इंदौर 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही परंपरा, इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलती है झिलमिल झांकियां

इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलती है झिलमिल झांकियां

Sep 17, 2024 - 18:11
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इंदौर 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही परंपरा, इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलती है झिलमिल झांकियां

इंदौर अनंत चतुर्दशी पर निकलेगी झिलमिल झांकियां वर्षों पुरानी परंपरा को लेकर आज भी लोगों में खासा उत्साह  

 इंदौर (भारत पाटिल) शहर की सदियों पुरानी परंपरा हैं अनंत चतुर्दशी के दिन निकलने वाली झांकियों का करवाह बैलगाड़ी से शुरुआत सफर अब ट्रैक्टरों और अत्याधुनिक संसाधनों तक पहुंचा जहां अंग्रेजी हुकूमत की अत्याचार के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव की झांकियों से इस परंपरा की शुरुआत की थी। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर है जिसे मिलो का शहर भी कहा जाता है। बैलगाड़ी से झांकियां का शुरू हुआ सफर ट्रैक्टर ट्राले तक पहुंच चुका है। बदलते युग के साथ अब झांकियां की परंपरा भी मॉडर्न हो गई है यह तस्वीर इसी बात को बयां करती हैं। 

 101 साल से परंपरा बरकरार  समय के साथ बढ़ता गया कारवां  

इन झांकियां की परंपरा को मिल के मजदूरों ने 101 साल से बरकरार कर रखा है अनंत चतुर्दशी के दिन निकलने वाले चल समारोह में लाखों लोग इन झांकियों को देखने के लिए एक जुट होते हैं शाम 7 बजे से शुरू होने वाला ये कारवां सुबह 4 से 5 बजे तक चलता रहता है मिल मजदूरों द्वारा निकाली जाने वाली झांकियां इंदौर की सबसे पुरानी परंपरा है और इस विरासत को मिल के मजदूरों ने आर्थिक तंगी के बावजूद भी संजो कर रखा हैं। बदलते दौर के साथ ये सिलसिला और बड़ा होता गया लोग जुड़ते गए। मजदूरों के झांकियों के साथ खजराना गणेश मंदिर ,नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण की झांकियां चल समारोह में शामिल हो चुकी हैं। 6 मिल मजदूरों के झांकियों के साथ कुल 18 झांकियां आनंद चतुर्दशी के दिन चल समारोह में निकलती हैं...

 कोलकाता से झांकी बनाने आए जानिए कौन सी झांकी रहेगी विशेष आकर्षण का केंद्र  

इंदौर में झांकियां का बड़ा महत्व है धार्मिक आस्थाओं से जोड़ने के लिए झांकियां को निकाला जाता है जहां हिंदू धर्म में पुरानी कथाओं में मौजूद भगवान कृष्ण लीला भगवान राम सीता विवाह भगवान हनुमान की विशाल गए प्रतिमा और अलग-अलग अंदाज में इन झांकियां को बनाया गया है इस वर्ष अयोध्या के श्री राम के स्वरूप प्रतिकृति और मंदिर के भी दर्शन होंगे भगवान इंद्र और कृष्ण का भी युद्ध देखने को मिलेगा लाखों की संख्या में दर्शन शामिल होते हैं इस बार कल्याण मिल और इंदौर विकास प्राधिकरण की झांकियां के लिए कोलकाता से 20 से भी अधिक कलाकार पहुंचे ....

 जानिए कितने साल से बन रही कौन सी झांकी 

 हुकुमचंद मिल 101 साल पुरानी परंपरा है कल्याण मिल 95 साल पुरानी परंपरा है वहीं राजकुमार मिल 89 साल पुरानी परंपरा है परंपरा है मालवा मिल 90 साल पुरानी परंपरा है होम टैक्सटाइल मिल 75 साल पुरानी परंपरा है स्वदेशी मिल95 पुरानी परंपरा है. 

  लाखों की झांकियां देखने पहुंचते हैं लोग  

 अनंत चतुर्दशी पर न सिर्फ इंदौर बल्कि आसपास सभी बड़ी संख्या में लोग  आकर्षक झांकियां को निहारने के लिए पहुंचते हैं  रात भर झांकियां का करवा चलता है और लाखों की संख्या में लोग झांकियां को देखने आते हैं इस दौरान  माहौल काफी उत्साह जनक होता है 

  

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