वराहमिहिर की प्राचीन पद्धति से हुई भविष्यवाणी, विदिशा में वायु परीक्षण के बाद अच्छी बारिश और खुशहाली के योग

विदिशा की लुहांगी पहाड़ी पर 126वें साल वराही संहिता पद्धति से वायु परीक्षण किया गया। इस प्राचीन परंपरा के अनुसार इस वर्ष देश में अच्छी बारिश और फसल की भविष्यवाणी की गई है।

Jul 30, 2026 - 14:46
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वराहमिहिर की प्राचीन पद्धति से हुई भविष्यवाणी, विदिशा में वायु परीक्षण के बाद अच्छी बारिश और खुशहाली के योग

विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा शहर की ऐतिहासिक लुहांगी पहाड़ी पर हर साल की तरह इस बार भी वराह मिहिर के प्राचीन ग्रंथ 'वराही संहिता' की पद्धति के अनुसार पारंपरिक वायु परीक्षण किया गया। इस विशेष दिन और इस परंपरा को देखने के लिए लोग पूरे सालभर बेसब्री से इंतजार करते हैं। गुरु पूर्णिमा की संध्या के समय लुहांगी पहाड़ी पर विदिशा के स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। वराही संहिता पद्धति पर आधारित यह पारंपरिक वायु परीक्षण इस वर्ष 126वें साल सफलतापवूर्क संपन्न किया गया, जिसके बाद पूरे देश में आने वाले समय में बारिश की स्थिति और कृषि फसलों की पैदावार को लेकर महत्वपूर्ण भविष्यवाणियाँ की गईं।

📜 125 साल पुरानी प्राचीन परंपरा का हो रहा है निरंतर निर्वहन

विदिशा के सबसे ऊंचे और सर्वोच्च स्थल राजेंद्रगिरी, जिसे स्थानीय रूप से 'लुहांगी पहाड़ी' के नाम से जाना जाता है, पर पिछले 126 वर्षों से चली आ रही इस अनूठी पारंपरिक वायु परीक्षण की परंपरा को इस वर्ष भी पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किया गया। धर्माधिकारी कार्यालय द्वारा आयोजित इस विशेष परीक्षण के माध्यम से वर्षा की स्थिति और कृषि उत्पादन का पारंपरिक ज्योतिषीय आकलन किया जाता है।

वरिष्ठ धर्माधिकारी स्व. पंडित उमा शंकर चतुर्वेदी शास्त्री द्वारा लगभग 125 वर्ष पूर्व इस महान परंपरा की शुरुआत की गई थी, जिसे वर्तमान में उनके उत्तराधिकारी धर्माधिकारी गिरधर गोविंद प्रसाद शास्त्री द्वारा इसके 126वें वर्ष में भी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

💨 किस प्रकार किया जाता है वराही संहिता पद्धति से वायु परीक्षण?

प्राचीन ज्योतिष शास्त्र के महान आचार्य वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ 'वराही संहिता' की वैज्ञानिक एवं ज्योतिषीय पद्धति के अनुसार यह वायु परीक्षण किया जाता है। इस पारंपरिक परीक्षण की पूरी प्रक्रिया के तहत एक लंबी छड़ी के ऊपरी सिरे पर सूती धागे से कपास को बांधकर हवा की दिशा और उसके प्रवाह (डाइरेक्शन) का बारीकी से अध्ययन किया जाता है।

शाम के वक्त जब परीक्षण किया गया, तो वायु मुख्य रूप से पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई पाई गई। इस संबंध में धर्माधिकारी गिरधर गोविंद प्रसाद शास्त्री ने जानकारी देते हुए बताया, ''पूर्व दिशा की ओर बहने वाली वायु का यह प्रवाह उत्तम और अच्छी वर्षा का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है। इस वर्ष हमारे देश और इस पूरे क्षेत्र में खंड वृष्टि यानी स्थान-विशेष पर रुक-रुक कर होने वाली बारिश के साथ-साथ कुल मिलाकर पर्याप्त और बहुत अच्छी वर्षा होने का प्रबल योग बन रहा है।''

🌾 किसानों के लिए बेहद खुशहाली और समृद्धिदायक रहेगा यह साल

धर्माधिकारी गिरधर गोविंद प्रसाद शास्त्री ने अपनी भविष्यवाणी में आगे यह भी स्पष्ट किया कि, ''इस वर्ष बेहतर मानसून के चलते कृषि उत्पादन में अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिलेगी। यह पूरा वर्ष हमारे देश के अन्नदाता किसानों के लिए बेहद खुशहाली और समृद्धि लेकर आने वाला सिद्ध होगा।''

इस पारंपरिक वायु परीक्षण कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रमुख रूप से ज्योतिष शास्त्र के प्रख्यात जानकार पंडित केशव चतुर्वेदी, प्रसिद्ध वास्तु विशेषज्ञ डॉ. कपिल चतुर्वेदी, सनातन हिंदू उत्सव समिति के पूर्व अध्यक्ष पंडित अतुल तिवारी तथा मयंक सक्सेना सहित अनेक लोग उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने।

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