सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से की अपील, ईरान पर नए सैन्य हमले न करने को कहा

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर नए सैन्य हमले न करने की अपील की है। इससे सऊदी के विजन 2030 पर असर पड़ सकता है।

Aug 03, 2026 - 19:55
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सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से की अपील, ईरान पर नए सैन्य हमले न करने को कहा

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर किसी भी तरह के नए सैन्य हमले नहीं करने की सख्त अपील की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को दोनों शीर्ष नेताओं के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई। इस बातचीत के दौरान क्राउन प्रिंस ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देश ईरान पर दोबारा हमला करते हैं, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव और अधिक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन वर्तमान में ईरान के प्रमुख ऊर्जा ठिकानों पर हमले के विकल्पों पर विचार कर रहा है। यह पूरी चर्चा तब शुरू हुई, जब ईरान द्वारा जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया गया और साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

🏗️ सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ परियोजना पर मंडराया संकट

सऊदी अरब के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता उसकी बेहद महत्वाकांक्षी और देश की दिशा बदलने वाली योजना ‘विजन 2030’ है।

इस प्रमुख योजना का मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को केवल कच्चे तेल के निर्यात पर निर्भरता से मुक्त करना है, बल्कि सऊदी अरब को वैश्विक स्तर पर निवेश, व्यापार, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और नई आधुनिक तकनीक का एक बड़ा केंद्र बनाना है। सऊदी सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्ला बिन फराह अल-शाया का इस संबंध में कहना है कि ‘विजन 2030’ इस समय पूरे देश की सबसे अहम और संवेदनशील राष्ट्रीय परियोजना है। यदि खाड़ी क्षेत्र में कोई बड़ा और व्यापक युद्ध छिड़ जाता है, तो देश में आने वाला विदेशी निवेश सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है, पर्यटन उद्योग को भारी झटका लग सकता है और देश के आर्थिक विकास की गति काफी धीमी पड़ सकती है।

⚠️ ईरान की कड़ी चेतावनी और सऊदी अरब का कूटनीतिक रुख

दूसरी ओर, ईरान पहले ही दुनिया को यह चेतावनी दे चुका है कि यदि अमेरिका उस पर कोई नया सैन्य हमला करता है, तो वह केवल इजराइल को ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों (Gulf Countries) की सीमा के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य अहम ठिकानों को भी अपने हमलों का निशाना बना सकता है।

यद्यपि सऊदी अरब पारंपरिक रूप से अमेरिका का एक घनिष्ठ और रणनीतिक सहयोगी रहा है, लेकिन इस बार वह क्षेत्र में युद्ध को और अधिक भड़काने के बजाय कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही हर समस्या का समाधान चाहता है। यही वजह है कि क्राउन प्रिंस ने सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से सैन्य कार्रवाई रोकने की पुरजोर अपील की है।

🇾🇪 यमन के हूती विद्रोहियों के संघर्ष से सऊदी अरब ने क्या सीखा?

अमेरिका की पूर्व रक्षा अधिकारी और पश्चिम एशिया मामलों की जानी-मानी विशेषज्ञ डाना स्ट्रॉल का इस पर मानना है कि सऊदी अरब ने पिछले कई वर्षों तक यमन के हूती विद्रोहियों के साथ लंबा और कठिन संघर्ष झेला है।

इस कड़वे अनुभव से सऊदी नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह समझ आ चुकी है कि केवल सैन्य ताकत या हथियारों के दम पर हर समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर कई बड़े सैन्य अभियान चलाए हैं, लेकिन इसके बावजूद हूती विद्रोहियों का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका। यदि सऊदी अरब अब दोबारा किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आता है, तो उसकी ‘विजन 2030’ जैसी भविष्य की योजना पर बेहद गंभीर और नकारात्मक असर पड़ सकता है।

🤝 तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत और मध्यस्थता की कोशिशें जारी

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, तुर्किये और खुद सऊदी अरब के शीर्ष नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की है।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर कोई भी हमला किया, या फिर किसी अन्य देश ने ऐसे हमलों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन किया, तो ईरान की तरफ से उसका बेहद कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, कतर इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। कतर के कूटनीतिक अधिकारी अमेरिका, ईरान और ओमान के साथ लगातार उच्चस्तरीय बातचीत कर रहे हैं, ताकि दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को सुरक्षित रूप से फिर से खोला जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके।

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