एयर इंडिया के इंजीनियर और मुंबई के कारोबारी ने छोड़ी सुख-सुविधा, उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में लिया संन्यास

उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में एयर इंडिया के इंजीनियर और मुंबई के कारोबारी ने सांसारिक मोहमाया त्यागकर संन्यास ले लिया है। दोनों युवाओं ने पिंडदान कर आध्यात्म की राह चुनी।

Jul 30, 2026 - 14:34
0
एयर इंडिया के इंजीनियर और मुंबई के कारोबारी ने छोड़ी सुख-सुविधा, उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में लिया संन्यास

उज्जैन : मध्य प्रदेश की पवित्र धार्मिक नगरी उज्जैन से एक बेहद हैरान और प्रेरित करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो पढ़े-लिखे युवाओं ने अपने सुख-सुविधाओं से भरे सांसारिक जीवन को हमेशा के लिए त्याग कर संन्यास का मार्ग अपना लिया है। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले मनीष कुमार बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एयर इंडिया कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, जो अपनी अच्छी-खासी नौकरी को 15 दिन पहले ही छोड़कर सीधे उज्जैन पहुँचे थे। वहीं, उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले संचित शर्मा मुंबई में अपनी खुद की एक प्लेसमेंट कंपनी का सफलतापूर्वक संचालन करते थे। इन दोनों ही युवाओं ने भौतिक सुखों को छोड़कर पूरी तरह से अध्यात्म की कठिन राह को चुन लिया है।

✈️ एयर इंडिया की लाखों की नौकरी में नहीं लगा मन, आध्यात्म की ओर झुकाव

उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ रोड पर स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में इन दोनों युवाओं ने वैदिक विधि-विधान और परंपरा के अनुसार अपना मुंडन करवाकर और खुद का पिंडदान करने के बाद संन्यास की दीक्षा ग्रहण की है।

25 वर्षीय युवा मनीष कुमार ने अपने इस बड़े फैसले के बारे में खुलकर बात करते हुए बताया, ''बचपन के शुरुआती दिनों से ही मेरा गहरा झुकाव सनातन धर्म और आध्यात्मिक जीवन की तरफ था। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद मेरा चयन बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एयर इंडिया में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर हुआ था। मेरी मासिक सैलरी 55 हजार रुपये थी और मैंने 2 फरवरी 2022 को इस नौकरी को ज्वाइन किया था। लेकिन इतनी अच्छी और प्रतिष्ठित नौकरी करने के बावजूद मुझे कभी भी आंतरिक या आत्मिक संतोष (Mental Peace) की प्राप्ति नहीं हुई।''

🏢 मुंबई में खुद की कंपनी चलाते थे संचित, धार्मिक यात्राओं से मिला सुकून

अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताते हुए मनीष ने आगे कहा कि महामंडलेश्वर शुभम आनंद गिरि महाराज के पावन सानिध्य में आने के बाद उन्हें आध्यात्मिक बल मिला, और अब वे आगे भी उन्हीं के मार्गदर्शन में अपना जीवन व्यतीत करेंगे। उनके परिवार में उनकी माताजी और एक बड़े भाई हैं।

दूसरी ओर, 35 वर्षीय संचित शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि वे मुंबई के अंधेरी इलाके में अपनी एक प्लेसमेंट कंपनी का संचालन करते थे। वे मात्र 5 वर्ष की छोटी आयु से ही अध्यात्म और ईश्वर से जुड़े हुए थे और काफी लंबे समय से संन्यास लेने का मन बना रहे थे। हालांकि उनकी प्लेसमेंट कंपनी बहुत अच्छी और मुनाफे में चल रही थी, और वे अक्सर धार्मिक यात्राएं भी करते रहते थे, लेकिन फिर भी उनका मन सांसारिक मोहमाया से विरक्त हो चुका था।

🧘‍♂️ मौनी आश्रम में संन्यास लेने वाले युवाओं का बढ़ा सिलसिला

संचित शर्मा का कहना है कि अध्यात्म से उनका जुड़ाव बचपन से ही बहुत गहरा रहा है, जिसके चलते उन्होंने अपने सांसारिक जीवन का पूरी तरह त्याग करके खुद का पिंडदान किया और संन्यास ग्रहण कर लिया है। उनके परिवार में उनके दो भाई और तीन बहनें हैं, जिनमें एक भाई और एक बहन उनसे बड़े हैं। अब वे पूरी तरह से अपने गुरुदेव के सानिध्य में रहकर आगे की आध्यात्मिक सेवा करेंगे।

आपको बता दें कि उज्जैन के इसी प्रसिद्ध मौनी आश्रम में कुछ महीने पहले ही चर्चित सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने भी संन्यास की दीक्षा ली थी। इसके अलावा यहाँ एक अन्य छात्र और एक मुस्लिम युवक द्वारा भी संन्यास ग्रहण किए जाने के मामले पहले भी चर्चा में आ चुके हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User