ग्वालियर में साइबर ठगों को सिम कार्ड सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, 6 आरोपी गिरफ्तार
ग्वालियर में साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड सप्लाई करने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
देशभर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस भले ही तमाम प्रयास कर रही हो, लेकिन शातिर ठग नए-नए तरीकों से लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। अब इस साइबर जालसाजी के तार मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से भी जुड़ते हुए नजर आ रहे हैं। यहाँ साइबर ठगों को अवैध रूप से सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक बड़े और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इंडियन साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार पर ग्वालियर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले ग्रामीणों के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल कर साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड बेच रहे थे।
🔍 ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत खुलासे: 150 से ज्यादा मामलों में सामने आया फर्जी सिम का जाल
ग्वालियर साइबर सेल प्रभारी सीएसपी मनीष यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि भोपाल पुलिस मुख्यालय से मिले मोबाइल नंबरों के डेटा की जब स्थानीय स्तर पर जांच की गई, तो ग्वालियर में ऐसे 150 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए। इन मामलों की तह तक जाने के लिए पुलिस ने 'ऑपरेशन FAST 2.0' (फोर्ज एक्टिवेशन सिम टर्मिनेशन) के तहत थानों की टीमों को टास्क सौंपा और सिम धारकों से भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर ये मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड थे, उन्हें इस बात की कोई जानकारी ही नहीं थी कि उनके नाम पर चल रहे इन नंबरों का इस्तेमाल करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा है।
💡 कैसे काम करता था जालसाजों का यह नेटवर्क? फ्री रिचार्ज और डेटा का दिया जाता था झांसा
जांच में यह बात सामने आई कि ग्रामीण इलाकों में सक्रिय ये आरोपी एजेंट लोगों को एक महीने के फ्री इंटरनेट डेटा और मोबाइल रिचार्ज का लालच देते थे। उनकी इस चिकनी-चुपड़ी बातों में खासकर ग्रामीण महिलाएं और युवा आसानी से फंस जाते थे। एजेंट सिम पोर्ट करने के नाम पर जब ग्राहक का अंगूठा लगवाते थे, तो वे ग्राहक के लिए एक निशान लेते समय चुपके से दो से तीन बायोमेट्रिक निशान अतिरिक्त रूप से सेव कर लेते थे। बाद में उन्हीं निशानों और दस्तावेजों के जरिए वे कई अन्य फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट कर लेते थे और उन्हें साइबर ठगों को 200 से 500 रुपए में बेच देते थे। मोहना क्षेत्र से शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने बिजौली, हस्तिनापुर, हजीरा, सिरौल और महाराजपुरा थाना क्षेत्रों से जुड़े अमन राजावत, प्रदीप राजावत, संदीप राजावत, मंजेश जाटव सहित कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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