भारत में बिकने वाले मशहूर व्हिस्की और रम ब्रांड्स पर FSSAI का कड़ा एक्शन, बिक्री पर पाबंदी

FSSAI ने व्हिस्की और रम में कृत्रिम फ्लेवर की मिलावट पाए जाने के बाद एंटीक्विटी ब्लू, रॉयल चैलेंज और ओल्ड मोंक सहित कई लोकप्रिय ब्रांड्स की बिक्री पर रोक लगा दी है।

Aug 03, 2026 - 19:36
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भारत में बिकने वाले मशहूर व्हिस्की और रम ब्रांड्स पर FSSAI का कड़ा एक्शन, बिक्री पर पाबंदी

देश के खाद्य सुरक्षा नियामक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए भारत में बिकने वाले कुछ सबसे मशहूर व्हिस्की और रम ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई डियाजियो इंडिया की यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू बेवरेजेज तथा मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर जैसी कंपनियों द्वारा निर्मित शराब पर की गई है। नियामक की प्रयोगशाला जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि जिन ड्रिंक्स का स्वाद पूरी तरह प्राकृतिक तरीकों और लंबे समय तक स्टोर करने (एजिंग प्रोसेस) के बाद आना चाहिए था, उनमें इन कंपनियों द्वारा कृत्रिम फ्लेवर (आर्टिफिशियल फ्लेवर) की मिलावट की जा रही थी।

⚠️ मिलावट का यह नायाब तरीका कंपनियों को पड़ा भारी

दरअसल, कोई भी अच्छी और उच्च गुणवत्ता वाली शराब अपनी प्योरिटी, इस्तेमाल किए गए बेहतरीन कच्चे माल और उसे सहेज कर रखने की लंबी अवधि (मैचुरेशन पीरियड) से पहचानी जाती है।

लेकिन FSSAI की लैबोरेटरी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अपने उत्पादों में रम जैसा स्वाद लाने के लिए अलग से ‘रम फ्लेवर’ तथा व्हिस्की के लिए ‘व्हिस्की फ्लेवर’ जैसे रसायनों की मिलावट कर रही थीं। नियामक ने अपने स्पष्ट बयान में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शराब बनाने की ऐसी कोई भी मान्यता प्राप्त या वैध प्रक्रिया नहीं है, जहाँ रम के अंदर ही रम का कृत्रिम फ्लेवर बाहर से डाला जाए। ऐसा करना सीधे तौर पर उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के तय मानकों का खुला उल्लंघन है।

🚫 इन चुनिंदा बड़े ब्रांड्स और उत्पादों पर हुई सख्त कार्रवाई

FSSAI के इस कड़े और अचानक आए फैसले का असर कई नामी-गिरामी कंपनियों के उत्पादों पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स द्वारा तैयार की जाने वाली ‘एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की’ (Antiquity Blue Whisky) तथा ‘रॉयल चैलेंज व्हिस्की’ पर यह प्रतिबंध लागू होगा।

इसी राज्य में इनब्रू बेवरेजेज द्वारा उत्पादित ‘बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की’ और ‘ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम’ की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, महाराष्ट्र में मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर द्वारा निर्मित देश की बेहद लोकप्रिय ‘ओल्ड मोंक’ (Old Monk) रम के तीन अलग-अलग वेरिएंट्स को भी इस बैन के दायरे में रखा गया है। हालांकि, फिलहाल यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका है कि यह पाबंदी सिर्फ इन्हीं खास फैक्ट्रियों में बनी शराब पर लागू होगी या देश भर की अन्य यूनिट्स पर भी इसका असर पड़ेगा।

💰 मुनाफे के लिए शॉर्टकट अपनाना कंपनियों के लिए बना मुसीबत

भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, किसी भी अल्कोहलिक पेय पदार्थ में केवल प्राकृतिक रूप से स्वाद बढ़ाने वाले तत्वों के इस्तेमाल की ही अनुमति दी जाती है।

इसके विपरीत, जांचे गए इन उत्पादों में बाहरी कृत्रिम या प्रकृति के समान दिखने वाले हानिकारक रसायनों का उपयोग पाया गया। FSSAI ने इन सभी उत्पादों को ‘सब-स्टैंडर्ड’ यानी घटिया दर्जे का करार दिया है। इस तरह के शॉर्टकट अपनाकर शराब निर्माता कंपनियां उत्पादन की महंगी और लंबी प्रक्रियाओं से आसानी से बच जाती हैं। असल में शराब का असली फ्लेवर शीरा (मोलासेस), माल्ट या अंगूर जैसे प्राकृतिक कच्चे माल को सही तरीके से मैच्योर करने पर ही उभर कर आता है, जिसकी जगह इन कंपनियों ने केवल रसायनों का सहारा लिया।

🎯 नियामक के रडार पर अब कई अन्य बड़ी कंपनियां भी

यह पूरी कार्रवाई खाद्य और पेय पदार्थ (Food and Beverage) सेक्टर में FSSAI की बढ़ती सख्ती और निगरानी का ही एक अहम हिस्सा है।

नियामक अब बाजार में बिकने वाले हर उस उत्पाद की बारीकी से जांच कर रहा है, जो ग्राहकों को भ्रमित कर सकता है। इससे पहले भी प्राधिकरण ने पेप्सी और रेड बुल जैसी दिग्गज कंपनियों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे अपने अत्यधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों को ‘एनर्जी ड्रिंक’ के भ्रामक नाम से बेचना तुरंत बंद करें। भले ही उस दौरान कंपनियों ने इस फैसले को टालने के तमाम प्रयास किए, लेकिन नियामक अपने सख्त रुख पर पूरी तरह कायम रहा।

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