Bhopal Housing Project: भोपाल होगा झुग्गी-मुक्त! बाणगंगा और दानापानी में 3,732 करोड़ से बनेंगे 27 हजार आधुनिक मकान
भोपाल को झुग्गी-मुक्त बनाने के लिए 3,732 करोड़ का हाउसिंग प्रोजेक्ट। बाणगंगा और दानापानी में 27 हजार आधुनिक फ्लैट्स का होगा निर्माण। विस्थापितों को मिलेगा किराया।
भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राजधानी भोपाल को झुग्गी-मुक्त बनाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी प्लान तैयार किया है। इस परियोजना के तहत शहर के दो प्रमुख घनी आबादी वाले क्षेत्रों—बाणगंगा और दानापानी का पूरी तरह कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए 3,732 करोड़ रुपये के दो बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। 'हाउसिंग फॉर ऑल' योजना के अंतर्गत बनने वाले इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से 27 हजार आधुनिक मकानों का निर्माण होगा।
🏠 बाणगंगा प्रोजेक्ट: 6 हजार परिवारों को मिलेगा नया आशियाना
बाणगंगा झुग्गी क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए 968 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। यहाँ वर्तमान में 5 बड़े क्लस्टरों में 6 हजार 42 परिवार निवास करते हैं। जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए यहाँ 'स्टिल्ट-पोडियम' आधारित 15 मंजिला बहुमंजिला इमारतें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही, यहाँ 45 मीटर चौड़ी सड़क और नदी पुनरुद्धार परियोजना का भी विकास किया जाएगा।
🌳 दानापानी प्रोजेक्ट: भोपाल का अब तक का सबसे बड़ा हाउसिंग हब
दानापानी में सब्जी फार्म के पास की शासकीय भूमि पर बनने वाला यह प्रोजेक्ट भोपाल का अब तक का सबसे बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट होगा। 20.69 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस 2,866 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में कुल 21 हजार 255 आवास बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की खासियत यहाँ का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें 132 केवी का विद्युत ग्रिड और 2 हजार पेड़ों वाला एक भव्य 'अर्बन फारेस्ट' भी शामिल होगा।
💰 विस्थापित परिवारों के लिए 6,000 रुपये मासिक किराया
पुनर्वास नीति के तहत निर्माण अवधि (अधिकतम तीन साल) के दौरान विस्थापित होने वाले परिवारों का विशेष ध्यान रखा गया है। बाणगंगा परियोजना में प्रभावित प्रत्येक परिवार को सरकार 6,000 रुपये प्रति माह किराया देगी, ताकि वे निर्माण कार्य के दौरान कहीं और सम्मानजनक ढंग से रह सकें। इस मद पर सरकार करीब 130.50 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
🤝 पीपीपी मॉडल से मिलेगी गति
नगर निगम भोपाल ने इस पूरे प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत निजी डेवलपर्स को पुनर्विकास की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिसके बदले उन्हें व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए जमीन दी जाएगी। इस मॉडल से नगर निगम पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और निजी निवेश के माध्यम से शहर को वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सकेगा। नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही धरातल पर काम शुरू होगा।
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