सतना सेंट्रल जेल में गूंजे बम-बम भोले के जयकारे, महिला और पुरुष बंदियों ने किया भव्य जलाभिषेक
सतना केंद्रीय जेल में सावन की दशमी पर 1700 कैदियों ने 1.25 लाख मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका जलाभिषेक किया। जेल परिसर में भक्तिमय माहौल नजर आया।
पवित्र सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष समय माना जाता है, जिसमें शिव भक्त विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। इसी आस्था और भक्ति के क्रम में सावन की दशमी तिथि पर रविवार को सतना केंद्रीय जेल के भीतर एक बेहद अनूठा और दिव्य नजारा देखने को मिला। जेल प्रशासन द्वारा यहां बंदियों के लिए विशेष रूप से शिवलिंग पूजा और जलाभिषेक का भव्य आयोजन किया गया, जिससे पूरी जेल का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में कैदियों का उत्साह देखते ही बनता था, और सभी ने पूरे अनुशासन व श्रद्धा के साथ इस अनुष्ठान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
📿 कैदियों ने खुद बनाए सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग, महिला बंदियों ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
सतना केंद्रीय जेल में बंद करीब 1700 कैदी भाई-बहनों ने मिलकर अपने हाथों से 1.25 लाख (सवा लाख) मिट्टी के छोटे-छोटे सुंदर शिवलिंगों का निर्माण किया। इसके बाद सावन की दशमी तिथि के पावन अवसर पर रविवार को इन सभी शिवलिंगों की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। कैदियों ने दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल अर्पित कर उनका जलाभिषेक किया। इस दौरान सामने आए वीडियो में कैदियों के चेहरे पर एक अलग ही आत्मसंतोष और उत्साह साफ झलक रहा था। खास बात यह रही कि इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में पुरुष बंदियों के साथ-साथ महिला बंदियों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पूरे उत्साह से अनुष्ठान संपन्न किया।
🌿 कैदियों के विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास, जेल अधीक्षक ने साझा किए विचार
जेल में बंदियों का कहना था कि ऐसे धार्मिक और रचनात्मक आयोजनों से उनके मन को गहरी मानसिक शांति, स्थिरता और सकारात्मक विचार मिलते हैं। इससे पहले भी जेल में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो चुका है, जिससे कैदी काफी प्रेरित हुए थे। रविवार के इस अनुष्ठान में बंदियों ने नाचने-गाने के साथ-साथ भगवान शिव की भव्य बारात भी निकाली।
इस पूरे आयोजन पर प्रकाश डालते हुए जेल अधीक्षक लीना कोष्टा ने बताया कि श्रावण मास की दशमी तिथि के उपलक्ष्य में केंद्रीय जेल सतना में लगभग सवा लाख शिवलिंग निर्माण का यह वृहद कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें बंदियों ने बेहद श्रद्धा दिखाई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक और सकारात्मक आयोजनों का मुख्य उद्देश्य बंदियों की मानसिक स्थिति को दुरुस्त रखना और उनके विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाना है, ताकि वे अपराध का रास्ता छोड़कर एक बेहतर इंसान बन सकें।
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