतभेद।
भोपाल। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा से मिली करारी हार के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस ने खुद को फिर से खड़ा करने के लिए बड़े बदलाव किए। जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की कमान सौंपी गई। 'संगठन सृजन अभियान' के तहत नई नियुक्तियां हुईं और ब्लॉक से पंचायत स्तर तक समितियां बनीं। लेकिन, तमाम कवायदों के बावजूद पार्टी आज भी अपने सबसे बड़े संकट—'कार्यकर्ताओं के भरोसे की कमी'—से जूझ रही है।
🔥 प्रदर्शनों का फीका असर: भोपाल में जुटे सिर्फ 12-15 लोग
पीसीसी (PCC) भले ही संगठन की सक्रियता का दावा कर रही हो, लेकिन वास्तविकता आंदोलनों के दौरान साफ झलकती है। हाल ही में वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में आठ दिवसीय उग्र प्रदर्शन का एलान हुआ था। युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन राजधानी भोपाल में प्रदर्शन के दौरान मात्र 12 से 15 कार्यकर्ता ही नजर आए, जो पार्टी की जमीनी स्थिति पर बड़ा सवालिया निशान है।
⚠️ 21 जिलों में ठप NSUI, नेताओं में तनातनी
छात्र इकाई एनएसयूआई की स्थिति और भी चिंताजनक है। 21 जिलों में प्रदर्शन न होने के कारण लापरवाह जिला अध्यक्षों को नोटिस थमाया गया है। इसके पीछे की बड़ी वजह संगठन के भीतर चल रही राजनीति को माना जा रहा है। साथ ही, पार्टी शीर्ष नेतृत्व में दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के बीच बढ़ता मतभेद भी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा रहा है। हालिया पत्रकार वार्ता में दोनों नेताओं के बीच की तनातनी खुलकर सामने आ गई थी।
🔍 संगठन का पक्ष
इस मामले पर पार्टी का कहना है कि फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन (युवा, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई) प्रदेश कांग्रेस के सीधे नियंत्रण में नहीं आते, लेकिन उन्हें प्रदर्शन के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। पार्टी प्रवक्ता के अनुसार, जिन जिलों में कार्यकर्ताओं की सक्रियता बेहद कम रही, वहां की स्थानीय इकाइयों से समीक्षा रिपोर्ट मांगी गई है और स्थिति में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
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