मीट से भी ज्यादा प्रोटीन, मानसून की सबसे पावरफुल सब्जी 'पडोरा' बिक रही है 320 रुपये किलो तक

शहडोल में हरछठ व्रत के अवसर पर जंगली पडोरा की मांग बढ़ गई है। बिना हल चले प्राकृतिक रूप से उगने वाली इस सब्जी का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है।

Sep 02, 2026 - 18:49
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मीट से भी ज्यादा प्रोटीन, मानसून की सबसे पावरफुल सब्जी 'पडोरा' बिक रही है 320 रुपये किलो तक

विंध्य क्षेत्र के शहडोल जिले में हरछठ का त्योहार पारंपरिक नियमों और निष्ठा के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर व्रत रखने वाली महिलाएं कड़े नियमों का पालन करते हुए विशेष रूप से जंगली सब्जियों का सेवन करती हैं, जिनमें 'पडोरा' (ककोड़ा) की मांग सबसे ज्यादा रहती है। शहडोल सब्जी मंडी में पडोरा की तलाश कर रही निशू तिवारी जैसी कई व्रती महिलाओं को यह सब्जी काफी मशक्कत के बाद मिल पाई, वह भी काफी महंगे दामों पर। जानकारों के मुताबिक, हरछठ के दिन ऐसी चीजों का सेवन वर्जित माना जाता है जो खेत में हल या ट्रैक्टर से जुताई के बाद उगी हों, यही वजह है कि जंगलों और मेढ़ों पर अपने आप उगने वाली पडोरा की इस दिन विशेष मांग होती है।

💰 आम दिनों से काफी महंगे बिक रहे दाम: छोटे आकार का देसी पडोरा 320 रुपये किलो तक पहुँचा

आम तौर पर बाजार में पडोरा की सब्जी 200 से 240 रुपये प्रति किलो के आसपास मिलती है, लेकिन हरछठ के त्योहार के नजदीक आते ही इसके दाम आसमान छूने लगते हैं। खुले बाजार में छोटे आकार का देसी पडोरा 80 रुपये पाव यानी करीब 320 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। सब्जी व्यापारी रामप्रताप साहू बताते हैं कि त्योहार से एक दिन पहले क्वालिटी और साइज के हिसाब से इसके दाम अलग-अलग जगहों पर 240 से 300-320 रुपये किलो तक दर्ज किए जाते हैं, फिर भी ग्राहकों की खरीददारी में कोई कमी नहीं आती है।

📜 धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व: बिना हल चले पैदा होने वाला फल है पडोरा, मीट से भी ज्यादा है प्रोटीन

ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के अनुसार, हरछठ (भाद्रपद शुक्ल पक्ष) के व्रत में पडोरा खाने और पूजा में चढ़ाने का गहरा पारंपरिक महत्व है। यह फल जमीन पर हल चलाए बिना जंगलों या खेतों की मेढ़ों पर प्राकृतिक रूप से उगता है, इसलिए इसे व्रत के नियमों के पूरी तरह अनुकूल माना जाता है। वहीं, कृषि वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह का कहना है कि पडोरा मानसून सीजन की सबसे ताकतवर सब्जियों में शुमार है, जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फोलिक एसिड और कैल्शियम पाए जाते हैं। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भी यह पचने में हल्की और मौसमी बीमारियों से बचाने वाली उत्तम औषधि मानी गई है।

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