फसलों को बचाने के लिए किसानों के लिए वरदान साबित होगा लेडीबर्ड बीटल, माहू कीट को चट कर फसलों को रखेगा सुरक्षित

सागर यूनिवर्सिटी में लेडीबर्ड बीटल पर विशेष रिसर्च शुरू हो गई है। यह कृषि मित्र कीट फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले माहू कीट को खत्म कर जैविक खेती को बढ़ावा देगा।

Jul 30, 2026 - 14:11
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फसलों को बचाने के लिए किसानों के लिए वरदान साबित होगा लेडीबर्ड बीटल, माहू कीट को चट कर फसलों को रखेगा सुरक्षित

सागर : हमारे प्राकृतिक वातावरण में कई ऐसे सूक्ष्म कीड़े पाए जाते हैं, जो खेती-किसानी के लिए किसी भी तरह से नुकसानदायक नहीं होते, बल्कि फसलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। ऐसा ही एक बेहद उपयोगी कीट 'लेडीबर्ड बीटल' (Ladybird beetle) कहलाता है, जिसे कृषि जगत में किसानों का सच्चा मित्र माना जाता है। यह लेडीबर्ड बीटल विभिन्न प्रकार की फसलों में लगने वाले हानिकारक कीड़ों को खाकर उन्हें नष्ट कर देता है।

ऐसी स्थिति में सरकार की यह मंशा है कि देश के किसान इन लाभकारी कीटों के बारे में गहराई से जानें और समझें, तथा रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने के बजाय इन प्राकृतिक कीटों का उपयोग करके जैविक तरीके से खेती करें। यही मुख्य वजह है कि अब इन मददगार कीड़ों को प्रयोगशालाओं (Labs) में बड़े पैमाने पर पैदा किया जा रहा है, जिससे इन्हें आसानी से किसानों तक पहुँचाया जा सके।

🔬 सागर यूनिवर्सिटी में लेडीबर्ड बीटल को लेकर चल रही है बड़ी रिसर्च

डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय (सागर यूनिवर्सिटी) के जूलॉजिकल डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर डॉ. शाश्वत सिंह को भारत सरकार की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण और विशेष प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है, जिसके तहत वे लेडीबर्ड बीटल पर उन्नत शोध करेंगे।

प्रोफेसर शाश्वत लैब में लेडीबर्ड बीटल का कृत्रिम उत्पादन करेंगे और साथ ही यह प्रभावी तरीका भी तलाशेंगे कि कैसे इन कीटों को आसानी से किसानों के खेतों तक पहुँचाया जा सके। डॉ. शाश्वत सिंह ने इजराइल देश में रहकर लगभग साढ़े पाँच साल तक कृषि के लिए बेहद फायदेमंद कीटों पर गहन रिसर्च की है। उनका ऐसा अनुभव है कि इजराइल के किसान इन लाभकारी कीटों के महत्व को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और वहाँ ये बाजार में आसानी से बिक्री के लिए भी उपलब्ध होते हैं। इसी तरह की उन्नत कृषि जागरूकता भारत में भी विकसित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

🇮🇱 इजराइली तकनीक और विशेषज्ञता का किया जाएगा भरपूर इस्तेमाल

सागर यूनिवर्सिटी के जूलॉजिकल विभाग के अंतर्गत स्थापित 'इंसर्ट बिहेवियर एंड बायोड्रिफेंस लैब' (Insect Behavior and Biocontrol Lab) के प्रभारी डॉ. शाश्वत सिंह कीटों के व्यवहार, उनकी आदतों और उनके गुणों पर शोध करने के विशेषज्ञ हैं।

उन्होंने इजराइल में कृषि मित्र कीटों पर करीब साढ़े पाँच साल बिताकर शोध कार्य किया है। डॉ. सिंह कुल पाँच प्रकार के प्रमुख कृषि मित्र कीटों के विशेष जानकार हैं और इन कीटों को व्यावहारिक रूप से खेती के लिए किस प्रकार मददगार बनाया जा सकता है, इस पर वे लंबे समय से काम कर रहे हैं। वर्तमान में वे एएनआरएफ (ANRF) द्वारा लेडीबर्ड बीटल पर सौंपे गए इस नए रिसर्च प्रोजेक्ट पर पूरी तन्मयता से काम शुरू कर चुके हैं।

🐛 किसानों के लिए किस तरह से बेहद फायदेमंद साबित होता है लेडीबर्ड बीटल?

डॉ. शाश्वत सिंह को इजराइल में उनके उत्कृष्ट कीट शोध कार्यों के लिए 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (ANRF) की तरफ से लेडीबर्ड बीटल पर रिसर्च करने के लिए यह प्रोजेक्ट मिला है।

डॉ. शाश्वत बताते हैं, ''इस रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत हम यह मुख्य रूप से पता लगाएंगे कि लेडीबर्ड बीटल सरसों की फसल और अन्य फसलों पर लगने वाले माहू (Aphid) कीट पर किस प्रकार प्रभावी ढंग से काम करता है। यह कीट माहू को पूरी तरह चट कर जाता है और हमारी फसलों को भारी नुकसान से बचाता है। मेरी पोस्टडॉक्टरल रिसर्च और पीएचडी भी इसी लेडीबर्ड बीटल पर ही केंद्रित रही है। इस नए शोध के माध्यम से हम यहाँ के स्थानीय वातावरण में इसके व्यवहार और कार्यक्षमता का अध्ययन करेंगे।''

उन्होंने आगे कहा, ''हम इस बात पर भी शोध करेंगे कि फसलों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए इस कीट की क्षमता कितनी अधिक है। आज के समय में यह एक कड़वी सच्चाई है कि अच्छी फसल उत्पादन के लिए किसान रासायनिक कीटनाशकों का भारी मात्रा में उपयोग करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में लेडीबर्ड बीटल जैसे प्राकृतिक कीट किसानों के लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकते हैं।''

🌾 फसलों के लिए कितना खतरनाक साबित होता है माहू कीट?

फसलों पर इसके प्रभाव को समझाते हुए वे बताते हैं कि जहाँ तक माहू की बात है, तो फसलों में लगने वाले इस विनाशकारी कीट को 'एफिड' (Aphid) या 'तेला' के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से सरसों की फसल को अपना निशाना बनाता है और यदि समय रहते इसका कोई उपाय न किया जाए, तो यह देखते ही देखते पूरी फसल को चट कर बर्बाद कर सकता है।

इसके अलावा, यह कीट गेहूं, चना, मटर और धनिया जैसी अन्य महत्वपूर्ण फसलों के लिए भी काफी ज्यादा नुकसानदायक होता है। यह एक रसचूसक कीट होता है, जो रंग में हरा, भूरा या काला हो सकता है और पौधों की कोमल पत्तियों, सुंदर फूलों और बालियों का सारा रस चूस लेता है, जिससे पूरा पौधा सूखकर नष्ट हो सकता है।

🇮🇳 भारत जैसे विशाल देश में किसानों तक लेडीबर्ड बीटल पहुँचाना एक बड़ी चुनौती

डॉ. शाश्वत सिंह का कहना है, ''इजराइल देश में कृषि प्रणाली बेहद उन्नत और संगठित है। वहाँ के किसान और वैज्ञानिक मिलकर सीधे खेतों पर मिलकर काम करते हैं। वहाँ के किसान खेती के लिए फायदेमंद कीटों और उनके वैज्ञानिक उपयोग के बारे में भली-भांति जानते हैं।''

उन्होंने आगे बताया कि कई इजराइली किसान खुद ऐसे फायदेमंद कीटों का उत्पादन करते हैं और उन्हें बाजार में बेचते हैं, जिन्हें दूसरे किसान अपनी फसल बचाने के लिए खरीद लेते हैं। लेकिन भारत में स्थिति काफी अलग है; यहाँ की जनसंख्या बहुत अधिक है, कृषि क्षेत्र काफी फैला हुआ है और अधिकांश छोटे किसान इन लाभकारी कीटों की जानकारी से वंचित हैं।

यही कारण है कि भारत में कृषि बुलेटिन और पॉकेट डायरी जैसे माध्यमों के जरिए किसानों तक लेडीबर्ड बीटल की जानकारी पहुँचाई जानी चाहिए। इसमें फसलों के प्रमुख कीटों और उनकी रोकथाम के जैविक उपायों की पूरी जानकारी दी जा सकती है।

चूंकि वे खुद पाँच अलग-अलग तरह के कीटों पर शोध कर चुके हैं, इसलिए किसान उनसे संपर्क कर अपनी फसल की समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। जिस प्रकार सरकार वर्तमान में मधुमक्खी पालन और रेशम कीट पालन का प्रशिक्षण बड़े पैमाने पर दे रही है, ठीक उसी तरह किसानों को लेडीबर्ड बीटल के उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है, ताकि वे खुद इन कीटों को पैदा करके अपनी फसलों की रक्षा कर सकें या इन्हें बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकें।

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